ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 01 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 01 जनवरी 2024

01 जनवरी 2024 दिन सोमवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष कि पंचमी तिथि है। परंतु आज से ईसाई लोगों के नववर्ष का आरम्भ माना जाता है। आज 01 जनवरी या पहले जनवरी से 2024 वर्ष का आरम्भ होता है। सर्वत्र नववर्ष का उत्सव मनाया जाता है। बहुत से अन्य धर्मों के लोग भी अपनी स्वयं की संस्कृति अथवा स्वयं के आस्तित्व को भूलकर आंग्ल भाषी लोगों के नववर्ष के उत्सवों में सम्मिलित हो जाते हैं। अनेकों प्रकार के नववर्ष के शुभ आगमन के संदेशों को भेजते हैं। आप सभी भारतवासियों को “पहली जनवरी 2024 आंग्ल नववर्ष” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – पौष मास कृष्ण पक्ष वार सोमवार पंचमी तिथि 02:28 PM तक उपरांत षष्ठी
✏️ तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मघा 08:36 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र के शासक देवता पितर या पूर्वज हैं। तथा नक्षत्र का स्वामी केतु है।
🔔 योग – आयुष्मान योग 04:35 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
प्रथम करण : तैतिल – 02:28 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 03:49 ए एम, जनवरी 02 तक
🔥 गुलिक काल : सोमवार का शुभ गुलिक काल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक गुलिक काल रहेगा
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:58 बजे से 09:31 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:52 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:04 पी एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:32 पी एम से 06:00 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:35 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 04:28 ए एम, जनवरी 02 से 06:17 ए एम, जनवरी 02
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:52 ए एम, जनवरी 02
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को तिल की मिठाई भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अंग्रेजी नव वर्ष दिवस, खिस्ताब्द 2024 प्रारंभ, धूम्रपान विरोधी दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस स्थापना दिवस, विश्व शांति दिवस, राष्ट्रीय दिवस / स्वतंत्रता दिवस: ब्रुनेई, हैती, सूडान, सेना चिकित्सा स्थापना दिवस, राजनीतिज्ञ लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी जन्म दिवस, (भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी) महादेव देसाई जयन्ती, अभिनेत्री सोलानी बेंद्रे जन्म दिवस, प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक हेमचंद दासगुप्त पुण्य तिथि, वैश्विक परिवार दिवस, डीआरडीओ दिवस, चेक गणराज्य बहाली दिवस, हैती स्वतंत्रता दिवस, चेकोस्लोवाकिया से बहाली दिवस, सूडान स्वतंत्रता दिवस, आर्मी मेडिकल कोर स्थापना दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस स्थापना दिवस, मूल समाप्त
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार अगर घर के किसी भी हिस्से में नल टपकता है तो ये अच्छा नहीं माना जाता है। घर का टपकता नल फिजूलखर्ची का सूचक है और खासकर कि अगर घर की रसोई का नल टपकता है तो ये और भी खराब है। क्योंकि रसोई में अग्नि का निवास होता है और जहां आग और पानी एक साथ हो वहां परेशानियां शुरू हो जाती है।
इससे घर का कोई सदस्य बीमार हो सकता है, व्यापार में नुकसान या किसी टूट-फूट में पैसा जा सकता है। साथ ही पानी के फिजूल बहने से वरूण देव का दोष भी लगता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। अतः इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए, घर में टपकते नल को जल्द से जल्द ठीक करा लें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आयुर्वेद में कई औषधियां हैं जो शरीर की थकान को कम करने और ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। यह आयुर्वेदिक दवाएं शरीर के प्राकृतिक उपचार और उर्जा स्तर को सुधारने के लिए जानी जाती हैं।
कुछ ऐसी आयुर्वेदिक दवाएं हैं जिनमें विशेषता से युक्त पदार्थ होते हैं और जिनका नियमित सेवन करने से शरीर की थकान कम होती है। इनमें से कुछ त्रिफला, अश्वगंधा, ब्रह्मी, शतावरी, गुडूची, आदि शामिल हो सकती हैं।
इन दवाओं के सेवन से शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है, शारीरिक और मानसिक थकान कम होती है, अच्छी नींद आती है, मनश्चिंतन और तनाव कम होता है, और शरीर के प्राकृतिक रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
हालांकि, आयुर्वेदिक चिकित्सा में सभी व्यक्तियों की अवस्था, प्रकृति और लक्षणों का विवेचन किया जाता है, और योग्य और सही उपाय निर्धारित किये जाते हैं। इसलिए, सर्वोच्च रूप से सलाह है कि आप एक प्राकृतिक चिकित्सक से संपर्क करें और अपनी स्थिति के अनुसार उचित और योग्य आयुर्वेदिक दवा का सेवन करें। यह सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि आप इन दवाओं का सेवन उचित रूप से करें और सावधानी बरतें।
🍾 आरोग्य संजीवनी 🍶
अगर आपको बार-बार डायरिया की समस्या होती है, तो इसे लेना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं।
इसका सेवन करने से पाचन क्रिया ठीक ढंग से काम करती है जिससे पेट संबंधी किसी भी प्रकार का इंफेक्‍शन नहीं होता हैं।
इन दोनों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है, जो फंगल इंफेक्शन को दूर करने का काम करते है।
शहद में डूबा लहसुन लेने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। जिससे कई बीमारीयों से छुटकारा पाया जा सकता है।
यह एक प्राकृतिक डिटॉक्स है। इसको खाने से शरीर की अंदर से सफाई हो जाती है। जिसके कारण स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
लहसुन और शहद में मौजूद फास्फोरस से दांत मजबूत रहते है। यह दांतों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने का काम करता है।इनमें फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस आदि तत्व होते हैं जो दांत, बाल और हड्डियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
लहसुन की कलियों का छिलका उतारकर शहद की छोटी शीशी में इतनी डालें कि वह शहद में पूरी तरह डूब जाए और दो दिन ऐसे ही पडा रहने दें। लहसुन की 2–3 कलियों को सुबह खाली पेट सेवन करें और 45 मिनट बाद ही कुछ खाए।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
आत्मा शरीर कैसे चुनती है? जैसे पुराने कपड़ों को त्यागकर मनुष्य दुसरे नये कपड़े पहनता है, ठीक वैसे ही एक शरीर के मृत्यु के बाद आत्मा दुसरा नया शरीर धारण करती है। लेकिन इसमें सभी आत्माएं स्वतंत्र नहीं होती।
आत्मा का पुराने शरीर को त्यागकर एक नये दुसरे शरीर को चुनना सर्वथा उसके कर्मों के अधीन होता है। जैसे कर्म वैसी गति के अनुसार जैसे उसके कर्म होंगे, प्रकृति की तरफ़ से अगले जन्म में उसे वैसी ड्रेस यानी वैसा ही शरीर मिलेगा।
किसी भी व्यक्ति का पुनजन्म, उसका नये शरीर में प्रवेश करना उसके जीवन भर के कर्म, उसके पिछले जीवन के भी कुछ संचित कर्म, उसकी मृत्यु समय की मनःस्थिति, मृत्यु समय उसके भीतर की इच्छाएं इन सब का मिलाप होता है। इन सबका जो हिसाब-किताब आता है, उससे उसका आगे का शरीर, उसकी आगे की गति और स्थिति तय होती है।
हमारा एक जन्म दुसरे जन्म का कारण बनता है, खास करके मनुष्य जन्म। इस एक मनुष्य जीवन में किए हुए अनैतिक, ग़लत कर्म जिन्हें शास्त्रों ने नाकारा है, मनुष्यों को अनेक जन्मों तक भटकाते है।
और इस एक मनुष्य जन्म में किए हुए सत्कर्म उसे देवताओं जैसी गति प्रदान करते हैं। दोबारा मनुष्य जन्म की प्राप्ति करा सकते हैं।
इस एक मनुष्य जन्म में अनासक्त होकर निश्काम भाव से किए गए कर्म मनुष्यों को मुक्ति भी दे सकते हैं। बार बार शरीर बदलने के झंझटों से छुटकारा दे सकते हैं। भविष्य में आनेवाले अनेकों दुःखों से मुक्त कर सकते हैं। चाहे कोई भी हो उसके कर्म ही निर्भर करेंगे की उसकी आगे की गति क्या होगी।
इस ब्रम्हांड में एक ईश्वर नामक अचुक अदृश्य कंप्यूटर काम करता है, और यह सब बिल्कुल अचुकता से होता है। कुछ आत्मज्ञानी अध्यात्मिक ऊंची अवस्था वालीं आत्माओं की बात अलग है। लेकिन आम आत्माएं खुद अपना शरीर नहीं चुनती, उनके कर्म ही उनका शरीर चुनते हैं।
हर व्यक्ति के कर्मों का एक कार्मिक शरीर बनता है और वह कार्मिक शरीर ही उस आत्मा को उसके कर्मों के हिसाब से गति देता रहता है।
प्रकृति में यमराज न होकर सब जगहों पर नियमराज है, प्रकृति नियमों से चलती है। हर एक व्यक्ति के भीतर चित्त में चित्रगुप्त बसा हुआ है। अदृश्य कंप्यूटर परमात्मा और मां प्रकृति के नियमानुसार, मृत्यु के बाद मनुष्य को उसके कर्मों के अनुकूल शरीर मिलता है। सब अपनी आप ही होता है कुछ करना नहीं पड़ता।
यहां प्रकृति और परमात्मा के राज़ में अपना मनचाहा शरीर चुनना या ना चुनने का अधिकार केवल आत्मज्ञानी महासंतो को, परमहंसों को होता है, आम आत्माओं को नहीं।
············••●◆❁✿❁◆●••··············
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

Related Articles

Back to top button