किसान लगा रहे हैं खेतों में आग, प्रतिबंध भी बेअसर
सिलवानी। रबी सीजन की कटाई के बाद गेहूं वाले खेत में खड़ी नरवाई पर किसान प्रतिबंध के बाद भी आग लगा रहे हैं। इससे आसपास के खेतों को भी नुकसान हो रहा है। वहीं खेत में आग लगाने के कारण मिट्टी के पोषक तत्वों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। खेतों में नरवाई प्रबंधन के लिए किसानों को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। गेहूं की फसल काटने के बाद खेतों में खड़ी नरवाई को जलाना किसानों के लिए एक परंपरा सा बन गया है। इस पर प्रशासनिक तौर पर प्रतिबंध लगाया गया है। हर साल गेहूं की कटाई शुरू होते ही प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, बावजूद इसके हर दिन खेतों में धधकती आग इस प्रतिबंध को ठेंगा दिखा रही है। जबकि नरवाई की आग से खड़ी फसलों के साथ घरों में आग लगने की घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन खेतों में नरवाई को जलाने वाले किसानों के खिलाफ व्यापक रूप से कार्रवाई नहीं होने से किसान बेफिक्र होकर ऐसा कर रहे हैं। तहसील भर में गेहूं की कटाई का काम लगभग पूरा होने को है। अब किसान दूसरी फसल की बोवनी करने की तैयारी में है। इसको लेकर खेत खाली कर बखरनी का काम किया जा रहा है। ऐसे में खेतों में खड़ी नरवाई पर जागरूकता के अभाव में किसान आग लगा रहे हैं। इससे मिट्टी के पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं। किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए शासन की तरफ से कोई खास जागरूकता पहल नहीं की गई है। इसका खामियाजा किसान अपने ही खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।



