धार्मिकमध्य प्रदेश

नीलकंठ मेला शुभारंभ कल से, नीलकन्ठ धाम में उमडता है श्रद्वालुओ का जनसैलाब, बंसत पंचमी से प्रांरम्भ होगा मेला

रिपोर्टर : रीना विनोद मालवीय
गैरतगंज । तहसील का सबसे प्राचीन तथा प्रसिद्व स्थान नीलकंठ मंदिर जो मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत हरदौट के पास ग्राम पाटन मे आता है। यहां पर प्रतिवर्ष बसंत पंचमी और महाशिवरात्रि पर विशाल मेले का आयोजन होता है। यहां पर लगने वाले मेले की प्रसिद्धि काफी दूर तक फैली हुई है। यह वर्ष मे दो बार भरने वाले मेले का प्रारंभ बाबा नीलकंठेश्वर को जल अर्पण करने के बाद होता है।
सम्पूर्ण मध्य भारत मे कही नहीं है 1100 रूद्र वाले शिवलिंग
वही जानकारों के अनुसार नीलकंठ मंदिर का प्राचीन एवं एतिहासिक महत्व है जो 11सौ रूद्र समेटे नीलकन्ठेव्श्रर शिवलिंग का है I जो प्रचलित कथाओ अनुसार यह प्राचीन ऐतिहासिक शिवलिंग दसवीं शताब्दी का है पाटन गांव दसवीं शताब्दी मे पोरा पुरा पाटन के नाम से जाना जाता था I जिसके राजा मगर सेन हुआ करते थे।वही नीलकंठ मंदिर की आधारशिला महंत भगवानदास द्वारा आठ दशक पूर्व रखी गई थीI जिसके उपरांत मंदिर का निर्माण कराया गया था I वही बुजुर्गों अनुसार उक्त शिवलिंग दसवीं शताब्दी से भी पूर्व से स्थित है।
कैसे पडा नीलकंठ नाम
शिवलिंग मे ग्यारह सौ रूद्र शिवलिंग को समेटे भारत वर्ष मे अपने आप मे अलग पहचानहै। ऐसा माना जाता है यहा शिवलिंग में विशेषता यह की दिखने मे नीला स्वरूप दिखाई देता है। जिसके चलते यह बाबा का नीलकन्ठेश्रर या नीलकंठ के नाम से मध्य भारत मे प्रचलित है।
छह दशक से लग रहा है मेला
इस प्राचीन शिवालय मे प्रतिवर्ष बसंत पंचमी और महा शिवरात्रि पर पूजा अर्चना करने के लिए दूर दूर से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है श्रद्धालुओं को यहां अपनी मन की मुरादे पूरी होने का विश्वास है वही ग्रामीणों की जानकारी के अनुसार यह मेला लगभग 70 सालो से लगता आ रहा है। मेले मे जिलें के ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी बाबा नीलकंठ के दर्शन करने व अपनी मुरादे लेकर आते है बाबा नीलकंठ सभी भक्तो के सारे दुखों को दूर कर अपने भक्तों सारी मुरादे पूरी करते है जिससे प्रतिवर्ष हजारो की संख्या मे श्रद्धालु यह आते है।
बसंत पंचमी पर बाबा नीलकंठ के जयकारो से गूंज उठेगा क्षेत्र
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर इस वर्ष भी श्री नीलकंठेष्वर धाम पाटन पर हजारो की संख्या में श्रद्धालु मन्दिर पहुंचकर बाबा के शिवलिंग पर जल अभिषेक करगे वही यहां होने वाले महारूद्र यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा । वही आयोजन के लिए मंदिर समिति द्वारा जोर शोर से तैयारियां की जा रही है। मेले में झूले विभिन्न प्रकार की पकवानो की दुकानों सहित अन्य दुकाने आकर्षण के केन्द्र रहेगें। मंदिर के पास प्राचीन ऐतिहासिक बाबडी है जिसका जल कभी समाप्त नही होता जिससे श्रद्धालु बाबा का अपने भक्ति भव्य से जल अभिषेक करेंगे।

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