निर्दयी मां : नवजात को कचरा गाड़ी में फेंका, मिली तो बेटी से मुंह फेरा

ममता को कलंकित करने वाली कुमाता पुलिस गिरफ्त में
जन्म के तत्काल बाद बेटी को फेंका था कचरा गाड़ी में
पुलिस की सक्रियता और सूचना तंत्र से 36 घंटे में खुलासा
बेटी को अपनाने से किया इंकार
ब्यूरो चीफ : मधुर राय
रायसेन । शुक्रवार 29 अगस्त की सुबह मां ने जन्म के तत्काल बाद अपनी नवजात बेटी को एक टी-शर्ट में लपेटकर तगाड़ी में रखकर घर के सामने से निकलने वाली कचरा गाड़ी में फेंक दिया था। घटना की जानकारी लगते ही नगर में सनसनी फैल गई थी इस घटना के संबंध में नगर में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त थी। वहीं सुरक्षित बची मासूम अभी अस्पताल में ही है।
पुलिस की सक्रियता से हुई गिरफ्तार –
पुलिस अधीक्षक पंकज पाण्डे एवं एसडीओपी कुंवरसिंह मुकाती ने टी आई कपिल गुप्ता के नेतृत्व में टीम गठित कर तलाश प्रारम्भ की। पुलिस की सक्रियता सूचना तंत्र और जहां तक की पुलिस के जवानों के द्वारा संदेही आरोपी के मकान एवं आसपास में सादी वर्दी में सर्व कर्मचारी बनकर संदेही के घर में जांच की। और पुलिस ने घटना के 36 घंटे के अंदर ही शनिवार की शाम को आरोपी निर्दयी मां को अभिरक्षा में ले लिया गया।
क्या था मामला – घटनाक्रम के संबंध में थाना प्रभारी कपिल गुप्ता ने बताया कि एक वार्ड की महिला अपने पति से पिछले 10 वर्ष से अलग मां-बाप के साथ रह रही है। उसकी एक और 10 वर्ष की बालिका है। महिला का पति से अलग रहते हुए किसी से प्रेम प्रसंग हुआ और इस दौरान वह महिला दूसरी बार गर्भवती हो गई। महिला को जब शुक्रवार सुबह प्रसव हुआ तो उसने एक मासूम बालिका को जन्म दिया उसी समय कचरा गाड़ी का आना हुआ तो उसने तुरंत स्वयं ही बच्ची को कचरा गाड़ी में फेंक दिया। बाद में कचरा गाड़ी के स्टाफ एवं मोहल्ले वासियों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो उसे अस्पताल पहुंचाया गया। तभी से पुलिस की टीम सक्रिय हुई एवं मुखबिरी से प्राप्त सूचना के अनुसार इस वार्ड में पुलिस की टीम सादी वर्दी में एएनएम कार्यकर्ताओं के साथ आसपास के मकानों का सर्वे करने लगी।
टीआई कपिल गुप्ता की सजगता एवं एक एएनएम की सूझबूझ के चलते जैसे ही यह टीम आरोपी महिला के घर में पहुंची उन्होंने उसके घर जमीन पर खून के धब्बे देखे एवं एक पेटिकोट जिस पर भी खून आदि के निशान थे।जिससे उन्हें तत्काल संदेह हुआ कि हो ना हो यह बालिका उक्त महिला ने इसी घर ही जन्म लिया है साथ ही बच्ची को जिस टीशर्ट में लपेट कर फेंका गया था उस टी शर्ट को भी पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर जारी कर पहचान करने का प्रयास किया तो उस टीशर्ट को दान करने वाले ने पहचान लिया और पुलिस को सूचना दे दी थी कि यह टीशर्ट हमने हमारी कामवाली बाई को दी थी। बस यही से पुलिस का शक गहरा गया और उन्होंने सूझबूझ के साथ महिला के घर छापा मार दिया । बाद में अस्पताल में महिला का यूपीटी टेस्ट किया गया एवं फिर महिला ने तुरंत ही मोबाइल पर अपने अपराध को स्वीकार करते हुए पूरी कहानी बताई। परंतु महिला ने बच्चों को अपनाने से इनकार कर दिया। पुलिस ने मां की पहचान कर उसे अभिरक्षा में लिया है। अस्पताल ले जाकर अपनी बेटी को दुग्धपान कराने के लिए कहा, लेकिन महिला ने बेटी की तरफ देखा तक नहीं।इस स्थिति में अब बच्चे को सीडब्ल्यूसी की मातृ शक्ति संस्थान में भोपाल भेजा जाएगा एवं महिला पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में कपिल गुप्ता, नगर निरीक्षक बरेली का कहना है कि चूंकि मामला महिला से जुड़ा हुआ था इसलिए पुलिस की टीम ने अपनी सूझबूझ एवं लोकराज को बचाते हुए सादी वर्दी में जाकर पहले समस्त साक्ष्य एकत्रित किए फिर उसी महिला से ही स्वीकृति के बाद गिरफ्तार किया गया। संपूर्ण साक्ष्यों को डीएनए टेस्ट हेतु भी भेजा जा रहा है । महिला पर अपराध दर्ज है उसे अभी फिलहाल प्रसव होने के होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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