Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 23 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 23 अक्टूबर 2023
23 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। आज महानवमी का परम पावन व्रत है। नवमी को माता सिद्धिदात्री देवी की पूजा-आराधना से भक्तों को शीघ्र ही मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। आज नवमी को उग्रचंडी माता की पूजा-आराधना के उपरान्त नारियल एवं नींबु आदि की बलि अवश्य चढ़ाना चाहिए। आज नवमी तिथि के अंदर ही होमादी कर-करा लेना चाहिए। क्योंकि आज ही विजया दशमी अर्थात दशहरा का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। आज शमी एवं अपराजिता के पौधों की पूजा एवं नीलकंठ दर्शन भी अवश्य करना चाहिए। आज श्रवण नक्षत्र में सरस्वती विसर्जन एवं शस्त्र पूजन आदि क्रिया भी सम्पन्न की जाएगी। राजाओं के यहाँ आज ही पट्टाभिषेक का कार्यक्रम भी सम्पन्न किया जाएगा। महिष पर सवार माताजी की विदाई शोक देने वाला है। अतः सभी कार्यक्रम सावधानी पूर्वक शुभ मुहूर्त में ही सम्पन्न होना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “महानवमी व्रत एवं विजया दशमी अर्थात दशहरा के पावन पर्व ” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु प्रारंभ
🌤️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – शुभ पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 05:45 PM तक उपरांत दशमी
🖍️ तिथि स्वामी – नवमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा हैं ऎसे में जातक को दुर्गा की उपासना अवश्य करनी चाहिए.
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 05:14 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। राशि के स्वामी ग्रह शनि का भी प्रभाव पड़ता है।
🔔 योग – शूल योग 06:52 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 06:54 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 05:44 पी एम तक तैतिल – 04:31 ए एम, अक्टूबर 24 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:39:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:45 ए एम से 05:36 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:10 ए एम से 06:27 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:43 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:44 पी एम से 06:09 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:44 पी एम से 07:00 पी एम
💧 अमृत काल : 07:29 ए एम से 08:59 ए एम 05:50 ए एम, अक्टूबर 24 से 07:19 ए एम, अक्टूबर 24
❄️ रवि योग : पूरे दिन
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:27 ए एम से 05:14 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – महनवमी उपवास/ नवरात्रि उत्थापन/ देवी को बलिदान/ आयुथ पुजन/ सौर हेमंत ऋतु प्रारंभ/ पंचक प्रारंभ 28.22, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत जन्मोत्सव, परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक सूबेदार जोगिन्दर सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध कवि तुलसीदास स्मृति दिवस, प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी नेली सेनगुप्ता शहीद दिवस, राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस, अंतरराष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस, मोल दिवस
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार यदि सही दिशा में हम घर की चीजों को न रखें तो घर में वास्तु दोष लगता है। जैसे आग की दिशा में पानी, पानी की दिशा में चूल्हा, लकड़ी की जगह धातु और धातु की जगह अग्नि की स्थापना करने से घर में वास्तु दोष लगता है। इसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है। हमारे जीवन की आयु को संकट होता है, तरह-तरह के भय सताने लगते हैं, घर की खुशियों का धीरे-धीरे पतन होने लगता है। इसी तरह दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ प्रवेश द्वार होने से घर में बुरी शक्तियों का वास धीरे-धीरे होने लगता।
मां काली के मंत्रों से करें घर के वास्तु दोष को दूर
यदि आप घर के वास्तु दोष से परेशान हैं तो मां काली की शरण में शीघ्र आ जाएं। मां काली के इस मंत्र का जाप सच्चे मन से करें और मां से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में सब अच्छा हो।
मां काली का मंत्र इस प्रकार से :
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर :एलोवेरा में एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं यह आपकी बॉडी को फ्री रेडिकल से लड़ने में मदद करते हैं। एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं जो चोट आदि के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं।
पाचन क्रिया में सहायक : पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए भी एलोवेरा का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद माना जाता है खासकर कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में एलोवेरा बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि इसमें लैक्सेटिव प्रॉपर्टीस होती हैं, जो कब्ज से राहत दिलाने में कारगर है। इसके अलावा यह हार्ट बर्न से भी राहत दिलाता है। हालांकि, एलोवेरा जूस की मात्रा और उसमें क्या सामग्री हैं, इसका ध्यान रखें।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
फायदेमंद है गिलोय का सेवन करने से कई फायदे मिलते हैं गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक गुणों का खजाना है। इसमें एंटी-एजिंग और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो आपकी स्किन को हेल्दी बनाने में मदद करते हैं। गिलोय में पाए जाने वाले एंटी-वायरल, एंटी-डायबिटिक और एंटी-कैंसर जैसे गुण होते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है. वायरल बुखार, डेंगू और टाइफाइड जैसी बीमारियों में गिलोय बहुत फायदेमंद है।
डेंगू में कैसे करें गिलोय का इस्तेमाल डेंगू या बुखार होने पर गिलोय का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है। वैसे गिलोय के पत्तों से ज्यादा इसका डंठल फायदेमंद होता है। बुखार होने पर गिलोय से बना काढ़ा पानी से आराम मिलता है। डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए आप गिलोय का जूस पी सकते हैं। ये ज्यादा असरदार साबित होता है। डेंगू के मरीज को 2 चुटकी गिलोय के एक्सट्रैक्ट निकालकर इसे शहद में मिलाकर 2 बार दे सकते हैं। गिलोय के डंठल का पानी भी पी सकते हैं। इसके लिए गिलोय के डंठल को पानी में भिगो दें और सुबह छानकर इस पानी को पी लें। आप चाहें तो डंठल को पानी के साथ उबाल सकते हैं जब पानी आधा रह जाए तो इसे पी लें।
🌹 गुरु भक्ति योग 🌸
अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। जिनका उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है। इसके अलावा मार्कंडेय पुराण एवं ब्रह्ववैवर्त पुराण में भी वर्णित है। इसके अलावा इस दोनों पुराणों में और भी अनेक प्रकार की सिद्धियों का वर्णन है मिलता है।
ये सिद्धियाँ जिन्होंने भी इस संसार में पायी है, वो इस संसार में भगवान की तरह पूजे गये हैं। परन्तु इस सिद्धियों की प्राप्ति हेतु लगभग इन्सान का सबकुछ खो गया है तब इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है। लेकिन कुछ लोगों को इन सिद्धियों से साक्षात्कार सहज ही हो गया है। जिन्हें सहज ही इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है वो माता दुर्गा के नवम रूप माता सिद्धिदात्री के उपासक रहे हैं।
जी हाँ आज शारदीय नवरात्रा की नवमी तिथि है और माता सिद्धिदात्री का दिन है। यही माता सभी सिद्धियों की स्वामिनी हैं और इनकी पूजा से ही भक्तों को इन सिद्धियों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता दुर्गा की नवम शक्ति का ही नाम सिद्धिदात्री है और यही माता अपने उपासकों को सहज ही सम्पूर्ण सिद्धियों को देनेवाली हैं। सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली माता इन्हीं को माना गया है।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व इन आठ सिद्धियों को भगवान शिव ने इन्हीं माता की कृपा से प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर बने थे। इसी कारण भगवान शिव संसार में अर्द्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं और इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर आसीन होती हैं।
इनकी दाहिनी नीचे वाली भुजा में चक्र, ऊपर वाली भुजा में गदा और बांयी तरफ नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प शोभायमान होता है। नवरात्रि पूजन के नवें दिन इनकी पूजा की जाती है। आज के दिन भगवती माता सिद्धिदात्री का ध्यान-पूजन-अर्चन और बन्दन करने से भक्त का “निर्वाण चक्र” जाग्रत हो जाता है।
मां दुर्गा शेरावाली मईया जगत के कल्याण हेतु नव रूपों में प्रकट हुई और इन नव रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का। यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि-सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है देवी ने सिद्धिदात्री का यह रूप भक्तों पर अपनी कृपा बरसाने के लिए धारण किया था। देवता, ऋषि-मुनि, असुर, नाग और मनुष्य सभी मां के भक्त हैं।
इनकी भक्ति जो भी हृदय से करता है मां उसी पर अपना नेह लुटाती हैं। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं उन्हें नवमी के दिन निर्वाण चक्र का भेदन करना चाहिए। दुर्गा पूजा में इस तिथि को विशेष रूप से नवरात्री उपवास और पूजन के सम्पूर्ण फल की प्राप्ति के उद्देश्य से हवन किया जाता है। हवन से पूर्व सभी देवी दवाताओं एवं माता की पूजा करनी चाहिए।
हवन करते समय सभी देवी दवताओं के नाम से हवि अर्थात आहुति देनी चाहिए। सभी आवाहित देवी-देवताओं की आहुति के बाद माता के नाम अथवा नवार्ण मन्त्र से आहुति देनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोक मंत्र रूप हैं अत: आप सप्तशती के सभी श्लोकों से आहुति दे सकते हैं। समयाभाव में आप देवी के बीज मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” से कम से कम 108 बार हवन कर सकते हैं।
जिस प्रकार पूजा के क्रम में भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा सबसे अंत में होती है उसी प्रकार अंत में इनके नाम से आहुति देकर सपरिवार आरती एवं क्षमा प्रार्थना करें। हवन में जो भी प्रसाद आपने चढ़ाया है उसे बाटें और जब हवन की अग्नि ठंढ़ी हो जाए तो इसे पवित्र जल में विसर्जित कर दें। यह भष्म रोग, संताप एवं ग्रह बाधा से आपकी रक्षा करता है एवं मन से सभी भयों को दूर कर देता है।
जैसा कि पहले भी हमने बताया है, कि नवरात्रि के इन दिनों में माँ दुर्गा, माँ शारदा एवं माता महालक्ष्मी जी की पूजा बड़े धूम-धाम से पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इन दिनों में लगभग सभी सनातनी लोग देवी माँ का उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक ढंग से आराधना एवं पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि देवी माँ कि प्रशन्नता प्राप्त करने के लिए उपवास रखें जाते हैं।
इससे देवी माँ की कृपा सदा ही बनी रहती है और आदि शक्ति की कृपा से ही इस संसार रूपी भव सागर को पार किया जा सकता है। सात दिनों तक उपवास रख कर आठवें दिन अष्टमी को कन्याओं का भोज करवाया जाता है। कई लोग नवमी पर भी कन्याओं को भोजन करवाते हैं क्योंकि दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिन्हें शतावरी या नारायणी भी कहा जाता है और नव दिनों की तपस्या का सम्पूर्ण फल भी यही देती हैं।
शतावरी बल बुद्धि एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि मानी जाती है और इस औषधि को हृदय की गति तेज करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान कर माता भक्तों को को निहाल कर देती हैं। आज के पहले माता के अन्य अष्ट स्वरूपों की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना करते हैं।
इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है। माता सिद्धिदात्री की सेवा जो मनुष्य नियमपूर्वक करता है, उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। संसार के दु:खों से पीड़ित व्यक्ति को आज माता सिद्धिदात्री देवी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।

