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8 मार्च 2026: जानें कब है रंग पंचमी, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔮 08 मार्च 2026: जानें कब है रंग पंचमी, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि……….
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रंग पंचमी 8 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।* देवी-देवताओं को रंग-गुलाल अर्पित कर पूजा करें। आर्थिक लाभ हेतु मां लक्ष्मी-विष्णु को गुलाब चढ़ाएं। 👉🏼 हिंदू धर्म में फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला होली समाप्त नहीं होता, बल्कि इसके बाद भी रंग और उमंग चैत्र मास के कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि तक बना रहता है. सनातन परंपरा में इस पावन पंचमी तिथि को रंग पंचमी पर्व के रूप में जानते हैं, जिसे देवताओं की होली के नाम से जाना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन तिथि पर देवी-देवता भी पृथ्वी पर होली खेलने के लिए आते हैं. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से मनाया जाने वाला यह महापर्व इस साल कब मनाया जाएगा और इसे मनाने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है आइए आचार्य श्री गोपी राम से इसे विस्तार से जानते हैं. ⚛️ रंग पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त
रंग पंचमी के दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 47 मिनट तक माना गया है। मान्यता है कि इन शुभ मुहूर्तों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। साथ ही, इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता भी है।
📑 रंग पंचमी 2026 की पूजा विधि
रंग पंचमी पर सही विधि से पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। आइए जानते हैं कि रंग पंचमी की पूजा को सही तरीके से कैसे संपन्न किया जाए:
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🤷🏻 पूजा की तैयारी
घर की सफाई: सबसे पहले अपने घर और पूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ करें।* पूजा की सामग्री: फूल, अगरबत्ती, दीये, नारियल, मेवे, फल और मिठाई तैयार करें।*
कपड़े: नए या साफ कपड़े धारण करें।* पवित्रता: पूजा से पहले स्नान कर लें।*
🙇🏻 पूजा की प्रक्रिया
आसन और दीये: पूजा स्थान पर लकड़ी का आसन बिछाएं और चारों ओर दीये जलाएं।* देवताओं का ध्यान: सबसे पहले भगवान गणेश, फिर भगवान राधा-कृष्ण का ध्यान करें। प्रार्थना: भगवान से आशीर्वाद मांगें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।*
आरती: दीये की लपलपाती ज्वाला से भगवान की आरती करें।
प्रसाद: पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।
💮 शुभ मुहूर्त
रंग पंचमी 2026 पर सुबह 6:00 बजे से 12:00 दोपहर तक का समय पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय में पूजा करने से विशेष लाभ मिलते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 01 मिनट से 05 बजकर 50 मिनट तक* विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 17 मिनट तक*
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 23 मिनट से लेकर 06 बजकर 47 मिनट तक* अभिजित मुहूर्त- 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक 💁🏻‍♀️ कैसे करें रंगपंचमी की पूजा?
रंगपंचमी का पुण्यफल पाने के लिए इस पावन तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर तन और मन से पवित्र हो जाएं और उसके बाद लक्ष्मी और नारायण, भगवान श्रीकृष्ण और राधा की विधि-विधान से पूजा करें. रंग पंचमी की पूजा के लिए सबसे पहले ईशान कोण में एक मेज पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर राधा-कृष्ण का चित्र या मूर्ति को रखें. इसके बाद उन्हें गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं और फिर उन्हें वस्त्र, चंदन, रोली, गुलाल, पुष्प, फल, धूप, दीप आदि अर्पित करते हुए उनके मंत्रों का जप या स्तोत्र का पाठ करके मंगलकामना करें. पूजा के अंत में राधा-कृष्ण की आरती अवश्य करें.
🫟 रंग पंचमी का शुभ रंग

होली के पांचवें दिन मनाए जाने वाले रंग पंचमी का पर्व जिसे देव पंचमी ओर कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन यदि भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी को शुभ रंग से जुड़े गुलाल अर्पित किए जाएं तो शीघ्र ही उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है. हिंदू मान्यता के लिए रंग पंचमी पर लाल और गुलाबी रंग के गुलाल को पूजा में अर्पित करना अत्यंत ही शुभ माना गया है
👉🏼 रंग पंचमी के उपाय
इस दिन पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को गुलाब का फूल का अर्पित करें। कुछ समय के बाद इस फूल को लाल कपड़े में चावल और एक सिक्के के साथ बांधकर तिजोरी में रख दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है और धन लाभ के बनते हैं। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
🤷🏻‍♀️ रंग पंचमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंग पंचमी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन देवी-देवता देवलोक से धरती पर आकर रंगों के इस उत्सव में शामिल होते हैं, इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी के साथ रंगों की होली खेली थी। उस आनंदमय दृश्य को देखकर देवी-देवताओं ने उन पर पुष्पों की वर्षा की थी। राधा-कृष्ण की इस होली में ग्वालों और गोपियों ने भी हिस्सा लिया था। इसी आस्था के चलते रंग पंचमी के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष पूजा करते हैं। साथ ही, अबीर-गुलाल उड़ाकर खुशियां मनाते हैं और देवी-देवताओं का स्मरण करते हैं।
📚 पौराणिक कथाएं
रंगपंचमी से जुड़ी कोई एक निश्चित कथा नहीं है, लेकिन दो प्रमुख सबसे ज्यादा प्रचलित हैं:
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श्रीकृष्ण और राधा: द्वापर युग में, श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ होली खेलने के बाद पंचमी के दिन विशेष उत्सव मनाया था। तभी से ब्रज और अन्य क्षेत्रों में पंचमी पर रंग खेलने की परंपरा शुरू हुई।
*_कामदेव का पुनर्जन्म: पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया था, तब रति (कामदेव की पत्नी) की प्रार्थना पर शिवजी ने कामदेव को दोबारा जीवित करने का वरदान दिया। जिस दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ (अशरीरी रूप में), वह पंचमी का दिन था। इसी खुशी में देवताओं ने रंग उत्सव मनाया।
इसके अलावा एक और कथा भी प्रसिद्ध है, जिसमें होलिका दहन और हिरण्यकश्यप की बुराई से जुड़ा हुआ है। इस दिन को बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय के रूप में भी मनाया जाता है, खासकर होली के अगले दिन रंगों के खेल के साथ।

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