
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 15 जून 2026_
*महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। ☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 08:23 AM तक उपरांत प्रतिपदा तिथि 04:31 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र म्रृगशीर्षा 07:08 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – म्रृगशीर्षा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। मृगशिरा नक्षत्र के अधिष्ठाता (प्रमुख) देवता चंद्रमा (सोम) हैं।
⚜️ योग – शूल योग 08:55 AM तक, उसके बाद गण्ड योग 04:38 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
⚡ प्रथम करण : नाग 08:24 AM तक, बाद किस्तुघन 06:26 PM तक
✨ द्वितीय करण: बव 04:31 AM तक, बाद बालव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:24:04
🌅 सूर्यास्तः – सायं 19:19:54
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:54 ए एम से 12:50 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:41 पी एम से 03:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:19 पी एम से 07:39 पी एम
🌌सायाह्न सन्ध्या : सायं काल 07:20 पी एम से 08:21 पी एम
💧 अमृत काल : सुबह 11:28 ए एम से 12:52 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:02 ए एम, जून 16 से 12:42 ए एम, जून 16
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः काल 05:23 ए एम से 07:08 पी एम
🌊 अमृत सिद्धि योग : प्रातः काल 05:23 ए एम से 07:08 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 30वाँ दिन, ज्येष्ठ अधिक मास समाप्त/ मिथुन संक्रान्ति, ज्येष्ठ अधिक अमावस्या, इष्टि/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ आडल योग/ विश्व पितृ दिवस/ भारत विभाजन दिवस/ ‘राधा स्वामी सत्संग’ के संस्थापक शिव दयाल साहब स्मृति दिवस, (पद्म भूषण से सम्मानित) देवी प्रसाद राय चौधरी जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार सज्जाद हुसैन जन्म दिवस, संगीतज्ञ उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डाग जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी तारकनाथ दास जयन्ती, भारतीय उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल जन्म दिवस, भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे जन्म दिवस, विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस, कोस्टा रिका राष्ट्रीय मुक्ति दिवस, ब्रिटेन ( बीयर दिवस, राष्ट्रीय कीट संहार दिवस ), अमेरिका में वैश्विक पवन दिवस, राष्ट्रीय प्रून दिवस, प्रकृति फोटोग्राफी दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
*वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर चमका रहा है और कन्फ्यूज है कि दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण में घर के मालिक का बेडरूम बनाएं या सीढ़ी, तो कान खोल के सुन ले—घर के मालिक का रहने का स्थान यानी मास्टर बेडरूम बनाना सबसे ज्यादा जरूरी है, एकदम नंबर वन प्रायोरिटी बॉस! वास्तु के गेम में दक्षिण-पश्चिम दिशा को ‘पृथ्वी तत्व’ और स्थिरता का इलाका माना जाता है, जिसका मालिक राहु ग्रह और पितर देव होते हैं। अब इस कोने का सीधा कनेक्शन घर के मुखिया की रीढ़ की हड्डी, उसकी इज्जत, फैसले लेने की पावर और तिजोरी के बैलेंस से है। अगर तूने वहां मास्टर बेडरूम बना दिया, तो घर के कैप्टन की लाइफ में स्टेबिलिटी का ऐसा तगड़ा बूस्ट आएगा कि वो पूरे खानदान को उंगलियों पे नचाएगा, कड़क डिसीजन लेगा और घर में पैसा टिकेगा। *अब सीन ऐसा है कि तू सोचेगा, “अरे भाई, सीढ़ियों का क्या चक्कर है फिर?” तो सुन, सीढ़ियां भारी होती हैं और वास्तु का रूल है कि दक्षिण-पश्चिम को हमेशा सबसे भारी रखना चाहिए। इसलिए सीढ़ी बनाना भी वहां एकदम फुल-टू सही है, लेकिन वो सेकंड नंबर पे आता है। अगर तूने बेडरूम को छोड़ के सिर्फ सीढ़ी ठोक दी और मालिक को किसी और कोने (जैसे उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पूर्व) में सुला दिया, तो समझो गेम ओवर! उत्तर-पूर्व में सोने से मालिक का दिमाग सुन्न हो जाएगा और दक्षिण-पूर्व (South-East) में सोया तो भाई बिना बात के बीवी से लफड़े और गरम दिमाग के चक्कर में घर का कबाड़ा कर बैठेगा। मास्टर बेडरूम वहां होने से मुखिया का रुतबा किंग जैसा रहता है, नहीं तो वो अपने ही घर में किराएदार जैसा फील करने लगेगा और उसकी कोई इज्जत नहीं बचेगी।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
घर पर क्या कर सकते हैं?
✅ *दिन में 2 बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करें।
✅ *तंबाकू, गुटखा और पान छोड़ें या कम करें। ✅ *खाने के बाद कुल्ला करें।
✅ *इलेक्ट्रिक टूथब्रश का उपयोग लाभदायक हो सकता है। 👉🏼 क्या न करें?
❌ *नींबू और बेकिंग सोडा का बार-बार उपयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह जरूर लें
❌ *कोयला (Charcoal) या बहुत घर्षण वाले घरेलू नुस्खे रोजमर्रा के रूप में ना अपनाये। इनसे दांतों की ऊपरी परत (Enamel) घिस सकती है और दांत अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। *यदि दाग बहुत पुराने हैं 10 – 12 साल से अगर गुटखा या पान खा रहे है तो दाग इतने गहरे हो जाते हैं कि केवल घरेलू उपायों से नहीं जाते ही नहीं। ऐसे मामलों में स्केलिंग + पॉलिशिंग + व्हाइटनिंग का संयोजन सबसे अच्छा परिणाम देता है।
🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
नीम के पत्ते आयुर्वेद में नीम को “सर्व रोग निवारिणी” कहा गया है। नीम को विशेष रूप से रक्त शोधन, त्वचा स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उपयोगी माना गया है।
👉🏼 कैसे लें?
ताम्र जल पीने के लगभग 10 मिनट बाद* 4–5 ताजे नीम के पत्ते अच्छी तरह चबाकर खाएं हालांकि इसका स्वाद कड़वा होता है, लेकिन आयुर्वेद में कड़वे रस को शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। 👉🏼 सावधानी:
•गर्भवती महिलाओं को नीम का सेवन नहीं करना चाहिए।*
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।* छोटे बच्चों को नीम देने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
मिथुन संक्रांति 15 जून 2026 को है। जब भी सूर्य देव राशि परिवर्तन करते हैं तो उस दिन को संक्रांति के नाम से जाना जाता है। 15 जून को सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इस दिन सोमवती अमावस्या भी है और साथ ही मलमाल की समाप्ति भी इस दिन होगी। ज्योतिष दृष्टि से 15 जून के दिन को बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन पुण्य काल के दिन स्नान-दान और कुछ उपायों को करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को हो सकती है। ऐसे में आइए जान लेते हैं आचार्य श्री गोपी राम से कि मिथुन संक्रांति के दिन पुण्य काल का समय कब रहेगा और इस दिन क्या शुभ कार्य आपको करने चाहिए।
🪐 मिथुन संक्रांति के दिन पुण्य काल
मिथुन संक्रांति- 15 जून 2026, सोमवार
पुण्य काल शुरू- दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से
पुण्य काल समाप्त- शाम 7 बजकर 19 मिनट पर
पुण्य काल का कुल समय- 6 घंटे 20 मिनट
*आपको बता दें कि 15 जून को सूर्य 12 बजकर 59 मिनट पर ही मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे और पुण्य काल की शुरुआत होगी। वहीं सूर्यास्त के साथ ही पुण्य काल समाप्त हो जाएगा।
✡️ *पुण्य काल में ये कार्य करना शुभ* पुण्य काल के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने से देवी-देवताओं और पितरों की कृपा आपको प्राप्त होती है। पवित्र नदियों में स्नान के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने से पितरों का आशीर्वाद आप पा सकते हैं।*
पवित्र नदियों में स्नान के दौरान सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है।* इस दिन गुड़, तांबे के पात्र, गेहूं, वस्त्र, अन्न आदि का दान करने से भी महापुण्य आपको प्राप्त होता है।*
सूर्य संक्रांति की रात में किसी मंदिर या नदी में दीपदान करने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।* सूर्य संक्रांति के पुण्य काल के दौरान सूर्य ग्रह के मंत्र ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ का जप करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इन उपायों के साथ ही धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन और साथ ही योग-ध्यान करना भी इस दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन ध्यान करने से आपकी आध्यात्मिक उन्नति होती है और मानसिक रूप से आपको सुखद अनुभव प्राप्त होते हैं। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ ⚜️ *अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
*_ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।



