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थूकना  मानवता के विरुद्ध अघोषित युद्ध..

दिव्य चिंतन : हरीश मिश्र वरिष्ठ पत्रकार
   मुजफ्फर नगर प्रशासन ने खाद्य पदार्थ व्यापार, भोजनालय, होटल, फल की दुकानों पर व्यावसायिक संस्था का नाम, स्वामी का नाम बोर्ड पर साफ़ और बड़े अक्षरों में लिखने का आदेश दिया।
    आदेश उपरांत सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिक घटाओं के बादल गर्जन कर बरसने लगे। धर्मरक्षकों, दीन प्रसारकों,  राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं,  सोशल मीडिया के लड़ाकों और सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश की विवेचना अपने-अपने ढंग से की। कोई पक्ष में, कोई विपक्ष में तर्क-वितर्क कर रहा है।
    लेकिन कुछ अल्पसंख्यकों  की अल्प बुद्धि का आज़ादी के बाद से लाभ उठाने वाले दीन प्रसारकों नेताओं, राजनैतिक दलों के अनुसार “यह आदेश संविधान से मिली व्यापार करने की स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाला , साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाला है। “
     यह सही है कि इस आदेश के बाद देश भर में सद्भाव बिगड़ा है, लेकिन सद्भावना बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार कौन ? सरकार, प्रशासन को कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य करने वाला कौन ? जिम्मेदार हैं खाद्य पदार्थ सामग्री में थूक लगाकर बेचने वाले और उनको मानसिक रोगी कहकर समर्थन करने वाले धर्मनिरपेक्ष समुदाय के अनुयाई।
   “संविधान व्यापार करने की स्वतन्त्रता, धार्मिक परंपराओं का पालन एवं धर्म के अनुसार भोजन करने का अधिकार देता है। “संविधान अति स्वतंत्रता , स्वच्छंदता, मनमानी, विकृत कृत्य करने, भोज्यपदार्थ पर थूक लगा कर विक्रय करने और धर्म-पंथ-मज़हब छुपाने की स्वतंत्रता नहीं देता।”
   संविधान अनुच्छेद 19 ( 1 ) ( छ ) नागरिकों को व्यापार एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। लेकिन यह अधिकार असीमित एवं अनियंत्रित नहीं हैं ।  यह अनुच्छेद किसी व्यक्ति को गैर कानूनी या अनैतिक व्यापार करने का अधिकार नहीं देता। व्यवसाय का अर्थ है-वैध व्यवसाय। अवैध, अनैतिक या जन स्वास्थ्य को क्षति पहुंचाने वाले  व्यापार को बंद करने, प्रतिबंधित करने का अधिकार सरकार को प्राप्त है।  बस यही कार्य उत्तर प्रदेश  सरकार ने किया ।
    इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा कर समस्या का समाधान खोजा जाना चाहिए। लेकिन ऐसा ना कर माननीय ! जिन्हें हम लोकतंत्र में स्याही लगाकर सड़क से उठाकर आम आदमी से विधि पुरुष ! बनाते हैं , जो विधि की शपथ लेते हैं, वे नकारात्मक  बयान देकर पूरे देश में साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ रहे हैं। जबकि कठोर निर्णय लेकर ऐसे घृणित कृत्य करने वालों के विरुद्ध प्रशासन, सरकार , पंथ, समुदाय और सुप्रीम कोर्ट को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
थूकने वालों के पक्ष में धर्मनिरपेक्ष समुदाय के लोग संवेदना के साथ खड़े हैं।
    “…सवाल धर्म निरपेक्ष समुदाय से है। क्या आप अपने परिवार के लिए काजू-कतली , बादाम-पाक को थूक पाक में बना खरीद सकते हैं। यदि हां…तो आप लें। यह आपके मनभावन पकवान, मिष्ठान आपको मुबारक। उनको बाध्य ना करें जो साफ सफाई, स्वच्छता से रहते हैं और शाकाहारी हैं।
    सच यह है, थूकने वालों का कोई मज़हब नहीं होता…वे मकसद से थूकते हैं… फिर थूक खुदा के अनुयायियों के पाजामे पर गिरे या भगवान के भक्तों की धोती पर…थूकने वालों से यह उम्मीद करना निरर्थक है कि वे न थूकें। धर्मांध  जानते हैं कि थूक का परिणाम अमंगलकारी, अनर्थकारी होगा और उनका मकसद मानव सभ्यता का विनाश करना है। उनसे धर्म, मजहब के मार्ग पर चलने की उम्मीद करना निरर्थक है। हम नीम के पत्तों से उम्मीद करें कि उसमें से शहद निकले तो असंभव है।
    आईपीसी अनुसार मिलावट अपराध है, तब रोटी, फलों में थूक लगाकर बेचना, भगवान को चढ़ाई जाने वाली पुष्प माला में थूक लगाना, कंटेनर में छुपकर पेशाब कर उपभोक्ता को  प्रदाय करना, महिला के सिर पर थूकना  मानवता के विरुद्ध मानसिक विकृति है एवं अघोषित युद्ध ।
   किसी भी धर्म-पंथ-मज़हब के  दूत या धर्म, पंथ, ग्रंथों में नहीं लिखा कि मनुष्य के रूप में जन्म लेकर पशु जैसा आचरण करो। प्रशासन, सरकार, सुप्रीम न्यायालय और ईमान धारण करने वालों को इस पर  गंभीरता से विचार करना चाहिए। गलत कृत्य करने वाले, चाहे वह किसी भी धर्म या मज़हब के हों, उनका सामाजिक बहिष्कार, निंदा और दंडात्मक कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए।
   घृणित कृत्य करने वालों के प्रति उदारता पूर्ण भाव नहीं रखना चाहिए। यदि नेताओं , राजनैतिक दलों ने बुराई देखने, समझने का सामर्थ्य खो दिया तो परिणाम अमंगलकारी, अनर्थकारी ही आएंगे। इसलिए सरकार को कठोर कानून बनाकर स्वच्छंदता पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करना ही चाहिए। अन्यथा हो सकता है कुछ लोगों की ग़लती का परिणाम आर्थिक बहिष्कार तक पहुंच जाए। जो देश और समाजिक हित में नहीं होगा।
संविधान  अनुच्छेद 19 ( 1 ) ( छ ) नागरिकों को व्यापार एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।  लेकिन यह अधिकार असीमित एवं अनियंत्रित नहीं हैं ।
..सवाल धर्म निरपेक्ष समुदाय से है। क्या आप अपने परिवार के लिए काजू-कतली , बादाम-पाक को थूक पाक में बना खरीद सकते हैं। यदि हां…तो आप लें। यह आपके मनभावन पकवान, मिष्ठान आपको मुबारक। उनको बाध्य ना करें जो साफ सफाई, स्वच्छता से रहते हैं और शाकाहारी हैं।”

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