10 डिग्री से नीचे तापमान खुले आसमान तले रात काटने को मजबूर अन्नदाता किसान

ट्रॉली के नीचे जलती आग ऊपर सोते अन्नदाता धान खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं की हद
सिलवानी उदयपुरा मार्ग के चीचोली खरीद केंद्र पर प्रशासन नदारद
सिलवानी। कड़ाके की ठंड तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे और खुले आसमान के नीचे रातें गुजारते किसान यह तस्वीर किसी आपदा प्रभावित इलाके की नहीं बल्कि सिलवानी उदयपुरा मार्ग पर स्थित चीचोली समर्थन मूल्य धान खरीदी केंद्र (पटेल वेयरहाउस) की है जहां सरकारी अव्यवस्थाओं ने अन्नदाताओं को अमानवीय हालात में जीने को मजबूर कर दिया है। धान बेचने आए किसान बीते कई दिनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। खरीदी केंद्रों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी-लंबी कतारें दूर तक नजर आ रही हैं। दिन तो किसी तरह कट जाता है लेकिन रात होते ही किसानों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
न छत, न अलाव ठंड से बचने ट्रॉली के नीचे जलानी पड़ रही आग ग्राउंड से सामने आई यह तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं।
कई किसान ट्रॉली के नीचे आग जलाकर ठंड से बचते नजर आ रहे हैं, तो कई किसान ट्रॉलियों के ऊपर सोने को मजबूर हैं। कुछ किसान जमीन पर खुले आसमान के नीचे रात काट रहे हैं। ठंडी हवाओं के बीच जलती आग ही किसानों का एकमात्र सहारा बनी हुई है।
*न रुकने की व्यवस्था न बैठने की जगह*
खरीदी केंद्र पर न रात्रि विश्राम की व्यवस्था है न अलाव न बैठने के लिए कोई ठोस इंतजाम। किसानों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि उनकी फसल कब तौली जायेगी। भारी आवक के बावजूद खरीदी प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है।
जिम्मेदार अधिकारी नदारद
सबसे गंभीर बात यह है कि इन हालातों में खरीदी केंद्रों पर जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आ रहे। न कोई निगरानी न कोई समाधान। प्रशासन की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हो रही है।
*सरकारी दावों बनाम जमीनी हकीकत*
एक तरफ सरकार किसानों के हित में योजनाओं और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ समर्थन मूल्य केंद्रों पर किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यह स्थिति सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धान खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए केंद्रों पर अलाव, बैठने और रात्रि विश्राम की व्यवस्था की जाए ठंड से बचाव के लिए तत्काल राहत इंतजाम किए जाएं
ताकि अन्नदाता को इस अमानवीय और पीड़ादायक स्थिति का सामना न करना पड़े।



