खेत की मेढ़ से बच्चे जा रहे स्कूल, ढाई किमी के मार्ग दलदल में तब्दील

पंचायत सचिव बोले कहीं से नहीं मिली स्वीकृति, सरपंच बोले पंचायत के अधीन नहीं
सिलवानी । गांवों के विकास का दावा हर सार्वजनिक मंचों पर सत्ताधारी दल के नेता से लेकर मुख्यमंत्री तक कर रहे हैं, लेकिन मनकापुर से टोला जाने वाला ढाई किमी का मार्ग इन दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। दलदल नूमा रास्ते से बचने के लिए बच्चे और ग्रामीण खेतों की मेढ़ों से आवागमन कर रहे हैं, लेकिन जरा सी चूक इन नोनिहालों के लिए मुसीबत बन सकती है। क्योंकि यदि मेंढ से आवगमन नहीं करते तो इन बच्चों को कीचड़ नुमा दलदल भरे रास्ते से ही आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में बच्चे हाथ में चप्पल, कंधे पर बस्ता रखकर निकलते हैं। पैर फिसल जाए तो पूरे कपड़े गंदे हो जाते हैं, जिससे वह स्कूल की जगह घर जाते हैं। जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने बताया कि पठापोड़ी पंचायत के मनकापुर गांव का ही एक टोला लगभग ढाई किमी दूर स्थित है जहां लगभग 30 परिवारों के ढाई सों से अधिक लोग निवास करते हैं। मनकापुर गांव में स्कूल है जहां जाने के लिए बच्चों को कीचड़ युक्त रास्ते से होकर जाना पड़ता है। जिससे बच्चों को ने केवल परेशानी होती है बल्कि कई बार गिरकर घायल हो जाते हैं, परेशानी तो तब ओर बढ़ जाती है जब गांव में कोई बीमार हो जाए उसे अस्पताल तक लाने ले जाने में लोगों को अपनी जान को खतरे में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
ग्रामीण मनीष ठाकुर ने बताया कि हम सरपंच सचिव और तहसीलादार से लेकर सीएम हेल्पलाईन पर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब परेशानी को अपना नसीब मानकर चुप बैठ गए हैं। पंचायत ने तो न तो इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा न ही इसे बनवाने के लिए प्रयास किए। परिणाम स्वरुप पूरे ग्रामीण इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव सुरेश रघुवंशी का कहना है कि ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन पंचायत के पास इतनी लंबी सड़क बनाने के लिए बजट नहीं है। हमने पहले जिला पंचायत प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। फिलहाल बेकल्पिक रुप से मार्ग पर बजरी डलवा देंगे ताकि कीचड़ न हो।



