
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
*“ॐ नम:शिवाय”*
🔮 25 मई 2026 कब मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें शुभ मुहूर्त और शुभ संयोग….
💁🏻♀️ हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए घोर तपस्या की थी और स्वर्ग से गंगा नदी को पृथ्वी पर लाने का प्रयत्न किया था। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। इसी के कारण इस दिन गंगा स्नान के साथ गंगा पूजन का विशेष महत्व है। इस साल दशमी तिथि दो दिन होने के कारण गंगा दशहरा की तिथि को लेकर असमंसज की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि गंगा दशहरा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और धार्मिक महत्व…._
📆 *_गंगा दशहरा 2026: तिथि और समय_*
*_पंचांग के अनुसार, इस साल गंगा दशहरा 25 मई, 2026 सोमवार को मनाया जाएगा।_*
*_दशमी तिथि प्रारम्भ : मई 25, 2026 की सुबह 04:30 बजे_*
*_दशमी तिथि समाप्त : मई 26, 2026 की सुबह 05:10 बजे_*
*_हस्त नक्षत्र प्रारंभ : मई 26, 2026 की सुबह 04:08 बजे_*
*_हस्त नक्षत्र समाप्त : मई 27, 2026 की सुबह 05:56 बजे*
*_व्यतिपात योग प्रारम्भ : मई 27, 2026 की सुबह 03:11 बजे_*
*_व्यतिपात योग समाप्त : मई 28, 2026 की सुबह 03:25 बजे_*
🙇🏻 *पूजा के लिए विशेष शुभ समय_*
*_इस दिन पूजा-पाठ के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है, जो सुबह 4:40 बजे से 5:23 बजे तक रहेगा। इसके बाद सूर्योदय सुबह 6:06 बजे होगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से 1:10 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
⚛️ *_शुभ संयोग और पूजा का उत्तम मुहूर्त_*
*_इस बार गंगा दशहरा पर ग्रहों और नक्षत्रों का बेहद दुर्लभ और मंगलकारी संयोग बन रहा है. आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस पावन दिन हस्त नक्षत्र, रवि योग और व्यतिपात योग का निर्माण हो रहा है, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने की क्षमता रखता है. अगर आप इस दिन गंगा घाट पर जा रहे हैं, तो सुबह 04:40 बजे से 05:23 बजे तक का ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सबसे उत्तम है. इसके अतिरिक्त, दोपहर 12:17 बजे से 01:10 बजे तक का अभिजित मुहूर्त भी महापूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ फलदायी माना गया है।
🌊 *_गंगा स्नान शुभ मुहूर्त 2026_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:04 बजे से प्रातः 04:45 बजे तक_*
🌇 *_प्रातः संध्या: प्रातः 04:24 से प्रातः 05:26 तक_*
❄️ *_रवि योग: पूरे दिन_*
👉🏼 *10 प्रकार के पापों का नाश और महत्व_*
*_धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा राजा भगीरथ की सदियों की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव की जटाओं के रास्ते पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. इस पर्व में ‘दशहरा’ शब्द का सीधा संबंध मनुष्य के दस प्रकार के पापों (कायिक, वाचिक और मानसिक) के हरण से है. इस पावन अवसर पर हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ता है।
*_इस दिन जल दान, अन्न दान और जरूरतमंदों को 10 प्रकार की वस्तुएं भेंट करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपनी आत्मा और तन-मन को शुद्ध करने का एक दिव्य अवसर है. 25 मई को शुभ मुहूर्त में मां गंगा का ध्यान करके किया गया छोटा सा दान भी आपके जीवन के कष्टों को दूर कर सकता है।
🙇🏻 *गंगा दशहरा की पूजा विधि_*
गंगा दशहरा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर शरीर और मन की शुद्धि के लिए स्नान किया जाता है, जिसमें जल में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है।_*
स्नान करते समय मां गंगा का ध्यान कर उनसे पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।_*
इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है तथा घर या मंदिर में गंगा माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।_*
पास में एक कलश में गंगाजल भरकर उस पर आम या अशोक के पत्ते रखे जाते हैं, जो पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है।_*
पूजन के दौरान अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं, और विशेष रूप से सफेद फूल चढ़ाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।_*
पूजा के समय श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जप किया जाता है, जैसे “ॐ नमः शिवाय ऐं ह्रीं श्रीं गंगायै नमः” या “पापनाशिनी गंगे पुण्यदा फलदायिनी…”।_*
इस दिन पितरों की शांति के लिए जल तर्पण करना भी महत्वपूर्ण माना गया है।_*
साथ ही, जरूरतमंद लोगों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, पंखा, शरबत और छाता आदि का दान करना पुण्य दायक होता है।_*
व्रत रखने वाले व्यक्ति दिनभर फलाहार करते हैं और शाम को गंगा माता की आरती के पश्चात ही भोजन ग्रहण करते हैं, जिससे व्रत पूर्ण माना जाता है।
📚 *गंगा दशहरा की कथा_*
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में राजा सगर नाम के एक महान राजा थे। उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया, लेकिन यज्ञ का घोड़ा अचानक गायब हो गया। राजा सगर के 60,000 पुक्ष उस घोड़े की खोज में निकल पड़े और खोजते-खोजते वे कपिल मुनि के आश्रम तक पहुंच गए। वहां उन्होंने घोड़े को देखा और बिना सोचे-समझे मुनि पर आरोप लगा दिया।
*_इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपने तप के प्रभाव से सगर के सभी पुत्रों को भस्म कर दिया। इसके बाद कई पीढ़ियों तक उनके उद्धार का प्रयास किया गया, अंततः राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं, लेकिन उनके वेग को संभालना कठिन था।
*_तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। जब गंगा पृथ्वी पर आईं, तब उनके पवित्र जल के स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है। यह कथा हमें बताती है कि सच्ची श्रद्धा और तपस्या से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, और गंगा जल का महत्व केवल नदी के रूप में ही नहीं, बल्कि मोक्ष और पवित्रता के प्रतीक के रूप में भी है।

