ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 10 नवम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 10 नवम्बर 2025
*महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। ☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 12:08 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 06:48 PM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है, जबकि राशि स्वामी बुध है और इसकी देवी अदिति हैं। बृहस्पति ज्ञान, आशा और समृद्धि का प्रतीक है।
⚜️ योग – साध्य योग 12:04 PM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : गर – 12:55 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 12:07 ए एम, नवम्बर 11 तक विष्टि
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:19:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:55 ए एम से 05:47 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:21 ए एम से 06:40 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:27 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:30 पी एम से 05:56 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:30 पी एम से 06:49 पी एम
💧 अमृत काल : 04:31 पी एम से 06:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 11
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:48 पी एम से 06:41 ए एम, नवम्बर 11
❄️ रवि योग : 06:48 पी एम से 06:41 ए एम, नवम्बर 11
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – पुष्य योग/ रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ ध्रुव प्रताप सिंह जयन्ती, राष्ट्रीय नागरिक गौरव दिवस, भारतीय अभिनेता आशुतोष रामनारायण नीखरा जन्म दिवस, संयुक्त राज्य मरीन कोर जन्म दिवस, विश्व टीकाकरण दिवस, राष्ट्रीय नागरिक गौरव दिवस, राष्ट्रीय भूल-भुलैया दिवस, राजनीतिज्ञ सुरेंद्रनाथ बनर्जी जन्म दिवस, विश्व सार्वजनिक परिवहन दिवस, विश्व विज्ञान दिवस, विजयदान देथा पुण्य तिथि ✍🏼 *तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗼 Vastu tips 🛕
घर में कबूतर का घोंसला लगाना आमतौर पर अशुभ समझा जाता है। लोग मानते हैं कि अगर कबूतर ने घर की बालकनी या छत पर घोंसला बना लिया है तो वह अपने साथ दुर्भाग्य लेकर आय़ा है। ऐसे में लोग उसे तुरंत हटा देते हैं क्योंकि उन्हें परेशानी व आर्थिंक तंगी से दो-चार होने का भय होता है।
*इस कई लोगों का मानना है कि कबूतर मां लक्ष्मी की सवारी है तो इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही सौभाग्य भी साथ आता है ऐसे में कबूतर का घोंसला घर से नहीं हटाना चाहिए। *कबूतर को लेकर अन्य कई संकेत कबूतर को लेकर अन्य कई तरह के संकेत हैं कि अगर वह बाहर जाते समय आपके दाईं ओर से अचानक उड़ जाए तो यह आपके भाई और परिजनों के लिए शुभ नहीं होता।
*आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक, अगर कबूतर दिन के प्रथम पहर पर बोल दे तो इसका मतलब है कि लाभ मिलेगा। अगर तीसरे पहर पर गुटर गूं कर दे तो विवाह या प्रेम संबंधी लाभ हो सकता है। पर अगर चौथे प्रहर में गुटर गूं करने से कामों में हानि पहुंच सकती है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ चिंता/चिड़चिड़ेपन का कारण- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपके शरीर में विटामिन बी12 की कमी है, तो आपको जरूरत से ज्यादा चिंता या फिर चिड़चिड़ापन या फिर मूड स्विंग्स, इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अगर आपने विटामिन बी12 की कमी को समय रहते दूर नहीं किया, तो आप स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन जैसी सीरियस मानसिक बीमारियों की चपेट में भी आ सकते हैं। *गौर करने वाले लक्षण- विटामिन बी12 की कमी भूलने की समस्या का कारण भी बन सकती है। इस जरूरी विटामिन की कमी के दौरान आपकी मेंटल हेल्थ के साथ-साथ आपकी फिजिकल हेल्थ भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द/ऐंठन, हाथ-पैर में झुनझुनी महसूस होना, इस तरह के लक्षण भी विटामिन बी12 की कमी की तरफ इशारा कर सकते हैं।
🍃 *आरोग्य संजीवनी* 🍁
*ज्यादा नमक/चीनी- अगर आप जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन करते हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जो लोग ज्यादा मात्रा में नमक कंज्यूम करते हैं, उनकी किडनी के डैमेज होने की संभावना बढ़ जाती है। जरूरत से ज्यादा चीनी खाने से भी आपकी किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए लिमिट में रहकर ही नमक/चीनी का सेवन करना चाहिए। *धूम्रपान/शराब पीने की आदत- जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनकी न केवल किडनी डैमेज हो सकती है बल्कि उनकी ओवरऑल हेल्थ भी बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा शराब पीने की आदत भी किडनी को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आप किडनी से जुड़ी समस्याओं से बचे रहना चाहते हैं, तो आपको इस तरह की बुरी आदतों से तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए वरना बाद में आपको पछताना पड़ सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
🔥चौदह प्रकार के लोग जो मृततुल्य हैं।* राम-रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद ने रावण से कहा- तू तो मरा हुआ है, मरे हुए को मारने से क्या फायदा? रावण बोला– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे?
*
अंगद बोले, सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते – साँस तो लुहार की धौंकनी भी लेती है!
*तब अंगद ने मृत्यु के 14 प्रकार बताए-
*कामवश: जो व्यक्ति अत्यंत भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, जो संसार के भोगों में उलझा हुआ हो, वह मृत समान है। जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं और जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है। वह अध्यात्म का सेवन नहीं करता है, सदैव वासना में लीन रहता है। *वाममार्गी: जो व्यक्ति पूरी दुनिया से उल्टा चले, जो संसार की हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो, सत्य वैज्ञानिक नियमों, परंपराओं, धर्म एवं लोक व्यवहार के खिलाफ चलता हो, वह वाम मार्गी कहलाता है। ऐसे काम करने वाले लोग मृत समान माने गए हैं।
*कंजूस: अति कंजूस व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जो व्यक्ति धर्म कार्य करने में, आर्थिक रूप से किसी कल्याणकारी कार्य में हिस्सा लेने में हिचकता हो, दान एवं यज्ञ करने से बचता हो, ऐसा आदमी भी मृतक समान ही है। *अति दरिद्र: गरीबी सबसे बड़ा श्राप है। जो व्यक्ति धन, आत्म-विश्वास, सम्मान और साहस से हीन हो, वह भी मृत ही है। अत्यंत दरिद्र भी मरा हुआ है। गरीब आदमी को दुत्कारना नहीं चाहिए, क्योंकि वह पहले ही मरा हुआ होता है। दरिद्र मानकर उनकी मदद करनी चाहिए। उनके प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए।
*विमूढ़: अत्यंत मूढ़ यानी मूर्ख व्यक्ति भी मरा हुआ ही होता है। जिसके पास बुद्धि-विवेक न हो, जो खुद निर्णय न ले सके, यानि हर काम को समझने या निर्णय लेने में किसी अन्य पर आश्रित हो, ऐसा व्यक्ति भी जीवित होते हुए मृतक समान ही है, मूढ़ अध्यात्म को नहीं समझता। *अजसि: जिस व्यक्ति को संसार में बदनामी मिली हुई है, वह भी मरा हुआ है। जो घर-परिवार, कुटुंब-समाज, नगर-राष्ट्र, किसी भी ईकाई में सम्मान नहीं पाता, वह व्यक्ति भी मृत समान ही होता है।
*सदा रोगवश: जो व्यक्ति निरंतर रोगी रहता है, वह भी मरा हुआ है। स्वस्थ शरीर के अभाव में मन विचलित रहता है। नकारात्मकता हावी हो जाती है। व्यक्ति मृत्यु की कामना में लग जाता है। जीवित होते हुए भी रोगी व्यक्ति जीवन के आनंद से वंचित रह जाता है। *अति बूढ़ा: अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृत समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है। शरीर और बुद्धि, दोनों अक्षम हो जाते हैं। ऐसे में कई बार वह स्वयं और उसके परिजन ही उसकी मृत्यु की कामना करने लगते हैं, ताकि उसे इन कष्टों से मुक्ति मिल सके।
*सतत क्रोधी: २४ घंटे क्रोध में रहने वाला व्यक्ति भी मृतक समान ही है। ऐसा व्यक्ति हर छोटी-बड़ी बात पर क्रोध करता है। क्रोध के कारण मन और बुद्धि दोनों ही उसके नियंत्रण से बाहर होते हैं। जिस व्यक्ति का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण न हो, वह जीवित होकर भी जीवित नहीं माना जाता। पूर्व जन्म के संस्कार लेकर यह जीव क्रोधी होता है। क्रोधी अनेक जीवों का घात करता है और नरकगामी होता है। *अघ खानी: जो व्यक्ति पाप कर्मों से अर्जित धन से अपना और परिवार का पालन-पोषण करता है, वह व्यक्ति भी मृत समान ही है। उसके साथ रहने वाले लोग भी उसी के समान हो जाते हैं। हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके ही धन प्राप्त करना चाहिए। पाप की कमाई पाप में ही जाती है और पाप की कमाई से नीच गोत्र, निगोद की प्राप्ति होती है।
*तनु पोषक: ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से आत्म संतुष्टि और खुद के स्वार्थों के लिए ही जीता है, संसार के किसी अन्य प्राणी के लिए उसके मन में कोई संवेदना न हो, ऐसा व्यक्ति भी मृतक समान ही है। जो लोग खाने-पीने में, वाहनों में स्थान के लिए, हर बात में सिर्फ यही सोचते हैं कि सारी चीजें पहले हमें ही मिल जाएं, बाकी किसी अन्य को मिलें न मिलें, वे मृत समान होते हैं। ऐसे लोग समाज और राष्ट्र के लिए अनुपयोगी होते हैं। शरीर को अपना मानकर उसमें रत रहना मूर्खता है, क्योंकि यह शरीर विनाशी है, नष्ट होने वाला है। *निंदक: अकारण निंदा करने वाला व्यक्ति भी मरा हुआ होता है। जिसे दूसरों में सिर्फ कमियाँ ही नजर आती हैं, जो व्यक्ति किसी के अच्छे काम की भी आलोचना करने से नहीं चूकता है, ऐसा व्यक्ति जो किसी के पास भी बैठे, तो सिर्फ किसी न किसी की बुराई ही करे, वह व्यक्ति भी मृत समान होता है। परनिंदा करने से नीच गोत्र का बंध होता है।
*_परमात्म विमुख: जो व्यक्ति ईश्वर यानि परमात्मा का विरोधी है, वह भी मृत समान है। जो व्यक्ति यह सोच लेता है कि कोई परमतत्व है ही नहीं; हम जो करते हैं, वही होता है, संसार हम ही चला रहे हैं, जो परमशक्ति में आस्था नहीं रखता, ऐसा व्यक्ति भी मृत माना जाता है।
श्रुति संत विरोधी: जो वेदादि सत्य सत्य आर्ष शास्त्रों एवं संत पुरुषों विरोधी है, वह भी मृत समान है। श्रुत और संत, समाज में अनाचार पर नियंत्रण (ब्रेक) का काम करते हैं। अगर गाड़ी में ब्रेक न हो, तो कहीं भी गिरकर एक्सीडेंट हो सकता है। वैसे ही समाज को संतों की जरूरत होती है, वरना समाज में अनाचार पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा।
अतः मनुष्य को उपरोक्त चौदह दुर्गुणों से यथासंभव दूर रहकर स्वयं को मृतक समान जीवित रहने से बचाना चाहिए।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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