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चिकित्सालय प्रबंधन समिति को अधिकार की जानकारी, कर्तव्य की नहीं

चिकित्सालय में तोड़फोड़ करना अपराध
समय पर मरीज का उपचार करना डॉक्टर का कर्तव्य

लेखक : हरीश मिश्र वरिष्ठ पत्रकार

रायसेन । जिला चिकित्सालय में जैसे ही मरीज एवं पीड़ित परिजन मुख्य द्वार से प्रवेश करते हैं, चिकित्सालय प्रबंधन समिति द्वारा सूचना बोर्ड पर चेतावनी लिखी है कि चिकित्सालय में तोड़-फोड़ करना या संस्था में काम करने वालों के साथ अभद्र व्यवहार करना गैर जमानती अपराध है।
लेकिन चिकित्सालय प्रबंधन समिति ने ऐसा कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया है कि डॉक्टर या संस्था में काम करने वाले यदि ड्यूटी समय पर उपलब्ध ना हों, उनके द्वारा उपचार में लापरवाही की जाए तो ऐसे डॉक्टर या सेवाकर्मियों की शिकायत कहां की जाए ?
कुल मिलाकर चिकित्सालय प्रबंधन समिति को अपने अधिकार पता हैं, लेकिन कर्तव्यों का बोध नहीं है।
मध्यप्रदेश चिकित्सक तथा चिकित्सा सेवा सुरक्षा अधिनियम 2008 के तहत चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा से संबंध व्यक्तियों के विरुद्ध हमला, आपराधिक बल, धमकी को इस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित किया गया है।
इस अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति, समूह चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों, क्लीनिक , एंबुलेंस पर हमला , आपराधिक बल, धमकी देने का कोई भी कार्य करता है तो धारा 3 के अनुसार 3 माह सजा या जुर्माना जो 10000 / तक का हो सकेगा, दोनों से दंडित किया जाएगा। उक्त अपराध संज्ञेय तथा गैर जमानती होता है।
जबकि डॉक्टर का ड्यूटी समय में उपस्थित ना होना, मरीज के प्रति लापरवाही भी अपराध की श्रेणी में आती है। इसका उल्लेख जिला चिकित्सालय के सूचना बोर्ड पर नहीं किया गया । यह कि चिकित्सालय प्रबंधन समिति को अपने अधिकार की जानकारी है, कर्तव्य की नहीं।
कई बार देखने में आया है कि डॉक्टर लापरवाही से गलत ऑपरेशन कर देते हैं या फिर कुछ गलत दवाइयां दे देते हैं, जिससे मरीज को स्थाई रूप से नुकसान हो जाता है। कई बार मरीजों की मौत भी हो जाती है।
डॉक्टर की लापरवाही भी अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसी लापरवाही को भारतीय दंड संहिता 1860 में उल्लेखित किया गया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 337 लापरवाही से होने वाली साधारण क्षति के संबंध में उल्लेख करती है।

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