आज का पंचाग बुधवार 28 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🧾 आज का पंचांग 🧾
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
👣 28 सितम्बर 2022 दिन मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का तिसरा दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को शारदीय नवरात्रा के तिसरे दिन माता चंडी की तिसरी स्वरूप माँ चंद्रघण्टा की उपासना में माता को सिर में सिंदूर और पैरों में आलता लगाकर दर्पण दिखायें। आप सभी को माँ चंद्रघण्टा के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथिः- तृतीया तिथि 25:28:00 तक तदोपरान्त चतुर्थी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- तृतीया तिथि के स्वामी पार्वती शिव जी हैं तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं।
💫 नक्षत्रः- चित्रा 06:17:00 तक तदोपरान्त स्वाति नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- चित्रा के स्वामी मंगल जी हैं तथा स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु जी हैं।
📢 योगः- वैधृति योग समस्त।
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 02:00 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 01:27 ए एम, सितम्बर 29 तक वणिज
⚜️ दिशाशूलः- बुधवार को उत्तर दिशा में जाना अशुभ होता है यदि आवश्यक हो तो घर से धनियां या तेल खाकर निकलें।
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 10:41: 00 A.M से 12:11:00 P.M तक
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 12:11:00 P.Mसे 01:41:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:29:59
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:28:35
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:11 पी एम से 02:59 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:59 पी एम से 06:23 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:11 पी एम से 07:23 पी एम
💧 अमृत काल : 09:12 पी एम से 10:47 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 29
❄️ रवि योग : 05:52 ए एम, सितम्बर 29 से 06:13 ए एम, सितम्बर 29
💥 वैधृति योग- रात 3 बजकर 7 मिनट तक
☄️ स्वाती नक्षत्र- सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को शहद भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सिन्दूर तृतीया, तृतीय नवरात्र – माँ चन्द्रघंटा पूजा / व्रत , रंग भूरा, रवि उल अव्वल मासारम्भ मुस्लिम, शहीदे आजम भगत सिंह जन्म दिवस, पार्श्व गायिका लता मंगेशकर जयन्ती, ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ का स्थापना दिवस, विश्व रेबीज दिवस
✍🏽 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताएंगे जो आपको अपने घर में शंख रखने से पहले जानना जरूरी है। वास्तु शास्त्र में शंख स्थापना का विशेष महत्व है। बता दे की, पूजा करते समय शंख को दाहिनी ओर रखना चाहिए। सबसे पहले शंख को धोना चाहिए और जो मंत्र जाप करना चाहिए वह होगा- ‘m सुदर्शनस्त्रय फातु।’ फिर शंख को आधार पर इस प्रकार रखना चाहिए कि उसका खुला भाग ऊपर की ओर तथा चोंच आपकी ओर हो।
शंख पर प्रणव मंत्र यानि ‘O’ कहकर चंदन लगाना चाहिए। इस तरह पूजा के लिए रखा गया शंख घर में सुख और सौभाग्य लेकर आएगा।
क्या होगा अगर शंख दक्षिणावर्त है?
आपकी जानकारी के लिए बता दे की, शुभ दिन घर में हमेशा शंख जरूर रखें। आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि न तो आप अपना शंख किसी को दें और न ही किसी का शंख मांगकर लाएं। जिसके साथ ही वास्तु के अनुसार पूजा घर में एक से अधिक शंख नहीं होने चाहिए, नहीं तो यह शुभ के स्थान पर अपशकुन होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ♻️
हड्डियों को बनाए मजबूत अंजीर में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ऐसे में अंजीर का सेवन हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। हड्डियों की मजबूती के लिए जितना लाभकारी दूध होता है उतना ही फायदेमंद अंजीर भी होता है।
कब्ज की समस्या रोजाना सुबह में भिगोए हुए अंजीर खाने से कब्ज की समस्या से राहत मिलता है। अगर आप लंबे समय से कब्ज की समस्या से परेशान हैं, तो आज से ही अंजीर खाना शुरू कर दें। इसके सेवन से कब्ज में बहुत जल्द आराम मिलता है।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
ये हैं बवासीर दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय –
त्रिफला पाउडर बवासीर की परेशानी को दूर करने में त्रिफला आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए बकायन, नीम की निमोली और त्रिफला को बराबर मात्रा में मिलाकर इसका पाउडर बना लें। उसके बाद रोजाना इस पाउडर का सेवन करें।
दूध और नींबू पाइल्स की समस्या से छुटकाार पाने के लिए दूध और नींबू फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए एक कप दूध गर्म करके इसे ठंडा कर लें। फिर इसमें नींबू का रस डालकर इसको पी जाएं। ऐसा लगातार 3-7 दिन करने से आपको पाइल्स की समस्या से निजात मिल सकती है।
नागदोन के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर नागदोन के पत्ते भी बवासीर की समस्या से दूर कर सकता है। इसके लिए रोजाना नागदोन के 3 पत्ते खाएं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माता दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा देवी है। नवरात्रि की उपासना में चन्द्रघंटा माता की तीसरे दिन पूजा होती है। क्योंकि शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन का बहुत ही महत्व होता है। सन्तों से सुना है, कि आज माता चन्द्रघंटा की पूजा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन एवं दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है। तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। माँ चन्द्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सदैव फलदायी होती है। तथा माता अपने भक्तों के सभी कष्टों का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं।
माँ का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है। इनको भक्तों के स्वर में दिव्य एवं अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। माता की कृपा से इनके भक्त जहाँ भी जाते हैं अन्य लोगों को भी शान्ति और सुख का अनुभव करवाते हैं। माँ का यह स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचन्द्र होता है। इसलिए इन्हें चन्द्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमक वाला बताया गया है।
माता चंद्रघण्टा के दस हाथ हैं तथा दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित रहते हैं। इनका वाहन शेर है तथा सदैव युद्ध के लिए उद्यत रहने की मुद्रा में इनको दर्शाया गया है। फिर भी माता का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शान्ति से सदैव परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से भक्तों को वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता भी आती है।
माता अपने भक्तों का सर्वतोमुखी विकास, शरीर एवं शरीर के सम्पूर्ण अंगों में दिब्य कांति तथा अनेक गुणों की वृद्धि कर देती हैं। चन्द्रघंटा अर्थात चाँद की तरह चमकने और सदैव प्रकाशित रहने वाली देवी। नवरात्री के तीसरे दिन माता की विग्रह रूप में पूजा की जाती है। इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा के बाद ध्यान एवं साधना करना चाहिये।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

