कागजों पर पौधे जमीन पर तबेले, पड़रिया खुर्द का पौधारोपण घोटाला

लाखों की शासकीय राशि हड़पी प्रशासन मौन स्वीकृति उजागर
पौधारोपण के नाम पर लाखों रुपए की राशि डकार गए तत्कालीन वित्तीय प्रभारी गुलाब कुशवाहा
सिलवानी । मध्यप्रदेश की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला उजागर हुआ है। सिलवानी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द और इसके ग्रामों में पौधारोपण के नाम पर लाखों रुपए की राशि का गबन किया गया। पंचायत के रिकॉर्ड में सैकड़ों पौधों का रोपण दर्शाया गया है लेकिन हकीकत यह है कि जिन स्थानों को पौधारोपण स्थल बताया गया है वहां आज भैंसों के तबेले बने हुए हैं।
*ग्रामीण बोले पौधारोपण हुआ ही नहीं*
ग्रामीण बबलू पटेल, मातेंद्र पटेल, राजेंद्र पटेल सहित कई लोगों ने खुलासा किया कि पंचायत के तत्कालीन वित्तीय प्रभारी एवं रोजगार सहायक गुलाब कुशवाहा और तत्कालीन उपयंत्री कमलेंद्र धाकड़ ने मिलीभगत कर कागजों में ही पौधारोपण दिखाकर राशि आहरित कर ली। इतना ही नहीं उन्हीं अधिकारियों ने स्वयं कार्यों का मूल्यांकन कर फर्जीवाड़े को और मजबूत बना दिया। ग्रामीणों ने साफ कहा पौधारोपण कभी हुआ ही नहीं सिर्फ कागजों में आंकड़े दिखाकर लाखों रुपए हड़प लिए गए।
*खेल मैदान और अन्य कार्यों में भी गड़बड़ी*
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह घोटाला केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है। पंचायत के खेल मैदान सहित कई अन्य विकास कार्यों में भी करोड़ों रुपए खर्च दिखाए गए लेकिन जमीन पर कोई काम नजर नहीं आता।
*शिकायतें हुईं लेकिन प्रशासन ने आंख मूंद ली*
ग्रामीणों का कहना है कि इस घोटाले की शिकायत तहसील स्तर से लेकर कलेक्टर तक कई बार की गई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई जांच शुरू नहीं की। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के भ्रष्टाचार को दबाने के लिए उच्च स्तर पर संरक्षण प्राप्त है।
ग्रामीणों की चेतावनी जांच न हुई तो करेंगे आंदोलन
ग्रामीणों ने कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से मांग की है कि पड़रिया खुर्द पंचायत और इसके ग्रामों में हुए पौधारोपण एवं अन्य विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
इस संबंध में नीलम रैकवार सीईओ जनपद पंचायत सिलवानी का कहना है कि उपयंत्री हड़ताल पर जाने के कारण जांच में विलंब हुआ है। दूसरी जांच टीम गठित कर एक हफ्ते में पंचायत की जांच हो जायेगी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नियम अनुसार कार्रवाई की जायेगी ।



