Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 24 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 24 सितम्बर 2025
24 सितम्बर 2025 दिन बुधवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया तिथि है। आज माता चित्रघंटा देवी की पूजन एवं दर्शन का दिन है। आज माता चित्रघंटा देवी के दर्शन और पूजन का बहुत ही महत्व बताया गया है। आज माता की प्रसन्नता हेतु तृतीया तिथि में दर्शापन एवं सिन्दूर चढ़ाना चाहिए। साथ ही माता को आज आंवला चढ़ाने से भी माता की प्रसन्नता प्राप्त होती है। आप सभी सनातनियों को ” माता चित्रघंटा देवी की पूजन एवं दर्शन” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – बुधवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष तृतीया पूर्ण रात्रि तक
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 04:16 PM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, और इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग – इन्द्र योग 09:02 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 05:56 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:00:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:23 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:14 पी एम से 03:02 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:15 पी एम से 06:39 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:15 पी एम से 07:27 पी एम
💧 अमृत काल : 09:11 ए एम से 10:57 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 25
❄️ रवि योग : 04:16 पी एम से 06:11 ए एम, सितम्बर 25
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ मुस्लिम रवि – उल आखिर मासारंभ/ राष्ट्रीय बेटी दिवस, विश्व समुद्री दिवस, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का स्थापना दिवस, विश्व बॉलीवुड दिवस, राष्ट्रीय चेरी जयंती दिवस, राष्ट्रीय विराम चिह्न दिवस, सिखों के चौथे गुरु, गुरु रामदास जयन्ती, भारतीय क्रांतिकारी, मैडम भीकाजी रुस्तम काम जयन्ती, भारतीय अभिनेता राजेश खट्टर जन्म दिवस, FH जागरूकता दिवस, वरिष्ठ टेलीविज़न पत्रकार पंकज पचौरी जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
रुमाल किसी का इस्तेमाल किया हुआ रुमाल भी आपको कभी यूज नहीं करना चाहिए। ऐसा करना वास्तु के अनुसार तो गलत है ही साथ ही इसके कारण स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ सकते हैं। वास्तु के अनुसार दूसरे का रुमाल इस्तेमाल करने से आपके रिश्तों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खासकर आपके वैवाहिक और प्रेम जीवन में इसके कारण उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, यहां तक कि रिश्ता खराब भी हो सकता है।
*घड़ी कभी भी किसी की इस्तेमाल की हुई घड़ी को आपको नहीं पहनना चाहिए। इसके कारण नकारात्मक ऊर्जा का शिकार आप हो सकते हैं। साथ ही आपके करियर क्षेत्र में आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं आपके बने बनाए काम भी इसके कारण अटक सकते हैं। *कलम गलती से भी किसी की कलम या पेन आपको इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से माता सरस्वती तो नाराज होती ही हैं साथ ही वास्तु में भी इसे अच्छा नहीं माना जाता। खासकर जरूरी दस्तावेजों को साइन करते समय, परीक्षा देते समय और किसी कलात्मक रचना को लिखते समय तो गलती से भी दूसरे की कलम का इस्तेमाल न करें। ऐसा करने पर आपका काम बनने की जगह बिगड़ सकता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सिरदर्द और माइग्रेन में राहत: इमली मैग्नीशियम (Magnesium) का एक बहुत अच्छा स्रोत है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में मैग्नीशियम की कमी को माइग्रेन के मुख्य कारणों में से एक माना गया है। साथ ही, इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी) गुण दर्द पैदा करने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसका खट्टा-मीठा स्वाद इंद्रियों (senses) को एक शॉक देकर भी ध्यान भटकाने का काम कर सकता है।_*
ब्लड प्रेशर नियंत्रण: यह दावा काफी मज़बूत है! इमली में पोटैशियम (Potassium) भरपूर मात्रा में होता है, जो एक प्राकृतिक वैसोडिलेटर (vasodilator) है, यानी यह रक्त वाहिकाओं को आराम देकर ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स (Flavonoids) जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स दिल के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं।
☕ आरोग्य संजीवनी 🫖
अलसी के गुण- अलसी में विटामिन बी एवं कैल्शियम, मैग्नीशियम, कॉपर, लोहा, जिंक, पोटेशियम आदि खनिज लवण होते हैं।अलसी में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 नाम के अम्ल होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अलसी के बीज वात, पित्त और कफ को संतुलित करते हैं।
अलसी की चाय के फायदे- सर्दी या बारिश के मौसम में जुकाम और खांसी होना सामान्य बात है। मौसम ठंडा होने के कारण नमी होती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी उतना ही होता है। ऐसे में अगर कोई खांसी से परेशान हैं, तो अलसी की चाय पीना फायदेमंद होगा। इस चाय को पीने से सर्दी-खांसी, जुकाम या दमा की परेशानी झेल रहे व्यक्तियों को बहुत लाभ होता है। जिसे भी सर्दी में इस तरह की तकलीफें हो, वह बीमार व्यक्ति इस चाय का दिनभर में 2-3 बार सेवन कर सकते है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
संत गदाधर भट्ट के जीवन की कथा है। एक दिन न मालूम कैसे, पूरा दिन कहाँ कहाँ से भक्तजन एक के बाद एक आते चले गए और गदाधर जी के लाख मना करने के बाद भी भक्तों ने वहाँ अन्न वस्त्र धन का ढेर लगा दिया। गदाधर जी विचार करने लगे कि यह तो बड़ी विचित्र घटना घट रही है, पता नहीं आज भगवान क्या लीला करना चाहते हैं? ऐसा ही विचार करते करते गदाधर जी सब सामान जहाँ का तहाँ छोड़ कर माला पकड़ कर अपनी गुदड़ी में लेट गए।
उसी रात गदाधर जी की कुटिया में एक चोर आ गया। दुनिया वाले समझते हैं कि संत सोया करते हैं। वे नहीं जानते कि वे तो आँख बंद किए भीतर ही भीतर परलोक बनाया करते हैं। गदाधर जी को आभास हुआ कि कोई है। आँखें खोली तो देखा कोई मनुष्य जल्दी जल्दी सामान समेट रहा है। गदाधर जी ने विचार किया कि आज तक न तो कभी इतना सामान ही आया, न ही कोई सामान लेने वाला। हो न हो इसी के लिए भगवान ने यह सब व्यवस्था की है। वे उस चोर के कार्य में कोई व्यवधान न पड़ जाए, यही विचार करते बिना हिले डुले वैसे के वैसे ही पड़े रहे।
चोर ने सब सामान की गठरी बनाई और लगा उसे उठाने। अब सामान था अधिक और चोर था दुबला पतला। उससे गठरी उठाए न उठी। तब तो गदाधर जी को बड़ा संकोच हुआ। आखिर वे उठ बैठे।
चोर ने देखा तो वह घबरा गया। गदाधर जी ने कहा- आप भय न मानें। लाएँ मैं यह गठरी उठवा दूं। और उठवा क्या दूं, ऐसा करें आधे सामान की एक अन्य गठरी बना लें, एक आप उठा लें और आपके पीछे पीछे दूसरी मैं लिए चलूंगा।
चोर को बड़ा आश्चर्य हुआ। कहने लगा- महाराज जी! मुझसे बड़ी भूल हो गई। मैं आपको और आपके घर को पहचानता नहीं था।
गदाधर जी कहने लगे- आप ऐसा क्यों कहते हैं? यह मेरा घर नहीं है। यह धन भी मेरा नहीं है। यह आपके लिए ही यहाँ रखा गया है। और वैसे भी यही आपकी जीविका है। यहाँ सब तरह से मौज है। आप संकोच न करें, रात बीती जा रही है, जल्दी चलें ताकि सुबह होने से पहले ही मैं वापिस लौट आऊँ।
मेरा मानना है कि दुनिया वाले तो ऐसे संतों को भी चोर ठग और पाखंडी ही समझते हैं। वे नहीं जानते कि ऐसे संतों के चरणों की तो ठोकर भी मिल जाए तो जीवन सफल हो जाए, फिर उनके चरणों का आश्रय मिल जाए तब तो कहना ही क्या?
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।


