
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔱 *शुक्र प्रदोष व्रत आज*
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प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान होता है। इस दौरान भोलेनाथ बहुत उदार होते हैं और भक्तों पर अपना विशेष आशीर्वाद बनाए रखते हैं। माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना गया है। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और दांपत्य जीवन भी मधुर होता है।
📆 *प्रदोष व्रत 2026 कब है?*
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आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जनवरी, शुक्रवार के दिन सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 31 जनवरी, शनिवार को सुबह 8 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष काल की गणना के अनुसार जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत 30 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
🧾 *प्रदोष व्रत पूजन विधि_*
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माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि कर लेना चाहिए। इसके बाद, साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
अपने पूजा घर में एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाएं और उस पर माता पार्वती व शिवजी की प्रतिमा स्थापित करें। साथ ही, भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर भी अवश्य रखें। फिर, चारों तरफ गंगाजल से छिड़काव करें।_*
प्रदोष व्रत के दिन घर के मंदिर या पास के शिवालय में शिवलिंग का अभिषेक अवश्य करें। इसके लिए दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि का प्रयोग करना चाहिए। अभिषेक करने के साथ ही भोलेनाथ को बेलपत्र भी जरूर अर्पित करें।
भगवान शिव को फूल, नैवेद्य, चंदन, अक्षत, धूप-दीप आदि अर्पित करें। वहीं, माता पार्वती को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। फिर, विधि-विधान से माता पार्वती, शिवजी और गणेश भगवान की पूजा करें।
प्रदोष व्रत के दिन शाम को प्रदोष काल में स्वच्छ होने के पश्चात शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और साथ ही, ‘ओम नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
शाम को भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेशजी की विधि-विधान से पूजा आरती करने के पश्चात उन्हें भोग लगाएं।
💰 *प्रदोष व्रत के लाभ_*
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भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।_*
शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।_*
संतान सुख की प्राप्ति होती है।_*
पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
शनि दोष और ग्रह बाधाओं से राहत मिलती है।
⚜️ *शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व*
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शास्त्रों के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत अलग-अलग फल प्रदान करते हैं। शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से धन, वैवाहिक सुख और सौभाग्य की वृद्धि के लिए किया जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद मुद्रा में रहते हैं और इस समय की गई पूजा से वे शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।


