खून से फाग… निर्दोषों से कुछ अतिवादी और दहशतगर्दों ने खून से होली खेली
रिपोर्टर / लेखक : हरीश मिश्र
रायसेन। रायसेन जिला चैत्र के पहले दिन से साम्प्रदायिकता के सूरज की तपन से बेहद तप रहा है। पतझड़ के साथ शोक के पत्ते झड़ना प्रारंभ हो गए। फाल्गुन उत्सव पर जिला मुख्यालय पर कलेक्टर निवास एवं पूरे जिले में पालनहार कृष्ण के भक्तों के
साथ करुणाकर अल्लाह के बंदों ने सद्भावना के रंग से होली खेली थी।
शाम होते-होते जिले के सिलवानी तहसील के खमरिया गांव के भोले-भाले आदिवासी समुदाय के निर्दोषों से कुछ अतिवादी और दहशतगर्दों ने खून से होली खेली । जिसमें एक की मौत और चालीस लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद आदिवासियों की एक आंख में आंसू और दूसरी आंख में खून उतरा हुआ है। आंसू उस अभागे के लिए जिसे अकारण ही मार डाला गया और खून उन दहशतगर्दों के खिलाफ जिन्होंने निरपराध लोगों के खून से फाग खेला। कुछ दहशतगर्दों के अंदर का हैवान जाग उठा, बर्बरता हावी हो गई और कृष्ण भक्तों के खून से ख़ुदा के बंदों के हाथ रंग गए।
इस बर्बरता पर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी 17 साल पुरानी कार्यशैली अनुरुप शब्द भेदी बाणों से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से चौहान नहीं चूके ।
शिवराज आदिवासी समुदाय के घायलों को देखने हमीदिया अस्पताल पहुंचे। शिवराज ने आदिवासी समुदाय के आंखों के आंसू पोंछने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की। सवाल यह है दूसरी आंख के खून के आंसू कानून के दंड से पोंछने के लिए क्या शिव सरकार पुलिस प्रशासन को खुली छूट प्रदान करेगी जिससे जिले में सुदृढ़ प्रशासन का राज्य स्थापित हो सके। जिससे नीति और सिद्धांत के अनुरूप अधिकारी निर्भय होकर कानून की रक्षा कर सकें। निश्चित ही सांप्रदायिकता के सूरज की तपन पुलिस की लाठी से कमजोर पड़ेगी।
कलेक्टर अरविंद दुबे और पुलिस अधीक्षक विकास शहवाल ने दहशत गर्दों के विरुद्ध जिस प्रकार की प्रारंभिक कार्रवाई की है वह कठोर होते हुए भी अभिनंदनीय है। सड़े हुए अंग को शल्यक्रिया के बाद काटा जाता है। वैसे ही अपराध प्रवृति और उसे संरक्षण प्रदान करने वालों के मंसूबों और मकानों को डोजर से नेस्तनाबूद करना अपराधियों को संदेश है कि कानून के पंजे से कोई नहीं बच सकता। कल तक जो चांदपुर में साम्प्रदायिकता के आशियाने थे, आज उन पर प्रशासन ने कानून का डंडा गाढ़ दिया है।
किसी भी अपराध प्रवृति के संरक्षण स्थल को जमींदोज करना विधि अनुसार मान्य नहीं, लेकिन नृशंसता और हिंसा से सामाजिक सद्भाव बिगड़ता हो तो शिव को पुलिस प्रशासन को तांडव करने की खुली छूट देनी चाहिए ।
यदि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्रदान नहीं किया जाए और अधिकारियों को कानून की रक्षा करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाए तो अपेक्षित परिणाम सामने आएंगे । साम्प्रदायिकता के सूरज की तपन कमजोर पड़ेगी और सद्भावना स्थापित होगी।
इस जिले की मूक माटी कलेक्टर अरविंद दुबे की कार्यशैली से पूर्व परिचित है। उनकी नीयत साफ है… स्पष्ट नीति है और सुदृढ़ प्रशासन देने में सक्षम हैं।

सुदृढ़ प्रशासन का संदेश देने के लिए चिंतन करते आईजी, डीआईजी, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक अधिकारियों के साथ।








