ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 21 अक्टूबर 2023

21 अक्टूबर 2023 दिन शनिवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि सप्तमी तिथि है। आज माता कालरात्रि का दिन है, आज माता की विशिष्ट पुजा से अतुलनीय लाभ उठाने का दिन है। आज अर्द्धरात्रि में अपने घर में ही माता की विशिष्ट पुजा करके आप अपनी मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। आज के दिन ही सभी पूजा पंडालों में माता की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएँ स्थापित की जाएंगी। इसे बिल्व सप्तमी भी कहा जाता है। आज शनिवार को माता तुरंग अर्थात घोड़े पर सवार होकर आती हैं। और माता का घोड़े पर चढ़कर आना शुभ नहीं बताया गया है। इससे छत्रभंग एवं कष्ट का योग बनता है। अष्टमी की महानिशा पूजा भी आज शनिवार को ही की जाएगी। माता अन्नपूर्णा की परिक्रमा भी आज ही रात्री 07:27 PM के बाद शुरु हो जाएगी। आप सभी सनातनियों को “माता कालरात्रि की विशिष्ट पूजा, महानिशा पूजा एवं माता अन्नपूर्णा के परिक्रमा” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास प्रारंभ
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 09:53 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि के स्वामी – सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 07:54 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक है तो राशि स्वामी शुक्र।
📣 योग – सुकर्मा योग 12:36 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : गर – 10:41 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 09:53 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:19:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:44 ए एम से 05:35 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:09 ए एम से 06:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:44 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:46 पी एम से 06:11 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:46 पी एम से 07:02 पी एम
💧 अमृत काल : 03:15 पी एम से 04:48 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:41 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 22
🌸 त्रिपुष्कर योग : 07:54 पी एम से 09:53 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/महानिशा पूजा/ महालक्ष्मी पूजन/ सरस्वती पूजन/ आयंवील ओली प्रारंभ (जैन)/ त्रिपुष्कर योग/ दुर्गा पूजा प्रारंभ ( बंगाल), पुलिस संस्मरण दिवस, अल्फ्रेड नोबल जन्म दिवस, सिविल सेवा दिवस, विश्व आयोडीन अल्पता दिवस, विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस, आज़ाद हिन्द फ़ौज स्थापना दिवस, भारतीय फ़िल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा स्मृति दिवस, अभिनेता शम्मी कपूर जन्म दिवस, अमृतसर नगर स्थापना दिवस, भारतीय जनसंघ स्थापना दिवस, जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला जयन्ती, विश्व तम्बाकू सेवन निषेध दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu Tips 🗽
अगर आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और आपने कर्ज भी ले रखा तो ये उपाय जरूर आजमाएं. कर्ज मुक्ति के लिए कांच लगवाना बहुत शुभ माना जाता है. यह कांच घर या दुकान की उत्तर-पूर्व दिशा में लगवाना चाहिए. ध्यान रहे कि यह लाल, सिंदूरी या मैरून रंग का ना हो.
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार आर्थिक समस्या दूर करने के लिए आपको घर में छोटे-मोटे बदलाव भी करने चाहिए. जैसे मुख्य द्वार के पास एक और छोटा-सा द्वार लगवाने से घर में धन का आगमन होता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आपने किसी से कर्ज लिया है तो इसकी किस्त हमेशा मंगलवार के दिन ही चुकाएं. माना जाता है कि ऐसा करने से कर्ज जल्दी उतर जाता है और दोबारा लेने की नौबत नहीं आती है.
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या दूध पीना इंसानों के लिए सेहतमंद है?
दूध बीमारियों की जड़ है। इसलिए दूध पीना इंसानों के लिए सेहतमंद नहीं है।
दूध केवल मनुष्य ही पीते हैं जो प्राकृतिक नहीं होता इसलिए मनुष्य ही बीमार पड़ते हैं।
दूध के साथ कोई भी आहार रक्तविकार उत्पन्न नहीं करता क्योंकि यह विरुद्ध आहार है। यह कई बीमारियों का कारण बनता है। विशेषकर त्वचा संबंधी रोग संक्रमण से होने वाली बीमारियाँ, हर तरह की एलर्जी और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना।
वात-पित्त-कफ में से जो भी प्रकृति हो, वही प्रकृति दूध बढ़ाती है। कुछ लोग कहते हैं कि दूध पीने से कफ बनता है, कुछ लोगों को दूध पीने से गैस बनती है और कुछ लोगों को पित्त होता है। इस प्रकार सभी प्रकार के रोग वात-पित्त-कफ असंतुलन के कारण होते हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
किडनी खराब होने का शुरुआती लक्षण क्या है?
किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:
मूत्र में बदलाव: अगर आपका मूत्र रंग में परिवर्तन होता है, या मूत्र की मात्रा कम हो जाती है या बढ़ जाती है, तो यह एक संकेत हो सकता है।
मूत्र में डर्डन: अगर मूत्र आने के समय डर्डन होता है या दर्द होता है, तो यह एक संकेत हो सकता है।
बार-बार मूत्र आना: यदि आपको अकसर मूत्र आने का इच्छुक लगता है, तो यह एक संकेत हो सकता है।
थकान: अनिश्चित कारणों से थकान और कमजोरी महसूस होना भी किडनी समस्याओं का संकेत हो सकता है.
स्वेलिंग: शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अचानक सूजन आना भी किडनी समस्याओं का इंडिकेटर हो सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जगतजननी, जगत्कल्याणि, जगन्माता श्री दुर्गा का सप्तम रूप माता श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त सहस्रार चक्र में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में काल का नाश करने वाली देवी “माता कालरात्री” ही हैं।
भक्तों की सामान्य पूजा मात्र से ही उनके सभी दु:ख-संताप आदि माता भगवती हर लेती हैं। दुश्मनों का नाश करने वाली तथा मनोवांछित फल देकर अपने भक्तों को संतुष्ट करती हैं। दुर्गा पूजा का सातवां दिन आश्विन शुक्ल सप्तमी माता कालरात्रि की उपासना का विधान है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है। इनका वर्ण अंधकार की भाँति काला है।
इनके केश बिखरे हुए हैं, कंठ में विद्युत की कान्ति बिखेरनेवाली माला तथा तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल एवं गोल हैं। जिनमें से बिजली की भाँति किरणें निकलती रहती हैं। इनकी नासिका से निकलनेवाली श्वास-प्रश्वास से जैसे अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं। माँ का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों का नाश करने के लिये ही है।
माँ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं। माता कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है। क्योंकि ये अपने भक्तों का सदा ही शुभ ही करती हैं। दुर्गा पूजा के सप्तम दिन साधक का मन “सहस्रार” चक्र में स्थित होता है। मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से अपने भक्तों के जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने मां की स्तुति की थी।
यह देवी कालरात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं। इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है। देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस्या की रात्रि से भी अधिक काला है। मां कालरात्रि के तीन बड़े-बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती हैं। माता कालरात्रि देवी की चार भुजाएं हैं। दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान देती हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है। बाल खुले और हवा में लहराते देवी कालरात्रि गर्दभ पर सवार होती हैं। मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है। देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है। अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है। हर प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि देनेवाली माता कालरात्रि का यह सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है।
सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। इसके लिए तन्त्र साधना करने वाले भक्त षष्ठी को ही बिल्ववृक्ष से किसी एक पत्र को आमंत्रित करके आते हैं और उसे आज तोड़कर लाते है। उसी बिल्वपत्र से माता की आँखें बनाई जाती है और उसी को माता को प्रत्यक्षदर्शी मानकर उनकी उपस्थिति में साधना करके मन्त्र-तन्त्रों की सिद्धि की जाती है।
दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व होता है। इस दिन से भक्तों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है। भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन-पूजन के लिए भारी मात्रा में आने लगते हैं। लगभग सभी देवी माता के प्रमुख स्थलों पर सप्तमी की पूजा भी सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती है। परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है।
इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान्न एवं कहीं-कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि “सिद्धियों” की रात्री भी कही जाती है। इसलिये कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं आज सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं। पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं। उसके अनुसार पहले कलश की पूजा, नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए।
साधक के लिए सभी सिद्धियों का द्वार आज की साधना से खुलने लगता है। इस दिन सामान्य पूजा परन्तु मन की एकाग्रता से भक्तों को माता के साक्षात्कार का भी अवसर मिलता है। आज की पूजा-साधना से मिलने वाले पुण्य एवं नव दिनों के उपवास से भक्त इसका अधिकारी होता है। इस दिन की पूजा से भक्तों की समस्त विघ्न बाधाओं और पापों का नाश हो जाता है। और उसे अक्षय पुण्य लोक की प्राप्ति होती है।
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⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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