अनुबंध किसी गाड़ी का, भुगतान किसी और को…

सामाजिक न्याय विभाग में वाहन भुगतान पर सवाल-
हरीश मिश्र, स्वतंत्र पत्रकार
रायसेन । सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में वाहन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर विसंगति सामने आई है। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक उपसंचालक के भ्रमण के लिए एक वाहन अनुबंधित किया गया, जबकि भुगतान दूसरे वाहन के नाम पर किया गया। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा संधारित लॉग बुक में किसी भी स्थान पर वाहन का पंजीयन क्रमांक दर्ज नहीं है।
दस्तावेज बताते हैं कि विभाग ने वाहन क्रमांक MP-04-TB-5066 को अनुबंधित किया । वहीं भुगतान संबंधी अभिलेखों में MP-04-CN-8039 वाहन का भुगतान किया गया है। दोनों दस्तावेजों में अलग-अलग वाहन नंबर दर्ज होने से भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
*लॉग बुक में नहीं दर्ज वाहन नंबर*
विभाग की लॉग बुक के प्रथम पृष्ठ पर प्रमाणित किया गया है कि उसमें पृष्ठ क्रमांक 1 से 57 तक प्रविष्टियां दर्ज हैं। लेकिन किसी भी पृष्ठ पर उपयोग किए गए वाहन का पंजीयन क्रमांक अंकित नहीं है। लॉग बुक में केवल भ्रमण स्थल और किलोमीटर संबंधी विवरण दर्ज किए गए हैं। जो विधि हैं।
*कोषालय की आपत्ति के बावजूद भुगतान*
कलेक्टर के निर्देश पर 21 अप्रैल 2025 को कोषालय अधिकारी ने नोटशीट पर टीप अंकित की थी कि संचालनालय के 28 मार्च 2025 के पत्र के अनुसार उपसंचालक अधिकतम 6.50 लाख रुपए मूल्य तक का वाहन अनुबंधित कर सकते हैं।
इसके बावजूद जिस स्कॉर्पियो वाहन के भुगतान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, उसकी बाजार कीमत निर्धारित सीमा से दुगनी है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि भुगतान से पहले वाहन की पात्रता का परीक्षण किया गया था या नहीं।
*उपसंचालक ने क्या कहा*
जब इस संबंध में उपसंचालक से पक्ष पूछा गया तो उन्होंने कहा,
“सरकार हमें 32 हजार रुपए प्रतिमाह वाहन खर्च करने देती है। हम वाहन पर करें या हवाई जहाज पर।”
हालांकि उन्होंने अनुबंध और भुगतान अभिलेखों में दर्ज अलग-अलग वाहन नंबरों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
*उठ रहे हैं ये सवाल*
विभाग ने वास्तव में किस वाहन का उपयोग किया ? भुगतान किस वाहन के लिए स्वीकृत किया गया ? बिना वाहन नंबर वाली लॉग बुक के आधार पर भुगतान कैसे किया गया ? भुगतान से पहले दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? अनुबंध और भुगतान रिकॉर्ड में अलग-अलग वाहन नंबर क्यों दर्ज हैं? निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य वाले वाहन के भुगतान को स्वीकृति कैसे मिली?
सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और दस्तावेजीय शुचिता अनिवार्य मानी जाती है। ऐसे में अनुबंध, भुगतान अभिलेख और लॉग बुक में दर्ज अलग-अलग जानकारियां विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब निगाहें इस मामले में विभागीय स्पष्टीकरण और संभावित जांच पर टिकी हैं।




