धार्मिकमध्य प्रदेश

चैत्र नवरात्रि में सर्वार्थ सिद्धि-रवि का विशेष संयोग

इस बार पूरे नौ दिन होगी साधना, बुद्धादित्य योग में होगी शुरूआत, शनि व मंगल मकर राशि में रहेंगे
सिलवानी। साल की बड़ी उजागर चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू होगी। चैत्र नवरात्रि का महत्व सबसे ज्यादा इसलिए है कि ब्रम्हाजी ने इस दिन से सृष्टि निर्माझा की शुरूआत की थी। इसी दिन से नया साल संवत् 2079 की शुरूआत होगी। भक्त नए साल की शुरूआत देवी की आराधना से करेंगे। ज्योतिषियों का कहना है कि यह नवरात्रि खास ग्रह योग-संयोग के कारण मनोकामना पूर्ति करेगी तथा साधकों को सिद्धि देगी। चैत्र नवरात्रि पूरे नौ दिन रहेगी। नवरात्रि की षुरूआत 2 अप्रैल शनिवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होगी। बुद्धादित्य योग स्वयं की राशि मकर में, शनिदेव मंगल के साथ रहेंगे, जो पराक्रम में वृद्धि करेंगे। रवि पुष्य नक्षत के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग नवरात्रि को स्वयं सिद्ध बनाएंगे। शनिवार से नवरात्रि का प्रारंभ षनिदेव का स्वयं की राशि मकर में मंगल के साथ रहना निश्चित ही सिद्धि कारक है। इससे कार्य में सफलता, मनोकामना की पूर्ति, साधना में सिद्धि मिलेगी। साल की चार नवरात्रि में भक्तों की शक्ति पूजा शक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्रि साल मेें 4 बार आता है चैत्र, आषाढ व अश्विन माघ। चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि उजागर नवरात्रि है, शेष दो नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कही जाती है।
नवरात्रि के समय ग्रह स्थिति
मकर राशि में शनि, मंगल के साथ विराजित। कुंभ में गुरू, शुक्र के साथ विराजित। मीन में सूर्य, बुध के साथ विराजित। मेष में चंद्रमा, वृषभ में राहु, वृश्चिक में केतु विराजमान रहेंगे।
घट स्थापना मुहूर्त
2 अप्रैल को ब्रम्हा मुहूर्त, सुबह 7.50 से 9.24 तक, दोपहर 2 से शाम 5.08 तक। साल की चार नवरात्रि में भक्तों की शक्ति पूजा शक्ति की उपासना का महापर्व नवरात्रि साल में 4 बार आता है। चैत्र, आषाढ व अश्विन माघ। चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि उजागर नवरात्रि है, शेष दो नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कही जाती है।

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