मध्य प्रदेश

RTI कार्यकर्ता को स्कूल संचालको ने किया मारने का प्रयास, एफआईआर दर्ज

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेंदूखेड़ा । लोक सूचना अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 मे सम्पूर्ण देश मे लागू किया गया था इस अधिनियम मे सरकारी या निजी सस्थान सभी आते है ओर अधिनियम के तहत जो जानकारी है उसे बिना छिपाए नियमानुसार आवेदको को देनी पड़ती है, मगर कुछ सस्थाएं नियम विरुद्ध अपने सस्थान चलाती है इसलिए वे इस अधिनियम के तहत जानकारी देने से कतराती है। निजी सस्थाओ पर जानकारी देने का शासकीय दबाब बनता है तो संस्था प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता पर जान लेबा हमला, गाली गलोच या जान से मारने की धमकी तक देते है। मगर देश के कानून का पॉलन इन निजी सस्थाओ से नहीं किया जाता है ऐसा ही एक मामला तेंदूखेड़ा के वार्ड नंबर 12 के निवासी लक्ष्मण रैकवार के साथ हुआ, इनके द्वारा दिनांक 1 सितंबर 23 को विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यलय मे लोक सूचना अधिकार 2005 की धारा 6(1)के तहत एक आवेदन लगाया था जिसमे नगर मे संचालित हो रहे है दो निजी ज्ञानदीप विद्या विहार हाइस्कूल एवं वैदेही हाई स्कूल की जानकारी मांगी गई थी जिसमे स्कूल की मान्यता, स्कूल के शिक्षकों की जानकारी, स्कूल का खसरा नक्शा की जानकारी मुख्य थी दोनों स्कूलों की जानकारी समय पर नहीं मिलने से जिला शिक्षा अधिकारी दमोह के समक्ष जनवरी 24 मे सुनवाई हुई। जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के बाद भी जानकारी स्कूलों के द्वारा बीईओ कार्यालय मे जमा नहीं कराई गई थी जिसमे स्कूलों पर जानकारी देने के लिए बार बार रिमांडर जा रहे थे जिससे वैदेही स्कूल के संचालक बिखला गए ओर आरटीआई कार्यकर्ता लक्ष्मण रैकवार को तारादेही तिगड्डे के पास अकेले खडे होने के कारण उन्हें लाठी डंडो से मारने की कोशिश की गई जैसे तैसे आवेदक थाने पहुंचा जहाँ भगवती मानव कल्याण संग़ठन के ब्लाक अध्यक्ष के साथ थाने मे रिपोर्ट दर्ज करवाई। लक्ष्मण रैकवार ने बताया की ज़ब शाम को करीब 6.30 सिद्धार्थ कम्प्यूटर के पास खड़ा था कि विनोद सरेया एक लाठी लेकर मुझे मारने को दौड़ा तभी प्रमोद सरेया ने कहा की लाठी से गोली से मारेंगे इसे तभी मनोज सरेया भी लाठी ढूढ़ने लगा मुझे मारने के लिए फिर मे तत्काल थाने पहुंचा जहाँ पर मेने तीनो के विरुद्ध अपराध करामनक 24/2024 मे धारा 504 के तहत मामला दर्ज करवाया। आवेदक ने बताया की स्कूलसंचालन मे वैदेही हाइस्कूल के द्वारा लापरवाही की जाती रही है उनका स्कूल सरकारी गाइड लाइन को पूरा नहीं करता है इसलिए मेने आवेदन लगाया था जो स्कूल के संचालको द्वारा नहीं दी जा रही है।

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