Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 02 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 02 दिसम्बर 2023
02 दिसम्बर 2023 दिन शनिवार को मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की पञ्चमी तिथि है। आज काशी की अधिष्ठात्री माता अन्नपूर्णेश्वरी के लिए 16 दिनों तक चलने वाला व्रत आरम्भ हो जाएगा। इस व्रत में माता अन्नपूर्णेश्वरी का विशिष्ट पूजन, शृंगार एवं आरती आदि सम्मिलित होता है। साथ ही काशी के निकटस्थ गांवों के निवासी अपने धान के फसलों की कटाई के साथ ही धान की बालियाँ लाकर माता को समर्पित करते हैं। फिर उन्हीं धान की बालियों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, जिन्हें किसान इस उम्मीद में बड़ी श्रद्धा से ले जाते हैं, कि अगले वर्ष फसल अच्छी होगी। आप सभी सनातनियों को “अन्नपूर्णेश्वरी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : मार्गशीर्ष माह कृष्ण पक्ष वार शनिवार पंचमी तिथि 05:14 PM तक उपरांत षष्ठी
✏️ तिथी स्वामी : पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र पुष्य 06:54 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं।
🔊 योग : ब्रह्म योग 08:18 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 05:14 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 06:17 ए एम, दिसम्बर 03 तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:43:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:17:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:39 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:13 ए एम से 06:31 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:57 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:04 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 11:54 ए एम से 01:39 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, दिसम्बर 03
❄️ रवि योग : 06:54 पी एम से 06:31 ए एम, दिसम्बर 03
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : मूल प्रारंभ/रवियोग, अन्नपूर्णेश्वरी व्रत, राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस, अंतरराष्ट्रीय दास प्रथा उन्मूलन दिवस, गुलामी के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस, विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस, संयुक्त अरब अमीरात राष्ट्रीय दिवस, ओम प्रकाश रावत जन्म दिवस, एन.जी. चन्दावरकर जन्म दिवस, प्रमुख शिक्षाशास्त्री गुरुदास बनर्जी स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – पञ्चमी को बिल्वफल एवं षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है। इसके स्वामी नागराज वासुकी हैं तथा पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, यदि घर की तरक्की नहीं हो पा रही है और आप आर्थिक सफलता नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। तो बस एक सरल सा उपाय अपना कर आप अपने घर की स्थिती को बेहतर बना सकते हैं। एक घड़ी के माध्यम से भी आप अपने घर का वास्तु दोष दूर कर सकते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार गोल, चौकोर, अंडाकार या आठ व छः भुजाओं वाली घड़ी लगानी चाहिए। इससे सकारात्मकता बढ़ती है। इसलिए घड़ी खरीदते समय घड़ी के आकार का पूरा ध्यान रखें। घर की दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगाने से लाभ होता है। दीवार पर पेंडुलम वाली घड़ी लगाने से समय अच्छा बना रहता है और जीवन से तकलीफें दूर होती हैं।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पीली सरसो और गाय का गोबर पीली सरसों, गुग्गुल, कपूर और गाय के घी से धूप को तैयार कर लें| आपको एक गाय के गोबर से बना उपला लेना होगा और इसे जलाना होगा| साथ ही तैयार धूप को इसमें डालना होगा| इसके बाद घर के हर कोने में इसकी धूप को फैला लें| आपको इसका प्रयोग 21 दिन तक लगातार करना होगा| तभी घर से सारी नकारात्मक शक्तियां धीरे-धीरे दूर हो जाएगी|
घर का मंदिर, और चांदी की कटोरी का उपयोग माना जाता है कि रात का भोजन करने के बाद घर में जो मंदिर है वहां पर एक चांदी की कटोरी को रख लें| इस कटोरी में आपको लौंग और कपूर को डालकर जलाना होगा| इस प्रयोग को करने से हर तरह के संकटों से आपको मुक्ति मिल जाएगी| ऐसा करने से घर में किसी भी प्रकार कि नकारात्मक शक्ति का होना प्रवेश बाधित हो जाता है|
साबुत उड़द, कोयले और काले काले कपड़े का उपयोग
जिस भी व्यक्ति पर प्रेतबाधा हो उसके लिए ये उपाय करना चाहिए| एक किलो साबुत उड़द लें और इसे सवा किलो कोयले में मिला लें| इसके बाद इसे सवा मीटर की काले कपड़े में बांधकर प्रभावित व्यक्ति के सिर से सात बार उसारें और फिर इस पोटली को नदी में बहा दें|
🍷 आरोग्य संजीवनी 🍶
जिमीकंद खाने के फायदे जिमीकंद हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इस सब्जी को खाने से शरीर को फॉस्फोरस मिलता है।
डायबिटीज होने पर जिमीकंद ग्लूकोज लेवल को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को स्ट्रॉंग बनाता है।
जिमीकंद में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है।
अगर आप गठिया के मरीज हैं तो जिमीकंद आपके लिए फायदेमंद सब्जी है। इससे जोड़ों की सूजन और दर्द को कम किया जा सकता है।
जिमीकंद में काफी मात्रा में विटामिन ए और बीटा कैरोटीन होता है जो आंखों की रोशनी को तेज करता है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
*कैसे करें छठी इंद्री को जागृत? यह हैं छठी इंद्री को जागृत करने के 5 तरीके !
1. प्राणायाम के अभ्यास से चुकी हमारी दोनों बाहों के बीच छठी इंद्री स्थित होती है. इसलिए प्रणायाम सबसे उत्तम उपाय माना गया है. सुषुम्ना नाड़ी के जागृत होने के कारण छठी इंद्री जागृत होती है. प्रणायाम के माध्यम से 6 महीने के अंदर छठी इंद्री को जाग्रत किया जा सकता है. इसलिए अगर आप अपनी छठी इंद्री को जागृत करना चाहते हैं तो 6 महीने के लिए दुनियादारी से आपको अलग होना पड़ेगा.
सुषुन्मा, पिंगला और इड़ा के अलावा हमारे शरीर में और हजारों नारियां मौजूद होती है. इन सभी नाड़ियों का सशक्तिकरण प्रणायाम और आसनों के द्वारा हीं किया जा सकता है. इन सभी नाड़ियों की सशक्तिकरण और शुद्धिकरण के बाद हीं नाड़ियों की शक्ति को जागृत कर सकते हैं.
2. ध्यान के अभ्यास से भृकुटी के बीच निरंतर ध्यान करते रहने से आज्ञाचक्र जाग्रत होने लगती है. जो हमारे सिक्स्थ सेंस को बढ़ाने में मददगार होता है. कहते हैं कि निरंतर गहरे ध्यान प्रयोग से खुद हीं जागृत होने लगती है. हर रोज 40 मिनट का ध्यान इसमें लाभदायक सिद्ध हो सकता है.
3. सेल्फ हिप्नोटिज्म से हिप्नोटिज्म या मेस्मेरिज्म जैसी अनेकों विद्याएं छठी इंद्री को जागृत करने के लिए एक सरल रास्ता है. लेकिन इसके कुछ खतरे भी हैं. हिप्नोटिज्म को सम्मोहन कहा जाता है. और इसी सम्मोहन विद्या को ‘प्राण विद्या’ या ‘त्रिकाल विद्या’ के नाम से प्राचीन समय से पुकारा जाता है. आत्म सम्मोहन को सेल्फ हिप्नोटिज्म कहा जाता है. आत्म सम्मोहन की शक्ति पाने के लिए कई तरीके इस्तेमाल होते हैं.
4. त्राटक क्रिया से त्राटक क्रिया के द्वारा भी आप अपनी छठी इंद्री को जागृत कर सकते हैं. जितनी देर आप बिना पलके किराए किसी एक वस्तु को देख सकें देखते रहें. और फिर अपनी आंखें बंद कर लें. लगातार कुछ समय तक इस तरह अभ्यास करते रहने से आपकी एकाग्रता बढ़कर धीरे-धीरे छठी इंद्री जाग्रत होने लगेगी.
सावधानी लगातार त्राटक का अभ्यास करते रहने से मस्तिष्क और आंखों की गर्मी बढ़ती है. इसलिए त्राटक के अभ्यास के तुरंत बाद नेती क्रिया का अभ्यास करें. अगर आंखों में किसी तरह की तकलीफ महसूस हो तो इस क्रिया को ना करें. इस क्रिया को भी किसी अच्छे जानकार व्यक्ति से ही सीखें, क्योंकि इससे आत्मसम्मोहन घटित हो सकता है.
5. खुद के अभ्यास और बोध को बढ़ाएं अगर हमें इस बात का एहसास होने लगे कि हमारे पीछे कोई आ रहा है. या आस – पास कोई खड़ा है. तो हमें समझ जाना चाहिए कि ये छठी इंद्री के होने की सूचना है. उसके संकेत के कारण व्यक्ति को इस बात का एहसास हो जाता है कि किसी बात का क्या परिणाम हो सकता है. इस तरह वो चमत्कारिक रुप से किसी दुर्घटना का शिकार होने से बच जाते हैं. क्योंकि उन्हें पूर्वाभास हो जाता है.
अगर आप अपने एहसास पर गहराई से ध्यान देने लगेंगे तो पता कर पाएंगे कि पहले की अपेक्षा आपके पूर्वाभाष करने की क्षमता बढ़ने लगी है. जैसे-जैसे आप का अभ्यास गहराता जाएगा आप की छठी इंद्री जाग्रत होती चली जाएगी.
आप अपने एहसास को बढ़ाएं. जब आपकी यह आभास करने की क्षमता बढ़ने लगती है, तो वो पूर्वाभास में बदल जाती है. मन की यही स्थिरता और शक्ति छठी इंद्री के विकास में सहायक होती है.
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⚜️ पंचमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट की निवृत्ति हो जाती है यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।


