मध्य प्रदेश

13 करोड़ की फोरलेन सड़क बनी जानलेवा, गड्ढों से भरी सड़क पर हादसे का खतरा

सिलवानी। लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से बनी स्टेट हाईवे-44 की फोरलेन सड़क अब जानलेवा साबित हो रही है। आमापानी कॉलोनी से बजरंग चौराहे तक करीब 2 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि यह सड़क कम और गड्ढों की श्रृंखला अधिक प्रतीत होती है। यह सड़क एमपीआरडीसी विभाग द्वारा केपकॉन प्रोजेक्ट कंपनी से निर्माण कराई गई थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही वर्षों में सड़क की हालत बदतर हो गई है।
स्थानीय नागरिकों ने निर्माण एजेंसी और एमपीआरडीसी विभाग पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों की लागत से बनी यह सड़क 13 साल भी नहीं टिक पाई और अधिकांश हिस्से में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों की वजह से वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भरने से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
नागरिकों का सवाल है — “यह 13 करोड़ की फोरलेन सड़क है या गड्ढों में सड़क स्थानीय निवासियों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग की चुप्पी हैरान करने वाली है।
नगरवासियों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी एजेंसी एवं अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
वहीं नागरिकों का कहना है कि
सड़क एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा एक उदाहरण बनती जा रही है। अगर जल्द मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य नहीं कराया गया, तो यहां दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है, जिसका जिम्मेदार कौन होगा – यह सवाल अब जनता पूछ रही है।
नगरवासियों ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी एजेंसी एवं अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
वहीं नागरिकों का कहना है कि
सड़क एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा एक उदाहरण बनती जा रही है। अगर जल्द मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य नहीं कराया गया, तो यहां दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है, जिसका जिम्मेदार कौन होगा – यह सवाल अब जनता पूछ रही है।

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