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आईसीएआर की भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ केवीके के कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। 17 नबम्बर को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ( आई.सी.ए.आर.) के अतिरिक्त अन्य होस्ट संगठनों के प्रशासनिक नियंत्रण वाले कृषि विज्ञान केंद्रों ( के.वी.के.) के कर्मचारियों ने “कलम बंद हड़ताल एवं प्रदर्शन” किया। उनकी मुख्य मांग है – परौदा उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप “वन नेशन, वन केवीके” नीति का कार्यान्वयन तथा आई.सी.ए.आर. द्वारा किए जा रहे भेदभाव का अंत।
यह आंदोलन गैर आई.सी.ए.आर. केवीके कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का परिणाम है। इन कर्मचारियों का आरोप है कि आई.सी.ए.आर. के अधीन केवीके के मुकाबले उन्हें वेतनमान, पदोन्नति और सेवा शर्तों में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है । आई.सी.ए.आर.,जो देश में कृषि अनुसंधान का शीर्ष संगठन है, पर आरोप है कि उसने अपने कर्मचारियों को तरजीह देते हुए गैर-आई.सी.ए.आर. केवीके कर्मचारियों की उपेक्षा की है । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद उन्हें कम वेतन, पदोन्नति के अवसरों से वंचित किया जा रहा है तथा आई.सी.ए.आर. द्वारा निराशाजनक और विरोधाभासी पत्र जारी कर कार्य वातावरण को प्रभावित किया जा रहा है ।
आन्दोलन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसका आह्वान फोरम ऑफ केवीके एंड ए.आई.सी.आर.पी. तथा के.वी.के. एम्प्लाइज़ वेलफेयर एसोसिएशन म.प्र. ( के.वा. म.प्र.) द्वारा किया गया था । इस दौरान कर्मचारी अपने-अपने केवीके केंद्रों पर एकत्र हुए, बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाज़ी की और आई.सी.ए.आर. की भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ विरोध जताया ।
50 वर्षों की सेवा यात्रा – केवीके की धरोहर
1974 में स्थापना के बाद से कृषि विज्ञान केंद्र भारत की कृषि प्रसार प्रणाली की रीढ़ बने हुए हैं । किसानों के खेतों तक वैज्ञानिक शोध को पहुँचाना, युवाओं को प्रशिक्षण देना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, केवीके का मुख्य कार्य रहा है । केवल 9% केवीके सीधे आई.सी.ए.आर. द्वारा संचालित हैं, जबकि 91% राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, एनजीओ, राज्य सरकारों और अन्य संस्थानों द्वारा होस्ट किए जाते हैं ।
समान कार्य, असमान वेतन – प्रमुख मुद्दे
वेतन व भत्ते: 20 अगस्त 2024 के आई.सी.ए.आर.आदेश को स्थगित किए जाने के बावजूद पूर्ण भत्ते एवं पी.एफ./एन.पी.एस. अंशदान बहाल नहीं हुए ।
पदोन्नति: सी.ए.एस. प्रमोशन नीति आई.सी.ए.आर. कर्मचारियों को उपलब्ध है, पर गैर-आई.सी.ए.आर. केवीके कर्मचारियों ( जैसे बी.सी.के.वी., बी.ए.यू.,गडवासू, ए.ए.यू. आदि ) को नहीं ।
सेवानिवृत्ति लाभ: पेंशन, ग्रेच्युटी और समान सेवानिवृत्ति आयु से गैर-आई.सी.ए.आर. कर्मचारी वंचित।
वेतन में विलंब: कई राज्यों में 6–9 माह तक वेतन लंबित रहता है।
प्रशासनिक टकराव: होस्ट संस्थानों द्वारा पदोन्नति देने पर आई.सी.ए.आर. वेतन रोक देता है । यह अनुच्छेद 14 ( समानता का अधिकार ) और अनुच्छेद 38 व 39 (सामाजिक एवं आर्थिक न्याय) का उल्लंघन है।
आगे की राह – वन नेशन, वन केवीके, वन पॉलिसी
फोरम ने परौदा समिति की सिफारिशों को तुरंत लागू करने, सभी केवीके में समान वेतन, पदोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभ सुनिश्चित करने की माँग की।
फोरम ने स्पष्ट किया है कि अब किसी प्रकार का मौखिक अथवा टेलीफोनिक आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा । केवल आई.सी.ए.आर. द्वारा जारी औपचारिक लिखित आदेश ही मान्य होंगे।
फोरम तथा केवा म.प्र. का अंतिम रुख
यह बहिष्कार राष्ट्रविरोधी नहीं, बल्कि न्याय की सामूहिक पुकार है। पिछले 50 वर्षों से किसानों की सेवा कर रहे केवीके कर्मचारियों को न्याय और समानता मिलना चाहिए। अतः भारत सरकार एवं आई.सी.ए.आर. का दायित्व है कि “वन नेशन, वन केवीके, वन पॉलिसी” लागू कर कर्मचारियों का विश्वास और गरिमा बहाल करें।
फोरम ने आई.सी.ए.आर. और भारत सरकार से तात्कालिक हस्तक्षेप की अपील की है, अन्यथा आगे और बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
कर्मचारियों की चिंताएं कई बार औपचारिक रूप से आई.सी.ए.आर. अधिकारियों के समक्ष रखी जा चुकी हैं और दिसम्बर 2023 से “एक के.वी.के., एक पॉलिसी” अपनाने हेतु सुधारात्मक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है; परन्तु आई.सी.ए.आर. प्राधिकारियों की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
केवीके जिले-स्तर पर एकमात्र प्रौद्योगिकी-आधारित संस्थान हैं, जिनमें कृषि एवं सम्बद्ध विषयों के विभिन्न अनुशासनों के वैज्ञानिक सम्मिलित रहते हैं । ये नई तकनीकों का प्रसार करते हैं और सरकार व किसानों के बीच सेतु का कार्य करते हैं । केवीके ने कृषि प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, किसान समुदायों में नवोन्मेष को बढ़ावा देने, उत्पादकता सुधारने, स्थिरता सुनिश्चित करने और किसानों की आजीविका उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । इस प्रकार केवीके राज्य तथा देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान और विशेषकर कृषि के विकास के लिए सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं । अतः केवीके कर्मचारियों की आकांक्षाओं की पूर्ति के परिणामस्वरूप केवीके अधिक जीवंत होंगे और कर्मचारियों का कार्योन्माद बढ़ेगा। इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि केन्द्र एवं राज्य सरकारें हस्तक्षेप कर कर्मचारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का निवारण करें, ताकि किसान समुदाय और समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सके।
फोरम आशावान है कि केन्द्र तथा राज्य सरकारों के हस्तक्षेप से मेहनती केवीके कर्मचारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों का न्‍यायसंगत समाधान होगा और उन्हें उनके अधिकार व वह गरिमा मिलेगी जिसकी वे अपेक्षा रखते हैं।

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