वट पूर्णिमा व्रत के दिन होती है बरगद के पेड़ की पूजा एवं महत्व
वट पूर्णिमा व्रत के दिन होती है बरगद के पेड़ की पूजा का व्रत ज्योतिषाचार्य हरिकेश शास्त्री ने बताया महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने के लिए रखती हैं बल्कि पुत्र की प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए भी रखती हैं। ज्येष्ठ अमावस्या में पड़ने वाली वट सावित्री व्रत के बाद ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भी वट सावित्री व्रत किया जाता है। दोनों वट सावित्री की महत्व समान होता है ।
इस साल यह वट पूर्णिमा सावित्री व्रत 14 जून दिन मंगलवार को मनाया जा रहा है। मान्यता हैं बरगद के पेड़ की आयु बहुत लंबी होती है. ऐसा माना जाता है कि बरगद के पेड़ की पूजा करने से पति की आयु बरगद के पेड़ की तरह ही लंबी होती है। महिलाएं बरगद के पेड़ की 7 परिक्रमा लगाती हैं. ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने बरगद के नीचे बैठकर तपस्या की थी और अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी. ऐसा माना जाता है कि बरगद में शिव, ब्रह्मा और विष्णु भगवान का वास होता है. इस व्रत को वट सावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है. वट सावित्री व्रत साल में दो बार आते हैं. मान्यता है कि बरगद के पेड़ की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.वट पूर्णिमा व्रत की पूजा के लिए महिलाएं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके एक टोकरी में सुहाग का सारा सामान इकट्ठा करती हैं। और उस सामान को बरगद के पेड़ के पास लेकर जाते हैं. उसके बाद जल चढ़ाकर पेड़ पर सूत लपेटकर हल्दी, कुमकुम और रोली से चंदन लगाते हैं.उसके बाद बरगद के पेड़ की विधिवत पूजा करे
सत्यवान सावित्री की कथा सुनतें हैं ये व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं उसके बाद आरती करके अपनी सास को बायना देते हैं और सदा सुहागन रहने का और पुत्रवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. बरगद के पेड़ का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ पर सुबह से शाम तक लक्ष्मी वास करती है. वहीं इस पेड़ की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. विज्ञान के अनुसार बरगद के पेड़ से अधिक ऑक्सीजन प्राप्त होती है. ऐसे में यह पेड़ दोनों ही पक्षों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है
वट पूर्णिमा व्रत के दिन होती है बरगद के पेड़ की पूजा, जानें जरूरी तिथि और शुभ मुहूर्त
आज मनाई जाएगी वट पूर्णिमा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि सौभाग्य और संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजन, जानें महत्व वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य हरिकेश शास्त्रीने बताया शुभ मुहूर्त ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 जून सोमवार रात 7 बजकर 38 मिनट पर होगी. ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि का समापन 14 जून, मंगलवार को शाम 05 बजकर 17 मिनट पर होगा.
वट पूर्णिमा 2022 शुभ मुहूर्त है
वट पूर्णिमा उपवास के नियम इस व्रत को रखने वाली महिलाओं को वट पूर्णिमा व्रत के दिन नीले, काले या सफेद कपड़े नहीं पहनने चाहिए.
इस दिन काले, नीले और सफेद रंग की चूड़ियां भी नहीं पहननी चाहिए। वट पूर्णिमा का व्रत जो महिलाएं पहली बार रख रही हैं, उन्हें पूजा के दौरान मायके की सुहाग सामग्रियों का इस्तेमाल करना चाहिए। वट पूर्णिमा व्रत की पूजा के समय महिलाओं को कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है.



