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आमलकी एकादशी व्रत कथा, मिलेगा 1000 गायों के दान का पुण्य! जानें मुहूर्त, पारण कब करें

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
“ॐ नम:शिवाय”
🔮 27 फरवरी 2026 आज सर्वार्थ सिद्धि योग में पढ़ें आमलकी एकादशी व्रत कथा, मिलेगा 1000 गायों के दान का पुण्य! जानें मुहूर्त, पारण कब करें
🔘 HEADLINES
▪️ फाल्गुन में आमलकी एकादशी व्रत किया जाता है।
▪️ इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा होती है।* ▪️ पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। 🌳 आमलकी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी, रंग भरी एकादशी या आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले का विशेष महत्व होता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना, आंवले का सेवन करना और आंवले का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस एकादशी का संबंध आंवला वृक्ष से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में आंवले को पवित्र, औषधीय और दिव्य गुणों से युक्त बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करने से समस्त पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन विधि-विधान से विष्णु जी के साथ आंवले की पूजा करने से शुभ फल मिलते हैं। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से आमलकी एकादशी की पूजा विधि के बारे में। ⚛️ आमलकी एकादशी का व्रत शुभ मुहूर्त
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस बार यह व्रत 27 फरवरी 2026 शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह होगा। आमलकी एकादशी तिथि का प्रारंभ: 27 फरवरी 2026 को रात्रि 12:33 बजे होगा और इसका समापन 27 फरवरी 2025 को रात्रि 10:32 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार 27 मार्च को व्रत रखा जाएगा।
▶️ एकादशी तिथि प्रारम्भ- 27 फरवरी 2026 को 12:33 एएम बजे
▶️ एकादशी तिथि समाप्त- 27 फरवरी 2026 को 10:32 पीएम बजे
▶️ आमलकी एकादशी पारण समय: 28 फरवरी 2026 को सुबह 6:47 बजे से सुबह 9:06 बजे तक
🙇🏻 आमलकी एकादशी पूजा विधि पद्म पुराण से
पद्म पुराण के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
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अब भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करके मन में व्रत का संकल्प लें।* इसके बाद मंदिर की अच्छे से सफाई करके एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।*
अब एक कलश में पानी भरकर उसमें पंच पल्लव रखें और अंदर जल में सुपारी, जायफल, अक्षत, हल्दी आदि चीजें डाल दें।* चौकी पर भगवान विष्णु माता लक्ष्मी और भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। स्थापना से पहले सभी को स्नान कराकर वस्त्र जरुर अर्पित कर दें।*
इसके बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें और विष्णु भगवान को अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती को अक्षत और बेलपत्र अर्पित करें।* अब आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद आरती उतारें।*
अब आंवले के पेड़ के पास जाएं और आसपास अच्छे से सफाई कर दें। इसके बाद आंवले के पेड़ की कम से कम 7 या 108 बार परिक्रमा करें।* अब आंवले के पेड़ को अर्घ्य दें नमस्ते देवदेवेश जामदग्न्य नमोञउस्तु ते। गृहाणाध्यमिम॑ दत्तमामलक्या युते हरे॥*
इसके बाद घर आकर सभी को प्रसाद दें।* 🍱 एकादशी पर क्या खाएं और क्या न खाएं?
👉🏼 क्या न खाएं: एकादशी के दिन चावल (Rice) का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहें।
👉🏼 क्या खाएं: आप फल, कुट्टू का आटा, साबूदाना, दूध और सूखे मेवों का सेवन कर सकते हैं। चूंकि यह ‘आंवला एकादशी’ है, इसलिए इस दिन आंवले का सेवन करना स्वास्थ्य और धर्म दोनों के लिए श्रेष्ठ है।
🤷🏻‍♀️ आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी का महत्व प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में निहित है। आइए जानते हैं कि यह दिन इतना गहरा महत्व क्यों रखता है
यह पापों को दूर करता है
ब्रह्मांड पुराण कहता है कि इस एकादशी का व्रत करने से कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह दिन आध्यात्मिक मार्ग को पुनः स्थापित करने और नई शुरुआत करने के लिए सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक है
आंवला का पेड़ पवित्र होता है
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आंवला वृक्ष को भगवान विष्णु का साक्षात रूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन इसकी पूजा करने से सभी पवित्र स्थानों के दर्शन करने का पुण्य प्राप्त होता है।
आंवला फल स्वयं भी पवित्रता और जीवन शक्ति का प्रतीक है।
यह मोक्ष प्राप्त करने में सहायक है।
इस एकादशी का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है। ब्रह्मांड पुराण कहता है कि सच्चे मन से आमलकी एकादशी का पालन करना इस मोक्ष के निकट पहुंचने का सबसे शक्तिशाली तरीका है।
ऐसा कहा जाता है कि इस एक व्रत से अर्जित होने वाला पुण्य, हजारों भव्य धार्मिक अनुष्ठानों को करने से भी कहीं अधिक होता है।
यह समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य प्रदान करता है।
ऐसा माना जाता है कि जो लोग श्रद्धापूर्वक आमलकी एकादशी व्रत का पालन करते हैं, उन्हें धन, अच्छे स्वास्थ्य और सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
*_होली से ठीक पहले पड़ने वाली एकादशी ताजगी और समृद्धि का प्रतीक है।
📚 *आमलकी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा*
प्राचीन समय में ‘वैदिश’ नाम का एक भव्य नगर था, जहां के राजा चैत्ररथ बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे। उस नगर में कोई भी गरीब या दुखी नहीं था क्योंकि वहां की पूरी प्रजा नियम से एकादशी का व्रत करती थी।
एक बार आमलकी एकादशी के दिन राजा और प्रजा सभी मंदिर में आंवले के वृक्ष की पूजा कर रहे थे। तभी वहां एक शिकारी आया। वह बहुत भूखा था और शिकार की तलाश में भटक रहा था। उसने देखा कि लोग पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं। वह शिकारी भी चुपचाप एक कोने में बैठकर कथा सुनने लगा और पूरी रात जागता रहा।
अगले दिन शिकारी अपने घर गया और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। लेकिन अनजाने में ही सही, उसने आमलकी एकादशी का व्रत और जागरण किया था। इसके पुण्य से उसका पुनर्जन्म एक प्रतापी राजा ‘वसूरथ’ के रूप में हुआ।
एक बार जब राजा वसूरथ जंगल में रास्ता भटक गए, तो कुछ डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया। डाकू जैसे ही शस्त्र चलाने वाले थे, राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति (देवी) प्रकट हुईं और उन्होंने सभी डाकुओं का वध कर दिया। जब राजा की आंख खुली, तो उन्होंने पूछा कि “मेरी रक्षा किसने की?” तब आकाशवाणी हुई कि “हे राजन! यह तुम्हारे पिछले जन्म के आमलकी एकादशी व्रत का फल है।”
तात्पर्य: भगवान विष्णु की भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती, चाहे वह अनजाने में ही क्यों न की गई हो।

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