
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 23 मार्च 2026_
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं । *सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है। जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 06:38 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र कृत्तिका 08:49 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – कृतिका नक्षत्र के स्वामी ग्रह सूर्य हैं। और इसका संबंध अग्नि देव और भगवान कार्तिकेय से है, कृतिका नक्षत्र के मुख्य देवता अग्नि देव (अग्नि) हैं।
⚜️ योग : विष्कुम्भ योग 12:21 PM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : बव 07:57 AM तक, बाद बालव 06:38 PM तक
✨ द्वितीय करण : कौलव 05:22 AM तक, बाद तैतिल
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:08:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:10:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह को 04:47 ए एम से 05:35 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : सुबह को 05:11 ए एम से 06:22 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर को 12:03 पी एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर को 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 06:33 पी एम से 06:56 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 06:34 पी एम से 07:45 पी एम
💧 अमृत काल : शाम को 06:37 पी एम से 08:05 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर को 12:04 ए एम, मार्च 24 से 12:51 ए एम, मार्च 24
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : शाम को 08:49 पी एम से 06:21 ए एम, मार्च 24
❄️ रवि योग : शाम को 08:49 पी एम से 06:21 ए एम, मार्च 24
☄️ विष्कुम्भ योग- 23 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – लक्ष्मी पञ्चमी/ मासिक कार्तिगाई/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ विडाल योग/ भारत के प्रसिद्ध देशभक्त और शहीद होने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध देशभक्त और शहीद होने वाले क्रांतिकारी सुखदेव स्मृति दिवस, प्रसिद्ध देशभक्त और शहीद होने वाले क्रांतिकारी राजगुरु स्मृति दिवस, भारतीय शास्त्रीय संगीतकार वसुंधरा कोमकली जन्म दिवस, जयपुर राजघराने की राजमाता महारानी गायत्री देवी जयन्ती, राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार अन्नाराम सुदामा जन्म दिवस, अभिनेत्री कंगना रनौत जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी बसंती देवी जयन्ती, अभिनेत्री स्मृति इरानी जन्म दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया जयन्ती, स्वामी ओमानन्द सरस्वती पुण्य तिथि, विश्व मौसम विज्ञान दिवस, शहीद दिवस (Shaheed Diwas) ✍🏼 *तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🗼
फ्रेम लगाने के वास्तु नियम
वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा फोटो फ्रेम लगाने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। इस दिशा में परिवार की सामूहिक तस्वीर लगाने से रिश्तों में स्थिरता आती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
*वास्तु में कुछ दिशाओं में तस्वीरें लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में पति-पत्नी या वैवाहिक जीवन से जुड़ी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। इससे रिश्तों में अनबन या तनाव की स्थिति बन सकती है।
*इसके अलावा वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है, इसलिए इस दीवार पर कपल फोटो लगाने से बचना बेहतर माना जाता है। वहीं, पूर्व दिशा में उदासी या नकारात्मक भाव वाली तस्वीरें लगाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। *घर का ईशान कोण बेहद पवित्र माना जाता है। इस स्थान पर भगवान की तस्वीर या धार्मिक चित्र लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन यहां दंपति की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए।
*इसके साथ ही वास्तु के अनुसार बेडरूम में लगी तस्वीरों के ठीक सामने शीशा नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर रिश्तों में गलतफहमियां और मनमुटाव बढ़ने की आशंका रहती है। ❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मिलेंगे फायदे ही फायदे- क्या आप लंबे समय तक अपनी हड्डियों को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं? अगर हां, तो आपके लिए अंजीर का पानी एक परफेक्ट ऑप्शन साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए भी पोषक तत्वों से भरपूर अंजीर का पानी पीने की सलाह दी जाती है यानी अगर आप अपनी हार्ट हेल्थ को सुधारना चाहते हैं, तो अंजीर के पानी को डाइट प्लान का हिस्सा बना सकते हैं।
*वेट लॉस में मददगार- अंजीर का पानी न केवल बॉडी के मेटाबॉलिज्म को सुधारता है बल्कि पेट को लंबे समय तक भरा हुआ भी महसूस कराता है। यही वजह है कि वेट लॉस के लिए अंजीर का पानी पीने की सलाह दी जाती है। खून की कमी से छुटकारा पाने के लिए अंजीर का पानी पिया जा सकता है। रात भर के लिए एक गिलास पानी में 2-3 सूखे अंजीर को भिगोकर रखिए और फिर अगली सुबह खाली पेट इस पानी को पी जाइए।
🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊
⚠️ अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानी
*मल्ल सिंदूर एक शामक और विषैली प्रकृति की औषधि है। इसके उपयोग में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
*बिना डॉक्टर की सलाह के न लें: इसे केवल एक अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए। इसकी गलत खुराक शरीर के अंगों (विशेषकर लीवर और किडनी) को नुकसान पहुंचा सकती है।
*अनुपान: इसे आमतौर पर अदरक के रस, शहद या पान के पत्ते के साथ दिया जाता है। *परहेज: इसके सेवन के दौरान अक्सर खट्टे, ठंडे और गरिष्ठ भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।
*वर्जित: गर्भवती महिलाओं, बच्चों और पित्त प्रकृति (जिन्हें गर्मी ज्यादा लगती हो) वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ महाभारत की युद्ध भूमि तैयार होने से बहुत पहले, हस्तिनापुर की एक छोटी सी घटना ने इतिहास की दिशा बदल दी थी। यह कहानी है उस ब्राह्मण की, जो गरीबी में डूबा था लेकिन जिसके पास ब्रह्मास्त्र जैसी शक्तियां थीं— आचार्य द्रोण। *मित्र का वो ‘जहरीला’ अपमान: द्रोणाचार्य और राजा द्रुपद बचपन के मित्र थे। गरीबी से तंग आकर जब द्रोण मदद मांगने द्रुपद के पास गए, तो द्रुपद ने अहंकार में आकर कह दिया— “एक राजा और एक भिखारी कभी मित्र नहीं हो सकते।” द्रोण ने उसी क्षण कसम खाई कि वे इस अपमान का बदला लेंगे और द्रुपद का आधा राज्य छीन लेंगे।
*हस्तिनापुर की वो ‘जादुई’ दोपहर: द्रोण भटकते हुए हस्तिनापुर पहुँचे। वहां उन्होंने देखा कि कौरव और पांडव राजकुमार एक कुएं के पास खड़े परेशान हैं। उनकी गेंद कुएं में गिर गई थी। द्रोण मुस्कुराए और उन्होंने एक चमत्कार दिखाया जिसे देखकर बच्चे दंग रह गए। *तीरों की ‘सीढ़ी’ (The Arrow Chain): द्रोण ने कुएं में मुट्ठी भर ‘सींक’ (घास के तिनके) फेंके। उन्होंने मंत्र पढ़कर एक तिनका गेंद में मारा, फिर दूसरे तिनके से पहले को जोड़ा… और देखते ही देखते तिनकों की एक लंबी जंजीर बनाकर गेंद को बाहर निकाल लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी अंगूठी कुएं में फेंकी और उसे भी तीर के वार से बिना छुए बाहर निकाल लिया।
*पितामह भीष्म की पहचान: जब राजकुमारों ने यह बात पितामह भीष्म को बताई, तो भीष्म तुरंत समझ गए कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि साक्षात् अस्त्र-विद्या के ज्ञाता द्रोणाचार्य हैं। उन्होंने ससम्मान द्रोण को हस्तिनापुर का ‘राजगुरु’ नियुक्त किया और उन्हें राजकुमारों की शिक्षा का भार सौंपा। *द्रोण की वो ‘गुरु दक्षिणा’: द्रोण ने सबको शिक्षा तो दी, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य था— अर्जुन को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाना, ताकि वह उनके अपमान का बदला द्रुपद से ले सके। और अंत में उन्होंने अर्जुन के ज़रिए द्रुपद को बंदी बनवाकर अपना बदला पूरा किया।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।



