मध्य प्रदेशव्यापार

लोगो ने शासन से मांगे पारम्परिक पुश्तैनी रोजगार, बैकों से बिना ब्याज ऋण की मांग

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । मुफ्त मे बांटे जाने वाले अनाज व रूपयो के स्थान पर यदि शासन रोजगारोन्मुखी योजना पर ध्यान केद्रित करे तो हमारे देश से बेकारी बेरोजगारी का कलंक हमेशा हमेशा के लिये मिट जावेगा, मोवाइल व कम्प्यूटर क्रांति के कारण आये बदलाव से अचानक अनेको स्थापित रोजगारो व नौकरियो पर विपरीत असर पडा है जिससे बेरोजगारी बेकारी तेजी से बढी है। निशुल्क खाद्यान वितरण से गरीब व मध्यम वर्ग का तबका इससे कुछ हद तक सम्हल गया लेकिन बेरोजगारी बेकारी यथावत बनी रही इससे व्यक्ति व युवा शक्ति इससे अवसाद मे बना रहा, शासन प्रशासन से लोगो के स्थापित पुरातन जातिगत व्यवसायो जैसे लकडी का काम बढ़ई गिरी, मछली सिघाडे के लिये केवट रैकवार मछुआरे, तेली, पंसारी, सुनार, सोनी, लुहार, चौरसियो का पान बरेजा, तमेरे, कुम्हार, किसानों को कृषि, अहीर यादव को दूध गाय भैस पालन, खबास सेन को सेलून, चर्मकार, बुनकर, नामदेव दरजी, खिलोना निर्माण, किराना, इलैक्टिक, इलैक्टृनिक्स हाथकरघा, साइकिल रिपेयर, बाइक सुधारक, पंखा मेकेनिक, मेडीकल, देशी वैध, मोटर बाइडिग, रस्सी बनाना, मटका गमला का व्यवसाय आदि जिसका जो व्यवसाय हो उसे बिना ब्याज का सुगम बैक ऋण दिया जावे तथा उसे हर तरह से भौतिक मदद देकर खडा किया जावे इस तरह की मांग शासन से नागरिको व्दारा की गई है शासन इस पर शीघ्र अमल करे जिससे रोजगार स्वरोजगार के व्दार खुल सके।

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