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Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 27 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 27 जनवरी 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।लो
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल 🌐 *कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,* ✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_

☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार माघ माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 07:05 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 11:08 AM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी – भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और स्वामी शुक्र हैं !
⚜️ योग – शुक्ल योग 03:12 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
प्रथम करण : बालव 08:14 AM तक, बाद कौलव 07:05 PM तक
द्वितीय करण : तैतिल 05:53 AM तक गर पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 07:18:30
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:23:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:26 एएम से 06:19 एएम
🌇 प्रातः सन्ध्या – 05:52 एएम से 07:12 एएम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:13 पीएम से 12:55 पीएम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:21 पीएम से 03:04 पीएम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:54 पीएम से 06:20 पीएम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:07 एएम से 01:00 एएम, 28 जनवरी
सर्वार्थ सिद्धि योग – 11:08 एएम से 07:11 एएम, 28 जनवरी
❄️ रवि योग – 11:08 एएम से 07:11 एएम, 28 जनवरी
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मासिक कार्तिगाई/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ आडल योग/ अंतर्राष्ट्रीय प्रलय स्मरण दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट केक दिवस, इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना दिवस, प्रलय स्मरण दिवस, मशहूर अभिनेता अजीत जन्म दिवस, प्रसिद्ध सितार वादक निखिल बनर्जी स्मृति दिवस, प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता भारत भूषण स्मृति दिवस, साहित्यकार पंडित सिताराम चतुर्वेदी जन्म दिवस, हुमायूँ, मुग़ल बादशाह पुण्य तिथि, भारतीय अभिनेता बॉबी देओल जन्म दिवस, यहूदी स्मृति दिवस, बाबा दीप सिंह जी जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🏜️ Vastu tips 💰
इस संसार में मां लक्ष्मी की कृपा के बिना कोई भी व्यक्ति अन्न, वस्त्र और अन्य वैभव का सुख प्राप्त नहीं कर सकता है। माता लक्ष्मी की एक दृष्टि एक पल में रंक को राजा बना सकती हैं। वहीं देवी लक्ष्मी की नाराजगी राजा को रंक भी बना सकती है। इसलिए मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए हर व्यक्ति अपनी तरफ से हर संभव प्रयास और उपाय करता है। माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि , वैभव और ऐश्वर्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। देवी लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है क्योंकि वे एक स्थान पर या एक व्यक्ति के पास स्थायी रूप से नहीं रुकतीं। ऐसे में नियमित रूप से मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए जिससे उनकी कृपा दृष्टि सदैव आपके घर-परिवार पर बनी रहे। पूजा के अलावा लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत ही शुभ और लाभदायक माना गया है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अखरोट को भी रातभर भिगोकर रखने के बाद ही खाना चाहिए।
*अखरोट खाने के फायदे आपको सिर्फ 4 घंटे में मिलना शुरू हो जाते हैं। एक शोध में यह बात साबित हुई है। *अखरोट खाने से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से कम होता है, और इसका असर 4 घंटों में ही देखा जा सकता है।
*लगभग एक मुट्ठी अखरोट खाने पर आप 4 घंटे के अंदर इसके फायदे देख सकते हैं। *इससे न केवल आपका कोलेस्ट्रॉल कम होता है बल्कि यह आपकी नसों को और अधि‍क लचीला बनाने में भी मदद करता है।
*इसके साथ ही आपके शरीर में रक्त संचार आसान हो जाता है जिससे हृदय पर अधि‍क दबाव नहीं पड़ता। *अखरोट शरीर में थर्मोजेनिक प्रभाव पैदा करता है, जिससे हृदय की धमनियों में जमा हुआ वसा घुलनशील अवस्था में आकर धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।
*इस तरह से आपके हृदय को शरीर में रक्त संचार के लिए अधि‍क मेहनत नहीं करनी पड़ती। 💉 *आरोग्य संजीवनी* 🩸 ♦️थकान और कमजोरी के असली कारण 1️⃣ *नींद की कमी और मानसिक तनाव : आजकल भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग नींद से ज़्यादा स्क्रीन को प्राथमिकता देते हैं।
*रात को 6 घंटे से कम नींद लेने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जो ऊर्जा स्तर को गिरा देता है। *आयुर्वेदिक उपाय – रात को त्रिफला या ब्राह्मी का सेवन करें, नींद शांत होगी और थकान घटेगी।
2️⃣ *भोजन में पोषक तत्वों की कमी ज्यादातर लोगों का खाना केवल पेट भरने के लिए होता है, पोषण के लिए नहीं। *विटामिन B12, आयरन और विटामिन D की कमी शरीर की कोशिकाओं को कमजोर करती है, जिससे थकावट महसूस होती है।
*उपाय – हरी सब्ज़ियाँ, अंकुरित अनाज, गुड़, खजूर, दूध और घी का रोज़ सेवन करें। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बहुत समय पहले की बात है, जब रेलगाड़ियाँ या वाहन नहीं हुआ करते थे। तीर्थयात्रा का अर्थ था—मीलों पैदल चलना, जंगलों को पार करना और कठिनाइयों को सहना। उड़ीसा (तत्कालीन उत्कल) के एक छोटे से गाँव से दो ब्राह्मण तीर्थयात्रा के लिए निकले। एक अत्यंत वृद्ध और धनवान थे, दूसरे नवयुवक और निर्धन।
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वृद्ध ब्राह्मण के लिए यह यात्रा बहुत कठिन थी। पग-पग पर उन्हें सहारे की आवश्यकता थी। उस नवयुवक ब्राह्मण ने पूरे रास्ते उस वृद्ध की सेवा एक आज्ञाकारी पुत्र की भाँति की। वह उनका सामान उठाता, उनके पैर दबाता और उनके भोजन की व्यवस्था करता।
*महीनों की यात्रा के बाद वे श्रीधाम वृन्दावन पहुँचे। गोपाल जी (श्री कृष्ण) के भव्य मंदिर में दर्शन करते समय वृद्ध ब्राह्मण का हृदय कृतज्ञता से भर गया। उन्होंने नवयुवक का हाथ पकड़कर कहा, “बेटा! तुमने मेरी जो सेवा की है, वह मेरा सगा पुत्र भी नहीं कर सकता था। मैं तुम्हारे ऋण से मुक्त होना चाहता हूँ। मैं गोपाल जी को साक्षी मानकर प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं अपनी छोटी बेटी का विवाह तुमसे करूँगा।” *नवयुवक यह सुनकर सन्न रह गया। उसने विनम्रता से कहा, “बाबा, आप कुलीन और धनवान हैं, मैं एक दरिद्र ब्राह्मण हूँ। यह मेल आपके समाज और परिवार को स्वीकार नहीं होगा। कृपया भावना में बहकर ऐसी प्रतिज्ञा न करें।”
*किंतु वृद्ध ने हठपूर्वक कहा, “मैं जो कहता हूँ, वह करता हूँ। यह गोपाल जी का दरबार है, यहाँ किया गया वादा कभी झूठा नहीं हो सकता। “तीर्थयात्रा समाप्त कर जब वे अपने गाँव लौटे, तो वृद्ध ने अपने परिवार को अपनी प्रतिज्ञा के बारे में बताया। यह सुनते ही घर में भूचाल आ गया। *बड़े बेटे ने क्रोध में कहा, “पिताजी! क्या आपकी मति मारी गई है? उस भिखारी से मेरी बहन का विवाह? असंभव!” वृद्ध की पत्नी ने धमकी दे दी, “अगर यह अनर्थ हुआ, तो मैं विष खाकर जान दे दूँगी।”
*बेचारा वृद्ध धर्मसंकट में फँस गया। एक तरफ भगवान के सामने की गई प्रतिज्ञा थी, दूसरी तरफ परिवार का विरोध। अंततः मोह जीत गया और वे चुप साध गए।जब कई दिन बीत गए और विवाह की कोई चर्चा नहीं हुई, तो वह नवयुवक ब्राह्मण वृद्ध के घर पहुँचा। उसने हाथ जोड़कर कहा, “बाबा, आपने गोपाल जी के सामने वचन दिया था। अब आप पीछे क्यों हट रहे हैं?” *इससे पहले कि वृद्ध कुछ बोलते, उनका बड़ा बेटा बाहर आया और चिल्लाने लगा, “अरे धूर्त! तूने तीर्थयात्रा में मेरे बूढ़े पिता को नशा खिलाकर या बहला-फुसलाकर उनका धन ठग लिया और अब झूठी कहानियाँ गढ़ रहा है? निकल जा यहाँ से!” शोर सुनकर गाँव वाले इकट्ठे हो गए। नवयुवक ने पंचायत के सामने अपनी बात रखी कि वृद्ध ने गोपाल जी को साक्षी माना था। इस पर बड़े बेटे ने उपहास करते हुए एक शर्त रखी—वह जानता था कि यह असंभव है।
*उसने कहा, “तुम कहते हो कि भगवान साक्षी थे? ठीक है! यदि तुम्हारे वो गोपाल जी यहाँ आकर गवाही दे दें कि मेरे पिता ने वचन दिया था, तो मैं अपनी बहन का विवाह तुमसे कर दूँगा।”गाँव वाले हँसने लगे, लेकिन नवयुवक का चेहरा विश्वास से दमक रहा था। उसने कहा, “मुझे स्वीकार है। मैं अपने साक्षी को बुलाने जा रहा हूँ।” *नवयुवक वापस पैदल वृन्दावन पहुँचा। मंदिर में जाकर वह फूट-फूट कर रोने लगा। उसने कहा, “प्रभु! मुझे पत्नी का मोह नहीं है, लेकिन आपके सामने बोले गए वचन को यह दुनिया झूठ मान रही है। मेरे सत्य की नहीं, आपकी साख की रक्षा का प्रश्न है। आपको चलना होगा।”उसकी करुण पुकार सुनकर, पत्थर की मूर्ति से आवाज आई, “अरे पागल! कहीं पत्थर की मूर्तियाँ भी चला करती हैं?”
*नवयुवक ने तपाक से उत्तर दिया, “प्रभु! यदि पत्थर की मूर्ति बोल सकती है, तो वह चल भी सकती है। आपको मेरे साथ चलना ही होगा।” *भक्त के हठ के आगे भगवान हार गए। गोपाल जी ने कहा, “ठीक है, मैं चलूँगा। लेकिन मेरी एक शर्त है। मैं तुम्हारे पीछे-पीछे आऊँगा। मेरे पैरों के नूपुरों (घुंघरुओं) की रुनझुन से तुम्हें पता चलेगा कि मैं साथ हूँ। लेकिन याद रखना, तुमने जहाँ भी पीछे मुड़कर देखा, मैं वहीं स्थिर हो जाऊँगा और आगे नहीं बढ़ूँगा।” यात्रा शुरू हुई। आगे-आगे भक्त, पीछे-पीछे भगवान। मीलों तक नूपुरों की छम-छम ध्वनि भक्त को आश्वस्त करती रही कि उसके ठाकुर आ रहे हैं।
*दिन बीते, रातें बीतीं। वे उड़ीसा की सीमा में प्रवेश कर गए। गाँव (कटक के पास विद्यानगर) अब पास ही था। रास्ते में एक रेतीला मैदान आया। रेत में चलने के कारण भगवान के पैरों के घुंघरुओं की आवाज दब गई। नवयुवक को अचानक सन्नाटा महसूस हुआ। उसके मन में शंका ने जन्म ले लिया— “क्या प्रभु रुक गए? क्या वे वापस चले गए?” ‌ *गाँव की सीमा पर पहुँचकर, व्याकुलता में वह अपनी शर्त भूल गया और उसने झट से पीछे मुड़कर देख लिया। वहाँ साक्षात गोपाल जी खड़े थे, मंद-मंद मुस्कुराते हुए। लेकिन जैसे ही भक्त ने देखा, वे वहीं स्थिर हो गए। भगवान बोले, “वत्स! मैंने कहा था कि पीछे मत देखना। अब मैं यहाँ से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाऊँगा।”
*नवयुवक भागा-भागा गाँव गया और सबको बुला लाया। गाँव वाले, वह वृद्ध ब्राह्मण और उसका घमंडी बेटा—सब दौड़कर आए। उन्होंने देखा कि वृन्दावन के वही गोपाल जी, जो कभी नहीं हिलते, आज उनके गाँव के बाहर खड़े हैं। यह चमत्कार देखकर बड़े बेटे का अभिमान चूर-चूर हो गया। उसने भक्त के चरणों में गिरकर क्षमा माँगी।भगवान की गवाही साक्षात थी। प्रतिज्ञा पूरी की गई और धूमधाम से उस कन्या का विवाह नवयुवक भक्त से हुआ। *जिस स्थान पर भगवान रुके थे, वहाँ एक भव्य मंदिर बनाया गया। आज भी उड़ीसा (पुरी के निकट) में वह मंदिर ‘साक्षी गोपाल’ के नाम से प्रसिद्ध है। वहाँ भगवान की वही मूर्ति विराजमान है जो अपने भक्त के विश्वास को बचाने के लिए सैकड़ों मील पैदल चलकर आई थी।
═❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖═
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।
*_आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।

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