ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 16 अप्रैल 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 16 अप्रैल 2023

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🚩 आप सभी को आचार्य श्री नीरज कुमार पुत्र श्री आचार्य गोपी राम की और से बरूथनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – वैशाख मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – एकादशी 18.14 तक तत्पश्चात द्वादशी
✏️ तिथि के स्वामी :- एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है।
💫 नक्षत्र : शतभिषा – 04:07 ए एम, अप्रैल 17 तक
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुण देव जी और शतभिषा के स्वामी राहु जी है।
🔔 योग : शुक्ल – 12:13 ए एम, अप्रैल 17 तक
प्रथम करण : – बव 7.29 AM तक
द्वितीय करण : – बालव 18.14 PM तक तत्पश्चात कौलव
🔥 गुलिक काल : – रविवार का अशुभ गुलिक काल अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:55
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:47
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:26 ए एम से 05:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:48 ए एम से 05:55 ए एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:46 पी एम से 07:08 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:47 पी एम से 07:54 पी एम
💧 अमृत काल : 09:26 पी एम से 10:55 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:43 ए एम, अप्रैल 17
🌸 त्रिपुष्कर योग : 04:07 ए एम, अप्रैल 17 से 05:54 ए एम, अप्रैल 17
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में स्वर्ण चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वरुथिनी एकादशी व्रत (सर्वे.), राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस, रेल सप्ताह, फ़ायर सर्विस सप्ताह, नंदलाल बोस पुण्य तिथि, भवानी सिंह, महावीर चक्र विजेता स्मृति दिवस, भारतीय रेल परिवहन दिवस (1853)
✍🏼 विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।रविवार को अदरक और मसूर की दाल का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए
🌷 Vastu tips 🌹
वास्तु के अनुसार, अगर आपको कोई दिमागी परेशानी तो उत्तर पश्चिम, पेट की तो दक्षिण पश्चिम, पैरों में तो पूर्व दिशा, कान में तो उत्तर दिशा और अगर हाथों में दिक्कत है तो ईशान कोण को ठीक करें। वहीं अगर कमर में परेशानी है तो दक्षिण पूर्व, आंखें ठीक रखनीहै तो दक्षिण और अगर मुख यानि चेहरे को निरोगी और तरोताजा रखना चाहते हैं तो पश्चिम दिशा के वास्तु को सही कीजिए।
वास्तु शास्त्र का महत्व वास्तु शास्त्र हमारे जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इससे हमारा जीवन काफी प्रभावित होता है। वास्तु दोष से हमारी कामयाबी से लेकर घर की सुख समृद्धि तक पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में घर और वहां मौजूद चीजों को सही दिशा में रखना बेहद ही जरूरी है। वास्तु शास्त्र में कई तरह की सावधानी और उपाय को बताया गया है, जिसे अपनाकर व्यक्ति संपन्न, प्रसन्न और निरोगी रह सकता है। ऐसे में वास्तु नियम का पालन करना काफी जरूरी हो जाता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गन्ने का रस – गन्ने का रस गर्मियों में सबसे बेहतरीन ड्रिंक्स की लिस्ट में शुमार है। यह एक नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक है भरी गर्मी में अगर एक गिलास गन्ने का रस मिल जाए तो पूरे शरीर में ठंडक पहुंच जाती है। सतह ही बॉडी को हाइड्रेट रखता है। हीटवेव के दौरान लू लगने से बचाने में भी गन्ने का रस मददगार होता है।
नारियल पानी – नारियल पानी को ऊर्जा का भंडार कहा जाता है। यह हर सीजन में अपना कमाल दिखाता है। नारियल पानी पीने से पेट की गर्मी ही शांत नहीं होती बल्कि डाइजेशन को बेहतर करने में भी काफी मददगार होता है। एक तरह से आंतों की सफाई में कारगर होता है नारियल पानी।
🍹 आरोग्य संजीवनी 🍶
नीलगिरी का तेल आपको रिलैक्स महसूस करने में मदद करता है। ये आपके मांसपेशियों को शांत करता है और आपको बेहतर फील करने में मदद करता है। जब आप इसे तेल को पैरों में लगाते हैं तो ये आपके पैरों के ब्लड प्रेशर को कम करता है और बेचैनी में कमी लाता है। इस तरह ये आपके मांसपेशियों के लिए बहुत फायदेमंद है।
दर्द कम करने वाला है नीलगिरी का तेल नीलगिरी का तेल दर्द को कम करने में मददगार है।ये असल में एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है जो कि दर्द कम करने में मददगार है। साथ ही ये मांसपेशियों के प्रेशर को कम करता है और दर्द को कम करने में मददगार है। इसके अलावा भी इस तेल के आपके लिए कई फायदे हैं। जैसे कि ये इंफेक्शन से बचाने में मददगार है। तो, इन तमाम कारणों से आप नीलगिरा का तेल लगा सकते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने ग्रंथ में जीवन से जुड़े कई अहम प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। जिसके माध्यम से आज भी लोग अपने कार्यों में सफलता हासिल करते हैं। जानें चाणक्य नीति-
आचार्य श्री गोपी राम ने हमें मनुष्य के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया है। कहा जाता है कि इन नीतियों को अपनाने से जातक को जीवन में सफलता जरूर हासिल होती है। जातक की मुश्किल समय में सही निर्णय लेने में भी मदद करती हैं। एक श्लोक में आचार्य ने बताया है कि व्यक्ति को कौन-सी चीजें कड़ी मेहनत के बाद ही हासिल होती हैं। आप भी जान लें-
भोज्यं भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर वरांगना।
विभवो दानशक्तिश्च नाऽल्पस्य तपसः फलम् ॥_
आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का प्राप्त होना, उन्हें खाकर पचाने की शक्ति होना, सुंदर स्त्री का मिलना, उसके उपभोग के लिए कामशक्ति होना, धन के साथ-साथ दान देने की इच्छा होना ये बातें मनुष्य को किसी महान तप के कारण प्राप्त होती हैं।
भोजन में अच्छी वस्तुओं की कामना सभी करते हैं, लेकिन उनका प्राप्त होना और उन्हें पचाने की शक्ति होना भी जरूरी है। पहर व्यक्ति चाहता है कि उसकी पत्नी सुंदर हो, लेकिन उसके उपभोग के लिए व्यक्ति में कामशक्ति भी होनी चाहिए। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास धन हो, लेकिन धन प्राप्ति के बाद कितने ऐसे लोग हैं, जो उसका सदुपयोग कर पाते हैं। धन का सदुपयोग दान में ही है। अच्छी जीवन संगिनी, शारीरिक शक्ति, पौरुष एवं निरोगता, धन और वक्त जरूरत पर किसी के काम आने की प्रवृत्ति आदि पूर्वजन्मों में किन्हीं शुभ कार्यों द्वारा ही प्राप्त होते हैं। तपस: फलम् का अर्थ है कठोर श्रम और आत्मसंयम।
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⚜️ वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी बरूथनी एकादशी कहलाती है ।यह एकादशी सब पापों का नाश करने वाली, सुख सौभाग्य तथा अंत में मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है।
इस एकादशी का ब्रत करने से 10000 वर्ष तक का तप करने के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है ।
एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी / श्री कृष्ण जी की आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का ब्रत रखने वाला जातक भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय होता है ।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का आशिक से अधिक जाप करना चाहिए ।
एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।

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