
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 06 मार्च 2026
06 मार्च 2025 दिन शुक्रवार को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का पवन व्रत भी है। इसे सामान्य भाषा में गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। आज का यह संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत सनातनी स्त्रियां अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए दिनभर अखंड उपवास रखकर, सांयकाल मैं भगवान श्रीगणेश जी की पूजा करने के बाद चंद्रमा देवता के निकलने ( चन्द्रोदय 21.20 पी एम) होने पर चंद्रमा देवता को देखकर श्री चंद्रमा देवता को अर्घ्य देकर फिर व्रत खोलते हैं। आज स्थायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌦️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 05:53 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 09:29 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र स्वामी चंद्रमा तो राशि कन्या इसका स्वामी बुध है। तथा नक्षत्र देवता सवितृ देव (सूर्य का एक रूप) है।
⚜️ योग : गण्ड योग 07:05 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि 05:53 PM तक
✨ द्वितीय करण : बव 06:31 AM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:26:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:02:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : शाम को 29:03 मिनट से शाम 29:52 बजे तक
🌇 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:27 मिनट से सुबह 06:41 बजें तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त: 12:10 PM से 12:57 PM (शुभ कार्य के लिए अच्छा समय)
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर को 14:30 मिनट से दोपहर 15:17 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:22 मिनट से 18:46 बजे तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:24 मिनट से शाम 19:38 बजे तक
💧 अमृत काल : रात्रि में 28:23 मिनट से 30:06 बजे तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 24:07 मिनट से 24:57 बजे तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – श्री गणेश संकष्ट चतुर्थी चन्द्रोदय 09.19/ छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती/ भालचन्द्र संकष्टी/ भद्रा/ आडल योग/ विडाल योग/ इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया स्मृति दिवस, घाना स्वतंत्रता दिवस, भारतीय क्रिकेटर अशोक पटेल जन्म दिवस, बिहार के मुख्यमंत्री राम सुंदर दास स्मृति दिवस, भारतीय प्रसिद्ध सांसद सच्चिदानन्द सिन्हा स्मृति दिवस, भारतीय पत्रकार, सम्पादक रामशरण जोशी जन्म दिवस, प्रसिद्ध क्रान्तिकारी अम्बिका चक्रवर्ती पुण्य तिथि, राष्ट्रीय पोशाक दिवस, भारतीय घुड़सवार फवाद मिर्ज़ा जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ सैयद अहमद जन्म दिवस, भारतीय पत्रकार रामशरण जोशी जन्म दिवस, राष्ट्रीय फ्रोजन फूड दिवस, फुटबॉल क्लब ‘मैड्रिड क्लब’ स्थापना दिवस, राष्ट्रीय स्प्रे टैनिंग दिवस, मातृ दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
नया घर बनाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन नींव रखने से पहले लागत के बारे में सोचा जाता है। इस दौरान बड़ा सवाल आता है कि लाल मिट्टी वाली ईंट का इस्तेमाल करें या फ्लाई ऐश ईंट का।पुराने समय से लाल ईंटों का चलन रहा है, फ्लाई ऐश ईंटें अब एक मजबूत और किफायती ऑप्शन बनकर ऊभर रही हैं।
*फ्लाई ऐश ईंटें न केवल लाल ईंटों से अधिक मजबूत हैं, बल्कि पानी भी कम सोखती हैं, जिससे भविष्य में दीवारों से प्लास्टर झड़ने या सीलन की समस्या नहीं होती है। लाल मिट्टी वाली ईंट और फ्लाई ऐश ईंट में अंतर जानने के बाद आप खुद समझ जाएंगे कि कौनसी वाली सबसे बढ़िया और किसे लगाने से घर बनाने में लागत कम आएगी। *अगर कुल लागत की बात करें, तो फ्लाई ऐश ईंटें ज्यादा किफायती साबित होती हैं। भले ही इनकी प्रति ईंट कीमत लाल ईंट के आसपास हो, लेकिन इनके इस्तेमाल से मसाले की बचत होती है, प्लास्टर कम लगता है और ईंटों की बर्बादी कम होती है। सिविल इंजीनियर के अनुसार, फ्लाई ऐश ईंटों का सिलेक्शन करने से घर बनाने की कुल लागत में अच्छी-खासी बचत कर सकते हैं।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना 7, 8 घंटे की नींद जरूरी है। जब हम पूरी नींद नहीं लेते, तो शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और वह ज्यादा कैलोरी का सेवन कर लेता है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से भी मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। धीरे-धीरे यह आदत वजन बढ़ने का कारण बन जाती है।
तनाव और हार्मोनल असंतुलन: लगातार मानसिक तनाव भी मोटापे का एक बड़ा कारण है। जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर में ‘कॉर्टिसोल’ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। कॉर्टिसोल शरीर को ऊर्जा बचाने और फैट जमा करने के लिए प्रेरित करता है, खासकर पेट के आसपास। तनाव के दौरान कई लोग “इमोशनल ईटिंग” का शिकार हो जाते हैं। यानी वे तनाव कम करने के लिए मीठा, तला-भुना या हाई-कैलोरी फूड ज्यादा खाने लगते हैं। इससे वजन तेजी से बढ़ सकता है।
☘️ आरोग्य संजीवनी 🪵
▪️दूध के साथ अश्वगंधा: सबसे सुरक्षित और असरदार विकल्प
*अगर आप अश्वगंधा के फायदों को बिना किसी साइड इफेक्ट के पाना चाहते हैं, तो दूध सबसे अच्छा विकल्प है। *क्यों? दूध की तासीर ठंडी होती है। जब गर्म तासीर वाली अश्वगंधा को ठंडी तासीर वाले दूध के साथ मिलाया जाता है, तो इसकी गर्मी बैलेंस हो जाती है।
*फायदे: यह मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, तनाव कम करने और गहरी नींद लाने में रामबाण है। *किसे लेना चाहिए? जिम जाने वाले लोगों, दुबलेपन से परेशान लोगों और पुरुषों की सेहत के लिए यह बेस्ट है।
▪️ *पानी के साथ अश्वगंधा: कब है फायदेमंद? *अक्सर लोग वजन घटाने या जल्दी में होने पर इसे पानी के साथ लेते हैं।
*क्यों? पानी एक न्यूट्रल माध्यम है। यह अश्वगंधा को जल्दी एब्जॉर्ब (सोखने) में मदद करता है। *फायदे: अगर आप वजन कम (Weight Loss) करना चाहते हैं, तो गुनगुने पानी के साथ अश्वगंधा लेना मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है।
*सावधानी: अगर आपको एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या है, तो खाली पेट पानी के साथ इसे लेने से बचें। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ जाजलि पौराणिक युग के एक महान ऋषि थे। एक बार उन्होंने कठिन तपस्या करने की ठानी। *वे एक वन पहुँचे जो जँगली जानवरों से भरा हुआ था। उसी वन में उन्होंने एक जगह अन्न-जल त्याग कर तपस्या प्रारम्भ की। वे तपस्या में ऐसे लीन हुए कि स्तंभित से हो गए। यहाँ तक कि उन्होंने अपनी प्राण-वायु को भी नियंत्रित कर रोक लिया और अविचल भाव से खड़े तपस्या करते रहे। बहुत समय बीत गया और उनकी लम्बी जटाओं ने उनके शरीर को घेर लिया। आस पास की लताएँ भी उनके चारो ओर लिपट गयीं। उनको एक वृक्ष समझ कर कई पक्षियों ने उनके ऊपर अपना घोंसला बना लिया।
*समय बीतता गया और पक्षियों ने कई अंडे दिए जिससे अन्य पक्षियों का जन्म हुआ। महर्षि जाजलि का शरीर एक वृक्ष की भांति बन गया जिसपर कई जीव-जंतुओं ने अपना ठिकाना बना लिया। बहुत काल के बाद जब उनकी तपस्या भंग हुई तो अपनी वो दशा देख कर स्वयं उन्हें भी अपनी इस कठिन तपस्या पर आश्चर्य हुआ। साथ ही साथ उन्हें इस बात का अभिमान भी हो गया कि उनके जैसी कठिन तपस्या कोई और नहीं कर सकता। उसी अभिमानवश उन्होंने आकाश की ओर देखकर कहा “आज मैंने धर्म को पा लिया।” *ईश्वर ने जब देखा कि उनका अनन्य भक्त अभिमान के वश में आ गया है तो उन्होंने उसे सही मार्ग पर लाने की ठानी। उसी समय एक आकाशवाणी हुई – “हे जाजलि! तुमने धर्म को जान लिया है ऐसा सोच कर व्यर्थ अभिमान ना करो। धर्म में तुम काशी के तुलाधार की तुलना नहीं कर सकते। अगर धर्म का वास्तविक ज्ञान चाहते हो तो काशी जाकर तुलाधार से मिलो।” जाजलि ने जब ऐसा सुना तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ और वे तुलाधार से मिलने काशी की ओर निकल पड़े।
*काशी पहुँच कर वे तुलाधार के पास पहुँचे जो अपनी दुकान पर ग्राहकों को सौदे दे रहा था। देखने में वो एक सामान्य मनुष्य लगता था पर उसके चेहरे पर असाधारण तेज था। जाजलि उसे देख कर आश्चर्य में पड़ गए कि सारा दिन ग्राहकों को सामान बेचने वाला तुलाधार किस प्रकार उनसे अधिक धर्म को समझ सकता है? ये सब सोचते हुए वे तुलाधार की दुकान के अंदर पहुँचे। *उन्हें देखते ही तुलाधार अपने स्थान से उठा और उनकी अभ्यर्थना करते हुए उन्हें आसन दिया। जलपान के बाद उसने मृदु स्वर में कहा – “आज तो मेरे भाग्य उदय हो गए कि वो महर्षि जाजलि के दर्शन हुए जिन्होंने इतनी घोर तपस्या कि उनके शरीर पर पक्षियों ने अपना घोसला भी बना लिया और उन्हें पता नहीं चला। ना जाने कितने जीव-जंतुओं को उन्होंने आश्रय दिया।”
*तुलाधार को इस प्रकार बोलते देख जाजलि आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने उससे पूछा कि “आप मुझे किस प्रकार जानते हैं।” इसपर तुलाधार ने कहा – “हे महर्षि! मैं सब जनता हूँ। अपनी कठोर तपस्या के गर्व में आकर अपने धर्म को जानने की बात की और आकाशवाणी होने पर मुझसे मिलने यहाँ आये।” अब तक जाजलि को भी पता चल गया कि तुलाधार कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। उन्होंने कहा – “हे महात्मा! आकाशवाणी की बात सत्य थी। आप अवश्य मुझे धर्म का वास्तविक रहस्य समझा सकते हैं। आपसे प्रार्थना है कि मुझे ये ज्ञान देकर कृतार्थ करें।” *तब तुलाधार ने हाथ जोड़ते हुए कहा “ये क्या कह दिया आपने? मैं तो एक साधारण मनुष्य हूँ। मैं किस प्रकार आप जैसे महाज्ञानी महात्मा को कोई ज्ञान दे सकता हूँ? पर आप मुझसे मिलने इतनी दूर आये हैं तो सुनिए। धर्म-अधर्म क्या है ये मुझे नहीं पता। मैं तो बस वो व्यव्हार की बात बताता हूँ जिसका मैं अनुसरण करता हूँ। ये कोई गूढ़ रहस्य तो नहीं है।
*किसी भी प्राणी से मोह ना करके जीविका चलना ही श्रेष्ठ माना गया है। मैं उसी धर्म के अनुसार जीवन निर्वाह करता हूँ। काठ और घाँस-फूस से मैंने अपना ये घर बनाया है। छोटी बड़ी सभी चीजें तो बेचता हूँ पर मदिरा नहीं बेचता। सब चीजें मैं दूसरों के यहाँ से खरीद कर लाता हूँ, स्वयं नहीं बनाता। सामान बेचने में किसी भी प्रकार के छल-कपट का सहारा नहीं लेता। सामान बेचने में मैं केवल उतना लाभ ही लेता हूँ जिससे मेरा और मेरे परिवार का भरण-पोषण हो सके। अपने ग्राहकों से कभी मैं मूल्य माँगता नहीं हूँ और जो भी वे दे देते हैं उसी में संतुष्ट रहता हूँ। *मैं ना किसी से अनुराग रखता हूँ, ना द्वेष, ना मैत्री, ना विरोध। सम्पूर्ण प्राणियों के लिए मेरे मन में एक सा भाव है। यही मेरा व्रत है। मेरा तराजू सबके लिए समान तौलता है। मैं किसी की निंदा अथवा स्तुति नहीं करता। क्षणभंगुर विषयों की इच्छा नहीं करता। अहिंसा को सबसे बड़ा कर्तव्य मानता हूँ। किसी को देखकर कोई कार्य नहीं करता। जो मेरी प्रशंसा करते हैं और जो मुझे बुरा-भला कहते हैं, दोनों मेरे लिए समान हैं। मुझे कोई प्रिय अथवा अप्रिय नहीं है। मैं एक झोपडी में भी उतने ही सुख से रह सकता हूँ जितने कि किसी महल में। मेरे लिए मिट्टी और स्वर्ण में कोई अंतर नहीं है। धर्म का रहस्य तो अत्यंत सूक्ष्म है, किसी के लिए कुछ और धर्म है तो किसी के लिए कुछ और। मेरा धर्म तो यही है किन्तु आपका मुझे ज्ञात नहीं।”
*_तुलाधार को इस प्रकार कहते सुन महर्षि जाजलि उसके सामने नतमस्तक हो गए। उन्होंने अश्रुपूरित स्वर में कहा – “आज आपने मेरी आँखें खोल दी। यही तो धर्म का वास्तविक रहस्य है। इस लोक में समदर्शी होना ही सबसे बड़ा धर्म है।”
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।



