मध्य प्रदेश

आग से धधक रहीं फसलें, हाथ में हाथ धरे बैठे नेता जनता के हिस्से में सिर्फ आश्वासन का पुलिंदा

तहसील मुख्यालय में नहीं है एक भी दमकल वाहन
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान
हर वर्ष गर्मी के समय आग की घटनाएं बढ़ जाती है और इसे ढीमरखेड़ा तहसील का दुर्भाग्य ही कहा जाये कि तहसील होने के बावजूद भी एक भी दमकल वाहन न होने का खामियाजा किसान भुगत रहे है। भीषण मंहगाई के बावजूद भी कृषक कर्ज लेकर खेती कर रहे है और जैसे ही फसले काटने का समय होता है। वैसे ही फसलें आग की बलि चढ़ रही है। इस बीच सवाल यह भी उठता है कि जब हर वर्ष इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है तो स्थानीय नेता हाथ में हाथ रखे क्या बैंठे है और हर समय सिर्फ आश्वासन का झुनझुना पकड़ा दिया जाता है जबकि इस संबंध में यह भी किया जा सकता है कि जो वाहन जिला मुख्यालय में खड़े हुये है उनमें से कम से कम 1 वाहन गर्मी के समय तहसील मुख्यालय में खड़ा किया जाये, जिससे होने वाली आगजनी की घटनाओं को रोका जा सके। लिहाजा गर्मी के शुरूआती दिनों में ही ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत कई आगजनी की घटनाएं सामने आई है लेकिन दमकल वाहन न होने की स्थिति में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और जब तक जिला मुख्यालय से फायर ब्रिगेड आती है तब तक फसले जलकर खाक हो जाती है। अभी पिछले दिनों ही ग्राम देवरी में अज्ञात कारणों से आग लग गई और पलभर में 2 एकड़ में लगी गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई। वहीं शनिवार को ढीमरखेड़ा ग्राम के सतीश पटेल की खड़ी फसल में आग लगने से तकरीबन दो एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई है। समस्या का हल निकाले, मुआवजा से लागत निकालना मुश्किल क्षेत्र के किसानों द्वारा लगातार इस संबंध में मांग की जा रही है कि कम से कम गर्मी के समय तो एक फायर बिग्रेड वाहन की व्यवस्था तहसील मुख्यालय में की जाये, इसके बाद भी उनकी बातों को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है। क्षेत्रीय किसानों ने बताया कि आग लगने की दशा में शासन द्वारा जो मुआवजा दिया जाता है नाकाफी है और उससे फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। लिहाजा क्षेत्रीय किसानों की ओर से मांग यह की जा रही है कि समस्या का हल निकाला जाये और तहसील मुख्यालय में कम से कम एक फायर बिग्रेड की व्यवस्था की जाये।
सांसद , विधायक फंड लेकिन किसी ने नहीं की पहल हर वर्ष शासन की ओर से सांसद एवं विधायकों को फंड आवंटित किया जाता है जिसमें जनहित को दृष्टिगत रखते हुये यह पहल न तो सांसद के द्वारा की गई। और न ही विधायकों के द्वारा।
स्मरण रहे कि बड़वारा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री मोती कश्यप भी विधायक रह चुके हैं लेकिन अपने कार्यकाल में उनके द्वारा भी इस जनहित के गंभीर मुद्दे का हल नहीं निकाला गया।

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