ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 25 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 25 दिसम्बर 2023

25 दिसम्बर 2023 दिन सोमवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज सोमवार की मासशिवरात्रि व्रत है। आज पहला दीप घी का शिवमन्दिर में जलाएं। दूसरा विल्ववृक्ष के जड़ में और तीसरा दीपक आंवले के नीचे अवश्य जलाना चाहिये। इससे आपकी कोई भी विशिष्ट मनोकामना हो वो पूरी अवश्य हो जाएगी। आज काशी के पिशाच मोचन यात्रा एवं दर्शन अवश्य करना चाहिए। इससे पिशाचत्व से मुक्ति मिल जाती है। आज पिशाच मोचन पर जाकर यथासम्भव श्राद्ध एवं पितरों का तर्पण अवश्य करना चाहिए। अगर यह सम्भव ना हो सके तो आज किसी भी शिव मन्दिर में पितरों के निमित्त शिवपूजन करें। अगर आज पितृदोष आदि ग्रहदोषों की शांति कर्म आदि करवाया जाय, तो सफलता की गारंटी होती है। साथ ही आज शिवलिंग के ऊपर पहले पञ्चामृत और बाद में शहद का लेपन अवश्य करें। इससे आपके जटिल-से-जटिल रोग सहज ही समाप्त हो जायेंगे। आज महामना मदन मोहन मालवीय जी और श्रीअटल बिहारी वाजपाई जी की (अंग्रेजी दिनाङ्कानुसारेण) जन्म जयन्ती है, इन दोनों महापुरुषों को शत-शत नमन। आज ईसाई मत के अनुसार बड़ा दिन माना जाता है। आज सर्वार्थसिद्धियोग एवं सर्वार्थ$मृतसिद्धि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “मासशिवरात्रि व्रत, मालवीय जी और श्रीअटल बिहारी वाजपाई जी के जयन्ती” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष दिन सोमवार चतुर्दशी तिथि 05:47 AM तक उपरांत पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 09:39 PM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। रोहिणी नक्षत्र में प्रजापति ब्रह्मा का वास माना है।
🔕 योग – शुभ योग 04:22 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
प्रथम करण : गर – 05:48 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 05:46 ए एम, दिसम्बर 26 तक
🔥 गुलिक काल : सोमवार का शुभ गुलिक काल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक गुलिक काल रहेगा
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:58 बजे से 09:31 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:00 ए एम से 05:52 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:26 ए एम से 06:43 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:51 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:46 पी एम से 06:12 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:49 पी एम से 07:06 पी एम
💧 अमृत काल : 06:24 पी एम से 08:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:42 ए एम, दिसम्बर 26
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💦 अमृत सिद्धि योग : 09:39 पी एम से 06:44 ए एम, दिसम्बर 26
❄️ रवि योग : 06:43 ए एम से 09:39 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में सफेद तिल की मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अमृतयोग/ नाताल/ सर्वार्थसिद्धियोग/ सर्वार्थ$मृतसिद्धि योग/ मासशिवरात्रि व्रत/ क्रिसमस डे – ईसाई धर्म उत्सव/ भारत के भू.पू. राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह स्मृति दिवस, संगीतकार नौशाद अली जयन्ती, राजनीतिज्ञ मुख्तार अहमद अंसारी जयन्ती, श्रीअटल बिहारी वाजपाई जी जयन्ती
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗽 Vastu tips 🗺️
वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा धन आगमन की दिशा होती है और अगर इस दिशा में भारी सामान रखा हो या इस जगह पर बहुत गंदगी रहती हो, तो आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। घर में धन आगमन की गति धीमी हो जाती है। ऐसे ही उत्तर-पूर्व दिशा में अगर हर समय अंधेरा रहता हो तो परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बढ़ सकता है। इसलिए इस दिशा में हमेशा उजाला होना चाहिए। ऐसे ही दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में दरवाजा या तिजोरी रखना पैसों और आयु की हानि कराने वाला होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
समाज में मान सम्मान चाहिए ? तो कीजिए सूर्ये देव की पूजा। स्त्री पुरुष दोनों सूर्ये देव की पूजा कर सकते हैं। सूर्ये देव प्रसन्न हों तो जीवन में लाभ ही लाभ है। सभी गृह अनुकूल रहते हैं , जीवन में सुख समर्द्धि आती है ।
सनातन धर्म के अनुसार, हर एक दिन किसी न किसी देवी -देवता को समर्पित है। इसी तरह रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। सूर्य देव ब्रह्मांड के कर्ताधर्ता ही नहीं है बल्कि नवग्रहों के राजा भी है। इसलिए रोजाना सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं।
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए सुबह-सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने के साथ स्नान आदि करने के बाद अर्घ्य देना चाहिए। जानिए सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि के साथ मंत्र के बारे में।
भगवान सूर्य देव की पूजा विधि
सूर्योदय के 12 मिनट के अंदर अर्घ्य देना अति उत्तम होता है , इस समय सूर्य देव शीतल रूप में होते हैं। या आप अपनी सुविधा अनुसार दे सकते हो , क्यूंकि श्रद्धा व्यर्थ नहीं जाती।
रविवार के दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देते समय ‘ओम सूर्याय नमः ओम वासुदेवाय नमः ओम आदित्य नमः’ मंत्र का उच्चारण करना बहुत अच्छा माना जाता है।
इस दिन गुड़, दूध, चावल और वस्त्र जैसी चीजों का दान करें। बहते हुए जल में गुड़ और चावल को मिश्रित करके प्रवाहित करना शुभ माना जाता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
दूध और चिया सीड्स के सेवन से आप गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकते हैं। आप इसके जरिए बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं और धमनियों को साफ करके ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अलावा चिया सीड्स के हेल्दी फैट खासकर ओमेगा-3 धमनियों की सेहत और इनकी दीवारों के लिए हेल्दी है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
‘’होश को दोनों भौंहों के मध्‍य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो।‘’……यदि यह होश लग जाए तो पहली बार तुम्‍हें एक अद्भुत अनुभव होगा। पहली बार तुम विचारों को अपने सामने दौड़ता हुआ अनुभव करोगे। तुम साक्षी हो जाओगे। यह बिलकुल फिल्‍म के परदे जैसा होता है। विचार दौड़ रहे है और तुम एक साक्षी हो।
सामान्‍यतया तुम साक्षी नहीं होते: तुम विचारों के साथ एकात्‍म हो। यदि क्रोध आता है तो तुम क्रोध ही हो जाते हो। कोई विचार उठता है तो तुम उसके साक्षी नहीं हो सकते। तुम विचार के साथ एक हो जाते हो। एकात्‍म हो जाते हो, और इसके साथ ही चलने लगते हो। तुम एक विचार ही बन जाते हो। जब काम उठता है तो तुम काम ही बन जाते हो। जब क्रोध उठता है तो तुम क्रोध ही बन जाते हो। जब लोभ बनता है तो तुम लोभ ही बन जाते हो। कोई चलता हुआ विचार और उनसे तुम्‍हारा तादात्म्य हो जाता है। विचार और तुम्‍हारे बीच में कोई अंतराल नहीं होता।
लेकिन तृतीय नेत्र पर केंद्रित होकर तुम अचानक एक साक्षी हो जाते हो। तृतीय नेत्र के द्वारा तुम विचारों को ऐसे ही देख सकते हो जैसे की आकाश में बादल दौड़ रहे हों, अथवा सड़क पर लोग चल रहे हैं ।
साक्षी होने का प्रयास करो। जो भी हो रहा हो, साक्षी होने का प्रयास करो। तुम बीमार हो, तुम्‍हारा शरीर दुःख रहा है और पीड़ित है, तुम दुःखी और पीड़ित हो , जो भी हो रहा है, स्‍वयं का उससे तादात्‍म्‍य मत करो। साक्षी बने रहो। द्रष्‍टा बने रहो। फिर यदि साक्षित्‍व संभव हो जाए तो तुम तृतीय नेत्र मे केंद्रित हो जाओगे।
दूसरा, इससे उल्‍टा भी हो सकता है। यदि तुम तृतीय नेत्र में केंद्रित हो तो तुम साक्षी बन जाओगे। ये दोनों चीजें एक ही प्रक्रिया के हिस्‍से हैं । तो पहली बात: तृतीय नेत्र में केंद्रितहोने से साक्षी का प्रादुर्भाव होगा। अब तुम अपने विचारों से साक्षात्‍कार कर सकते हो। यह पहली बात होगी। और दूसरी बात यह होगी कि अब तुम श्‍वास के सूक्ष्‍म और कोमल स्‍पंदन को अनुभव कर सकोगे। अब तुम श्‍वास के प्रारूप को श्‍वास के सार तत्व को अनुभव कर सकेत हो।
पहले यह समझने का प्रयास करो कि ‘’प्रारूप’’ का, श्‍वास के सार तत्व का क्‍या अर्थ है। श्‍वास लेते समय तुम केवल हवा मात्र भीतर नहीं ले रहे हो। विज्ञान कहता है कि तुम केवल वायु भीतर लेते हो—बस ऑक्‍सीजन, हाइड्रोजन व अन्‍या गैसों का मिश्रण। वे कहते है कि तुम ‘’वायु’’ भीतर ले रहे हो। लेकिन तंत्र कहता है कि वायु बस एक वाहन है, वास्‍तविक चीज नहीं है। तुम प्राण को, जीवन शक्‍ति को भीतर ले रहे हो। वायु केवल माध्‍यम है; प्राण उसकी अंतर्वस्‍तु है। तुम केवल वायु नहीं, प्राण भीतर ले रहे हो।
तृतीय नेत्र में केंद्रित होने से अचानक तुम श्‍वास के सार तत्व को देख सकते हो—श्‍वास को नहीं बल्‍कि श्‍वास के सार तत्व को, प्राण को। और यदि तुम श्‍वास के सार तत्व को, प्राण को देख सको तो तुम उस बिंदु पर पहुंच गए जहां से छलांग लगती है, अंतस क्रांति घटित होती है।
इति समाप्त
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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