जन्म के 24 घंटे भी नहीं हुए… और छीन ली गई जिंदगी!

तीसरी बेटी थी… क्या यही बनी मासूम की मौत की वजह?
अशोकनगर जिला अस्पताल के SNCU में नवजात की मौत ने मचाया हड़कंप | पोस्टमार्टम में गला दबाने की पुष्टि, मां-दादी से पूछताछ
अशोकनगर। जिस मासूम ने अभी दुनिया में अपनी पहली सांसें लेना शुरू ही किया था, उसे जिंदगी के सिर्फ एक दिन बाद मौत के हवाले कर दिया गया। अशोकनगर जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में एक नवजात बच्ची की मौत ने न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बेटी को लेकर समाज की सोच को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
बच्ची की मौत पहले सामान्य बताई जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों की जांच में उसके गले पर दबाव के निशान मिलने के बाद मामला गंभीर हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी मौत को सामान्य नहीं माना और गला दबाए जाने की पुष्टि हुई।
जिस जगह जिंदगी बचाई जाती है, वहीं मासूम की सांसें छीन ली गईं
नवजात को जन्म के बाद उपचार और निगरानी के लिए SNCU में भर्ती कराया गया था। घटना के समय वार्ड में बच्ची के पास उसकी मां और दादी के मौजूद होने की बात सामने आई है। SNCU के भीतर सीसीटीवी नहीं होने के कारण जांच और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।
पुलिस अस्पताल के आसपास और प्रवेश-निकास मार्गों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। मां और दादी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। अभी जांच जारी है और अंतिम सच पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल… बेटी होने की सजा क्यों?
परिवार की तीसरी बेटी थी यह मासूम।
यही तथ्य अब पूरे मामले को एक बेहद गंभीर सामाजिक सवाल में बदल देता है—
क्या आज भी किसी बेटी का जन्म उसके लिए खतरा बन सकता है?
अगर जांच में यह साबित होता है कि बेटी होने के कारण उसकी जिंदगी छीनी गई, तो यह सिर्फ हत्या नहीं होगी, बल्कि उस सोच की जीत होगी जो बेटे को वारिस और बेटी को बोझ समझती है।
जिस बच्ची ने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा, जिसने दुनिया को देखा तक नहीं, जिसने किसी से कोई अधिकार नहीं मांगा—
उसका कसूर आखिर क्या था?
मासूम की खामोश मौत समाज से पूछ रही है सवाल
सरकार बेटी बचाने की मुहिम चला रही है। समाज बेटियों को सम्मान देने की बातें करता है। लेकिन जब एक नवजात बच्ची अस्पताल के सुरक्षित माने जाने वाले वार्ड में दम तोड़ देती है, तो सवाल सिर्फ पुलिस से नहीं बल्कि हम सबकी मानसिकता से भी है।
बेटी को जन्म लेने से पहले मारना अपराध है,
और जन्म लेने के बाद उसे जीने न देना उससे भी बड़ा सामाजिक कलंक।
अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो, दोषी सामने आए और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो।
क्योंकि—
वह सिर्फ तीसरी बेटी नहीं थी…
वह किसी की संतान थी, किसी की बहन थी और सबसे बढ़कर—एक इंसान थी।**
उसकी जिंदगी की कीमत किसी बेटे से कम नहीं थी।



