धार्मिकमध्य प्रदेश

अधर्म से दूर रह कर धर्म पथ पर अग्रसर होने से जीवन निर्मल होता है- आत्मानंदजी

हमें कषाय और पापों से बचना चाहिए और अपना मन धर्म में लगाना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है- शांतानंद जी महाराज
समवषरण मंडप में किया गया ध्वजारोहण, त्रिदिवसीय वेदी प्रतिष्ठा कार्यक्रम का हुआ आगाज

सिलवानी । व्यक्ति अहम वहम को जीवन का हिस्सा ना बनावे, अहम वहम में रहने वाला व्यक्ति अपना ही अहित करता हैं। व्यक्ति को सदा ही धर्म पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। अधर्म मार्ग पर चलना वाला व्यक्ति ना केवल अपना अहित करता है साथ ही आस पास रहने वालो का भी अहित करता जाता हैं। अधर्म से दूर रह कर धर्म पथ पर अग्रसर होने से जीवन निर्मल होता हैं। मॉ जिनवाणी की नित स्वाध्याय करो, साधना, उपासना करो।
यह उद्गार बाल ब्रम्हचारी आत्मानंदजी ने व्यक्त किए। वह श्री जिनवाणी जी अस्थाप, कलषा रोहण, वेदी प्रतिष्ठा, तिलक महा महोत्सव के समवषरण मंडप में उपस्थित समाजजनों को संबोधित कर रहे थे। वेदी प्रतिष्ठा महा महोत्सव के प्रथम दिन शुक्रवार को बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता की।
श्री तारण तरण दिगंबर जैन चैत्यालय के वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के आयोजन के प्रथम दिवस शुक्रवार को समवशरण मंडप में ध्वजारोहण के साथ त्रिदिवसीय महोत्सव का आगाज हुआ। प्रतिष्ठाचार्यों के मार्गदर्शन में प्रभात फेरी, ध्यान, सामयिक मंत्र जप एवं श्री तारण त्रिवेणी जी का पाठ किया गया। इस आयोजन में श्रद्धालुओं की आस्था इतनी अधिक थी कि कड़कड़ाती ठंड में भी सैकड़ों लोग समवशरण मंडप में धर्म लाभ लेने पहुंचे। इस आयोजन में नगर के साथ प्रदेश व देश से समाज के लोग शामिल होने के लिए आए। समारोह 9 फरवरी तक चलेगा। इसमें विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
समवशरण मंडप में वृहद मंदिर विधि का आयोजन हुआ। इसके बाद सभी लोग मां जिनवाणी को सिर पर धारण कर धर्म ध्वज लहलहा कर, जयकारा लगाते हुए गाजे बाजे के साथ चैत्यालय पहुंचे। जहां पूरे विधि विधान से वेदी जी में मां जिनवाणी को विराजमान किया गया। छत्र चढ़ाए गए। समवषरण मंडप में कार्यक्रम के तहत मंडप परिसर में मुख्य ध्वज को स्थापित करने का सौभाग्य जया किशोरीलाल जैन, सेठ संजयकुमार जैन, ओमप्रकाश जैन, अभिषेक जैन, अंशुल जैन को प्राप्त हुआ। यहां पर विधि विधान के साथ मंत्रोच्चार के बीच ध्वजारोहण किया गया। कार्यक्रम स्थल पर रात्रि में महाआरती तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए ।
हमें कषाय और पापों से बचना चाहिए और अपना मन धर्म में लगाना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है- शांतानंद जी महाराज ने कहा कि
कई जन्मों तक शुभ कर्म करने के बाद हमें मनुष्य पर्याय मिली है। इसे हमें व्यर्थ नहीं गवाना है। उक्त विचार बाल ब्रम्हचारी शांतानंद जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिंदगी बहुत छोटी है, हमारे अरमान बड़े.बड़े हैं। यह संपत्ति, गाड़ी, बंगला जिन्हें आप अपना मान रहे हैं, वे आपके नहीं हैं। हमें कषाय और पापों से बचना चाहिए और अपना मन धर्म में लगाना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है। हमने अनंत बार जन्म लिया लेकिन हमारा अब तक कल्याण नहीं हुआ। यह जीवन कल्याण करने का मौका है। उन्होंने दृष्टांतों के माध्यम से मन को वश में करने की बात कही।

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