मध्य प्रदेश

नगरीय निकाय चुनाव : डिस्पोजल क्रॉकरी की बिक्री 25 फीसदी बढ़ी, रोज बिक रहे 15 से 20 क्विंटल फूल, ढोल-नगाड़ा ताशे वालों की भी मौज

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव के कारण बाजार के विभिन्न सेक्टरों में अच्छा व्यापार हो रहा है। विभिन्न पार्टियों के महापौर व पार्षद पद के प्रत्याशियों ने कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं को खिलाना-पिलाना शुरू कर दिया है। ऐसे में हलवाइयों को काम मिलने लगा है। डिस्पोजल ग्लास, दोना, पत्तल, प्लेट, कप की बिक्री में भी इजाफा हुआ है।
डिस्पोजल हाउस के संचालक विजय सिंह, प्रेम चंद सेन ने बताया कि 8-9 जुलाई को काफी अधिक शादियां हैं।मगर वर्तमान में सहालग कमजोर है। बावजूद इसके चुनाव के चलते डिस्पोजल दोना-पत्तल, कप, ग्लास आदि की बिक्री बीते 4-5 दिन से बढ़ी हुई है। चूंकि 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लग चुका जा है।उसकी चिंता भी उन्हें ज्यादा सता रही है।
पेपर प्लेट, दोना आदि के मेनुफेक्चरर मोहित सैनी का कहना है कि चुनाव के कारण मैनुफैक्चरिंग में करीब 20 से 25 फीसदी का इजाफा किया है। पत्तों की पत्तल की मांग भी अब बढ़ गई है। कई नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं व मतदाताओं को भोजन कराना शुरू कर दिया है।
डिस्पोजल सामग्री के विक्रेता अजय रावत ने बताया कि प्लास्टिक के ग्लास 20 से 40 रुपए प्रति सैकड़ा (100), कागज के दोने 30 से 50 रुपए सैकड़ा, प्लास्टिक दोने 30 से 100 रुपए प्रति सैकड़ा, थाली 2 से 7 रुपए प्रति नग, चम्मच 15 से 40 रुपए सैकड़ा बिकते हैं।
फूलों की खपत भी बढ़ी..
शहर में बीते 4-5 दिन से फूलों की खपत में 20 से 25 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।सुनील सैनी राजेश राजू सैनी का कहना है कि एक सप्ताह पहले तक जहां रोज शहर में 5 से 7 क्विंटल फूल बिकते थे।लेकिन अब बिक्री बढ़कर 15 से 20 क्विंटल तक हो रही है। इससे फूलों की खेती करने वाले किसानों में उत्साह है।
इधर- ढोल-नगाड़े,ताशे ,पंजाबी ढ़ोल वालों की शुरू हुई दिहाड़ी
बैंड संचालक राम सिंह बंशकार मेहबूब भाई का कहना है कि 8 व 9 जुलाई को काफी अधिक शादियां हैं। फिलहाल कमजोर पड़े शादी के सीजन बकारण बैंड वालों को कम काम मिल रहा था। मगर अब चुनाव के कारण हर वार्ड में खड़े पार्षद पद के 4-5 प्रत्याशियों को ढोल-नगाड़ों की जरूरत प्रचार के लिए पड़ रही है। ऐसे में बड़े कारोबारियों के साथ ही गली-मोहल्ले के छोटे-छोटे व्यापारियों को भी रोजगार मिलने लगा है। दो ढोल बजाने के रोजाना 1500 से 2000 रुपए तक मिल जाते हैं।

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