ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 09 मई 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 09 मई 2026_
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 02:03 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र श्रवण 11:24 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु हैं। जिसके स्वामी शनिदेव हैं।
⚜️ योग – शुक्ल योग 02:35 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
प्रथम करण – बव 02:03 PM तक
द्वितीय करण – बालव 02:40 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:33:37
🌅 सूर्यास्तः – सायं 19:01:11
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:10 ए एम से 04:52 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:31 ए एम से 05:34 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:51 ए एम से 12:45 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 02:32 पी एम से 03:26 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:00 पी एम से 07:21 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:01 पी एम से 08:04 पी एम
💧 अमृत काल : दोपहर 12:06 पी एम से 01:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:56 पी एम से 12:38 ए एम, मई 10
सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः 05:34 ए एम से 11:24 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – कालाष्टमी/ मासिक कृष्ण जन्माष्टमी/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ आडल योग/ पंचक जारी/ (नोबेल पुरस्कार विजेता और भारत के राष्ट्रगान के रचयिता) रवींद्रनाथ टैगोर जयन्ती, राष्ट्रीय पशु आपदा तैयारी दिवस, राष्ट्रीय तीरंदाजी दिवस, राष्ट्रीय बेबीसिटर दिवस, राष्ट्रीय बटरस्कॉच ब्राउनी दिवस, महान योद्धा महाराणा प्रताप जयन्ती, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले जयन्ती, आर्यसमाजी भवानी दयाल संन्यासी पुण्य तिथि, स्वतंत्रता सेनानी केशवराव मारुतराव जेधे स्मृति दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ नेदुरुमल्ली जनार्दन रेड्डी स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी केशवराव मारुतराव जेधे जयन्ती, विश्व थैलेसीमिया जागरूकता दिवस, प्रवासी भारतीय दिवस, राष्ट्रीय गृह मोर्चा नायकों दिवस, विजय दिवस (Victory Day) ✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आजकल जोड़ों का दर्द एक सामान्य बीमारी है। क्या इसे नियंत्रित करने के लिए कोई प्राकृतिक उपाय और कोई प्राकृतिक आहार है?
*आजकल जोड़ों का दर्द ज्यादातर गलत जीवनशैली बढ़ते वजन कम शारीरिक सक्रियता और शरीर में पोषण की कमी से जुड़ा होता है इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक तरीके काफी मदद कर सकते हैं, रोजमर्रा में शरीर को हल्का सक्रिय रखना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचना जोड़ों पर दबाव कम करता है, आहार में हरी सब्जियां फल दालें सूखे मेवे हल्दी और कैल्शियम व विटामिन डी वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना हड्डियों और जोड़ों को सहारा देता है, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद शरीर की सूजन और थकान को कम करने में मदद करते हैं, सबसे ज्यादा फर्क लगातार सही आदतें अपनाने से आता है क्योंकि प्राकृतिक तरीके धीरे धीरे लेकिन *छठे स्थान में किसी भी राशि में सूर्य और मंगल की युति क्या फल मिलता है?
*छठे भाव में राहु-मंगल युति: “रणभूमि योग” की पूरी गाथा *ज्योतिष में कुछ युतियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें देखते ही अनुभवी ज्योतिषी भी एक पल के लिए रुक जाता है। राहु-मंगल युति उन्हीं में से एक है। और जब यह षष्ठ भाव में हो तो यह संयोग और भी जटिल, और भी गहरा हो जाता है।
*इसे मैं “रणभूमि योग” कहती हूँ। यह दो ज्वलनशील ग्रहों का मिलन है और जब यह शत्रु, रोग और संघर्ष के घर में घटित होता है, तब यह या तो अजेय योद्धा बनाता है या फिर आत्म-विनाश का रास्ता खोलता है। *पहले दोनों ग्रहों की प्रकृति समझो मंगल अग्नि है। साहस है। आक्रामकता है। वह ग्रह जो सीधे वार करता है, जो शत्रु को सामने देखकर लड़ता है। राहु धुआँ है। भ्रम है। वह ग्रह जो छुपकर काम करता है, जो नियमों को नहीं मानता। राहु जब मंगल के साथ होता है तो मंगल की ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है: ठीक वैसे जैसे जलती आग पर घी डाला जाए।
*शास्त्र में इसे अंगारक योग कहा गया है। *बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है: “राहुणा सह कुजयोगे: अंगारकः: तीव्रकोपी: साहसी: विघ्नकारकः”* *राहु के साथ मंगल की युति तीव्र क्रोध, असाधारण साहस और बाधाओं का कारण बनती है।
*षष्ठ भाव में यह युति: संदर्भ सब कुछ बदल देता है षष्ठ भाव शत्रु का भाव है। रोग का। ऋण का। संघर्ष का। लेकिन षष्ठ भाव की एक और प्रकृति है जो बहुत कम लोग जानते हैं: यह उपचय भाव है। आचार्य श्री गोपी राम ने स्पष्ट कहा है:”उपचये पापग्रहाः शुभफलदाः: क्रमेण वर्धमानाः”*
*उपचय भावों में पाप ग्रह समय के साथ बढ़ते-बढ़ते शुभ फल देते हैं। यानी राहु और मंगल दोनों के लिए षष्ठ भाव स्वाभाविक रूप से अनुकूल स्थान है। यह पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात है जो 90% लोग नहीं बताते। *शुभ पक्ष: जो इस युति की असली ताकत है शत्रुओं पर प्रभुत्व इस युति का सबसे बड़ा वरदान है। ये जातक शत्रु के हर दाँव को न केवल समझते हैं बल्कि उससे भी बड़ा दाँव खेलते हैं। सर्जरी, सेना, कानून, खेल, राजनीति या खोजी पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में असाधारण सफलता मिलती है। प्रतिस्पर्धा में ये जातक हार मानना नहीं जानते: जितना दबाव बढ़ता है, उतने ये और मज़बूत होते हैं। सर्जरी में विशेष योग है क्योंकि राहु चीरने-काटने का और मंगल शस्त्र का कारक है।
*कठिन पक्ष: और यहाँ honest रहना ज़रूरी है मंगल का क्रोध सीधा होता है: सामने आता है और चला जाता है। परन्तु राहु उस क्रोध को भीतर घुमाता है। यह जातक बाहर से शान्त दिखते हुए भीतर से धधकते हैं और जब यह क्रोध प्रकट होता है तो विनाशकारी होता है। आवेश में निर्णय लेना और अकारण झगड़ालू स्वभाव इनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। *दुर्घटनाओं और चोटों की सम्भावना अधिक रहती है: विशेषकर अग्नि, धातु या वाहन से। शत्रु सामने नहीं आते, पीठ पीछे से नुकसान पहुँचाते हैं। रक्तदाब, सूजन और पित्त सम्बन्धी समस्याएँ इस युति की विशिष्ट परेशानियाँ हैं। स्त्री जातक के लिए माता या सास से तीव्र वैचारिक मतभेद भी देखे जाते हैं क्योंकि राहु चौथे भाव को देखता है।
*राशियों के अनुसार प्रभाव मेष में स्वराशि मंगल होने से अदम्य साहस है परन्तु क्रोध पर नियंत्रण ज़रूरी। वृषभ में धन के लिए अत्यधिक श्रम करना पड़ता है। मिथुन में कानूनी बहस में उस्ताद होते हैं। कर्क में मंगल नीच का है: आवेश में आत्म-क्षति और रक्त विकार की सम्भावना सबसे अधिक। सिंह में प्रशासनिक शक्ति मिलती है। कन्या में रोगों से जूझने की क्षमता होती है परन्तु पाचनतंत्र कमज़ोर रहता है। तुला में कूटनीतिक लड़ाई का स्वभाव। वृश्चिक में स्वराशि मंगल होने से शत्रु संहार में कुशल परन्तु अति आक्रामकता का खतरा। धनु में धार्मिक और विदेशी मामलों में संघर्ष। मकर में मंगल उच्च का है और यह संयोग सबसे बलशाली: रणनीति में उत्कृष्ट और न्यायप्रिय। कुम्भ में अचानक दुर्घटनाएँ परन्तु तकनीकी क्षेत्र में सफलता। मीन में रहस्यमय शत्रु और जल सम्बन्धी दुर्घटनाएँ। *भावेश के अनुसार फल: यह सबसे नज़रअंदाज़ किया गया पक्ष राहु-मंगल की षष्ठ भाव में युति का फल केवल उस भाव से नहीं तय होता जहाँ वे बैठे हैं: बल्कि मंगल किस भाव का स्वामी है, यह उतना ही महत्वपूर्ण है।
*जब मंगल सप्तमेश हो (तुला और वृषभ लग्न के लिए) तो सप्तमेश का षष्ठ में आना अर्थात् जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदार के साथ सम्बन्ध में तनाव, विवाद और प्रतिस्पर्धा का भाव आ जाता है। राहु का प्रभाव इसे और जटिल बनाता है: यह जातक अपने जीवनसाथी या साझेदार को या तो आदर्श मानकर चलता है या फिर शत्रु की तरह। बीच का रास्ता इन्हें मिलता ही नहीं। विवाह में लगातार खटपट, संदेह और कानूनी लड़ाई की नौबत आ सकती है। राहु के कारण चरित्र पर उंगली या गुप्त सम्बन्धों का खतरा रहता है। व्यावसायिक पार्टनरशिप में अहं की लड़ाई और धोखाधड़ी की सम्भावना अधिक होती है। एकल स्वामित्व वाले व्यवसाय ही सफल रहते हैं। *परन्तु एक और पक्ष है जो कोई नहीं बताता: यदि षष्ठ भाव का Sub Lord सप्तम को signify न करे और केवल षष्ठ-ग्यारहवें को करे तो यही जातक अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर शत्रुओं को परास्त करने में असाधारण होता है। तब साझेदारी टूटती नहीं बल्कि संघर्ष में और मज़बूत होती है।
*जब मंगल तृतीयेश हो (कुम्भ और कन्या लग्न के लिए) तो सबसे पहला प्रभाव छोटे भाई-बहनों पर पड़ता है। उनसे सम्बन्धों में तनाव रहेगा या उनके जीवन में स्वास्थ्य और संघर्ष की स्थितियाँ आएंगी। दूसरा प्रभाव: यह जातक एक असाधारण लड़ाकू बनता है जो न केवल शत्रु को हराता है बल्कि उसे मानसिक रूप से तोड़ देता है। राहु का प्रभाव लेखन या content में विवादित विषयों की ओर धकेलता है जिससे यश और अपयश दोनों खूब मिलते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अचानक लोकप्रियता और विवाद का योग इसी युति में छुपा है। *जब मंगल दशमेश हो तो करियर में बार-बार प्रतिस्पर्धियों से लोहा लेना पड़ता है। सरकारी नौकरी या प्रशासनिक सेवा में सफलता मिलती है लेकिन सहकर्मियों और अधिकारियों से शत्रुता बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति विरोधियों को धूल चटाने के बाद ही पदोन्नति पाता है।
*Dispositor: वह चाबी जो पूरे ताले को खोलती है राहु-मंगल जिस राशि में बैठे हैं उस राशि का स्वामी इस पूरी युति का dispositor है और उसकी स्थिति यह तय करती है कि यह युति अपना फल कैसे और कब देगी। *मेष में युति हो तो dispositor स्वयं मंगल है: अग्नि दुगुनी हो जाती है और व्यक्ति खुद अपना सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है यदि क्रोध पर नियंत्रण खो दे। कर्क में युति हो तो dispositor चन्द्रमा है: चन्द्रमा अशुभ हुआ तो मानसिक अस्थिरता और रिश्तों में भावनात्मक उथल-पुथल। वृश्चिक में युति हो तो dispositor मंगल: जासूसी मामले, गुप्त शत्रु खतरनाक, सर्जरी या सेना में उच्च सफलता परन्तु निजी जीवन संघर्षपूर्ण। मकर में शनि dispositor हो और शनि बलवान हो तो शत्रुओं को धीरे-धीरे कुचलने की क्षमता, अनुशासित क्रोध और सेना या नौकरशाही में उच्च पद। कन्या में बुध dispositor: बुध उच्च का हो तो लेखन और तर्क से शत्रुओं का सफाया, बुध कमज़ोर हो तो गुप्त रोग और व्यापार में धोखा।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है: “राश्यधिपतेः बलं: युतिफलं निर्णयति: दुर्बले क्षीणफलम्”
*राशि के स्वामी का बल युति के फल को निर्धारित करता है: यदि dispositor कमज़ोर हो तो फल क्षीण होता है। *पद्धति से देखें तो केवल यह देखना पर्याप्त नहीं कि राहु-मंगल षष्ठ में हैं। यह देखना ज़रूरी है कि इस युति का Sub Lord किस भाव का संकेत कर रहा है। यदि Sub Lord षष्ठ, ग्यारहवें और तीसरे भाव को signify करे तो शत्रुनाश, लाभ और साहस का पूर्ण फल मिलेगा। यदि Sub Lord बारहवें, आठवें से सम्बद्ध हो तो यही युति स्वास्थ्य और गुप्त शत्रुओं की परेशानी देगी। यही कारण है कि एक ही नक्षत्र के दो जातकों में यह युति अलग-अलग फल देती है।
*व्यावहारिक उपाय :- प्रत्येक मंगलवार हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। पति-पत्नी साथ मिलकर करें तो दाम्पत्य पर इस युति का कठोर प्रभाव कम होता है। *मंगल के लिए “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का 27 बार जप और राहु के लिए “ॐ रां राहवे नमः” का सायंकाल जप करें। रक्तदान इस योग का सर्वोत्तम उपाय है। मंगल रक्त का कारक है: स्वैच्छिक रक्तदान से मंगल का अनिष्ट प्रवाह बाहर निकलता है। यह उपाय शास्त्रसम्मत भी है और वैज्ञानिक दृष्टि से भी तर्कसंगत।
*ज़रूरतमंद बुज़ुर्गों को गुड़ और मसूर की दाल का दान करें। घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में हनुमान जी की तस्वीर लगाएँ और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। लाल मूँगा कभी भी बिना ज्योतिषीय सलाह के न पहनें। अक्सर गोमेद या पन्ना इस युति में अधिक उपयुक्त होता है: परन्तु यह निर्णय पूरी कुंडली देखकर ही करें। *अन्त में: एक महत्वपूर्ण सत्य यह सब विश्लेषण सामान्य नियमों पर आधारित है। वास्तविक फल के लिए तीन प्रश्न पूछो: मंगल किस भाव का स्वामी है, dispositor कहाँ बैठा है और कितना बलवान है, और KP में Sub Lord क्या signify कर रहा है।
*किसी को यही युति करोड़पति बना सकती है, तो किसी को सड़क पर ला सकती है। इसीलिए संपूर्ण कुंडली (लग्न, अन्य ग्रहों की युति, दशा और गोचर) यह सब मिलकर एक पूरी तस्वीर बनाते हैं। केवल एक युति देखकर किसी के जीवन के बारे में कुछ भी कह देना ज्योतिष नहीं है। •••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤••• ⚜️ *सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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