
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 18 अप्रैल 2026
18 अप्रैल 2026 दिन शनिवार को बैशाख मास के शुक्ल पक्ष कि प्रतिपदा तिथि है। आज यायीजययोग भी है। आज सम्पूर्ण दिवस रवियोग भी है।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । *शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
*शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 02:10 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र अश्विनी 09:42 AM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार (देवताओं के चिकित्सक) हैं।
⚜️ योग – प्रीति योग 11:55 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ प्रथम करण : बव 02:11 PM तक
✨ द्वितीय करण : बालव 12:31 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:44:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:27:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:24 ए एम से 05:08 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:46 ए एम से 05:53 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:55 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:47 पी एम से 07:09 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:49 पी एम से 07:55 पी एम
💧 अमृत काल : रात्रि 02:52 ए एम, अप्रैल 19 से 04:18 ए एम, अप्रैल 19
🗣️ निशिता मुहूर्त : दोपहर 11:58 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 19
🔥 अग्निवास आकाश – 02:10 पी एम तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – वैशाख प्रारम्भ दक्षिण/ पराशर ऋषि जयन्ती/ इष्टि/ चन्द्र दर्शन/ गण्ड मूल/ आडल योग/ विश्व विरासत दिवस, क्रांति के प्रमुख नेता तात्या टोपे स्मृति दिवस, महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन स्मृति दिवस, सिखों के गुरु गुरु तेग़ बहादुर जयन्ती, भारतीय राजनीतिज्ञ चन्देश्वर प्रसाद नारायण सिंह जन्म दिवस, अभिनेत्री ललिता पवार जन्म दिवस, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बारीन्द्र कुमार घोष स्मृति दिवस, भारतीय क्रांतिकारी दामोदर हरी चापेकर शहीद दिवस, अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस, टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी स्थापना दिवस, मजदूर दिवस, भारतीय उद्यमी मुकेश अंबानी जन्म दिवस, फ़ायर सर्विस सप्ताह ✍🏼 *तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
रसोई में भूलकर भी न करें ये गलतियां
*रसोई में कभी भी टूटे फूटे हुए कांच या चटके बर्तनों का इस्तेमाल न करें। ये चीजें दरिद्रता का प्रतीक मानी जाती है और इनका इस्तेमाल करने से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
*रसोई में अन्न की देवी अन्नपूर्णा का वास होता है तो यहां जूते चप्पल पहनकर कभी भी प्रवेश न करें। *रसोईघर को कभी भी पूरा अंधेर कर के न छोड़ें। रात के समय भी कोई एक लाइट जलाकर रखें।
*वास्तु शास्त्र में आग और पानी को एक दूसरे का शत्रु माना गया है। तो रसोई में सिंक और चूल्हा को कभी भी बिल्कुल आमने-सामने न रखें। *रसोई में कभी भी दवाइयां नहीं रखनी चाहिए। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इससे घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*कब और कैसे पीना चाहिए-सुबह-सुबह खाली पेट नींबू वाला पानी पीना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। गुनगुना पानी और नींबू का मिश्रण आपकी सेहत पर ढेर सारे पॉजिटिव असर डालने में कारगर साबित हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो लोग कमजोर इम्यूनिटी की वजह से बार-बार बीमार पड़ जाते हैं, उन्हें पोषक तत्वों से भरपूर नींबू पानी पीना शुरू कर देना चाहिए। *नींबू पानी पीने के फायदे- अगर आप हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट नींबू पानी का सेवन करना शुरू कर देते हैं, तो आपको महज कुछ ही हफ्तों के अंदर खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर दिखाई देने लगेगा। क्या आप जानते हैं कि नींबू पानी में मौजूद तत्व आपकी गट हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक नींबू पानी, पेट से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
🫒 आरोग्य संजीवनी 🥑
*पेट दर्द के लिए घरेलू उपाय काला नमक- पेट दर्द होने पर काला नमक, सौंठ, हींग, यवक्षार, अजवाइन को बराबर मात्रा में लें और इन्हें पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 ग्राम सुबह-शाम नाश्ते और रात के खाने के बाद गुनगुने पानी से लें इससे पेट दर्द, पेट की गुड़गुड़ाहट और पेट की ऐंठन दूर होगी। *अजवाइन- पेट दर्द हो रहा हो या पेट में गैस की समस्या से मरोड़ जैसी हो रही हो तो इसके लिए अजवाइन का चूर्ण खाना फायदेमंद होता है। 1-2 ग्राम अजवाइन, 1 ग्राम सौंठ को मिलाकर पीस लें। इसे गुनगुने पानी के साथ खाली पेट या नाश्ते के बाद खा लें। इस चूर्ण से पेट दर्द में आराम मिलेगा और भूख भी लगेगी।
*पुदीना- पेट दर्द को दूर करने के लिए पुदीने का इस्तेमाल अच्छा है। इसके लिए 2 चम्मच पुदीना का रस निकालें और इसे 2 चम्मच शहद, 2 चम्मच नींबू का रस और पानी के साथ मिलाकर पी जाएं। इससे दर्द में काफी राहत मिल जाएगी। 📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ सनातन धर्म में गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक कुल 16 प्रमुख संस्कार माने गए हैं, जिन्हें षोडश संस्कार भी कहा जाता है। मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार करने का विधान है। अंतिम संस्कार का उतना ही महत्व होता है, जितना की अन्य 15 संस्कारों का। लेकिन आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चे की मृत्यु होने के बाद उनका दाह संस्कार नहीं किया जाता है। ऐसा क्यों आइए आचार्य श्री गोपी राम से जानते है… *गरुड़ पुराण में हैं जीवन और मृत्यु के पीछे के गहरे रहस्य हिंदू धर्म में अग्नि को बेहद पवित्र माना गया है, जो पंचतत्वों में से एक है। मृत्यु के बाद शरीर को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अग्नि ही शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके सभी शारीरिक बंधनों से मुक्त करती है। वहीं, बात जब छोटे बच्चों की आती है तो यह परंपरा अलग रूप ले लेती है। जो केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि भावनात्मक पहलुओं से भी संबंध रखती है। जीवन और मृत्यु के पीछे के गहरे रहस्य छिपे हैं, जिसके बारे में गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है।
*छोटे बच्चों का क्यों नहीं होता अग्नि संस्कार हिंदू धर्म में जलाने के बजाय दफनाकर बच्चों का अंतिम संस्कार करने के पीछे का कारण भी गरुड़ पुराण में मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार, गर्भ में पल रहे शिशु या फिर 5 साल से कम उम्र के बच्चे की अगर मृत्यु हो जाती है, तो उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता। इसके पीछे वजह बताई गई है कि इस आयु तक बालकों में ‘मैं’ और ‘मेरा’ की भावना विकसित नहीं हुई होती है। इतनी छोटी उम्र में वे संसार की मोह-माया से अछूते रहते हैं। साथ ही सभी प्रकार के पाप और पुण्य के बंधन से मुक्त होते हैं। *इस अवस्था में आत्मा को शरीर से कोई लगाव नहीं होता, जिससे वह आसानी से शरीर त्याग देती है। ऐसे में शव के अग्नि संस्कार की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। इसलिए शिशु या छोटे बच्चे के शव को या तो दफनाया दिया जाता है या फिर नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।
*कपाल क्रिया नहीं अनिवार्य वहीं, छोटे बच्चों का शरीर बहुत ही कोमल होता है। ब्रह्मरंध्र यह मनुष्य के सिर का ऊपरी हिस्सा होता है, जिससे प्राण निकालने के लिए कपाल क्रिया की जाती है। वहीं, किसी बच्चे की मृत्यु होने पर यह हिस्सा पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं और इस प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती एक वजह यह भी बताई जाती है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए अत्यंत ही दुखद घटना होती है। ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया बहुत शांत होती है। साथ ही बच्चे के अंतिम विदाई यह परंपरा उस परिवार को यह महसूस कराती है कि उनका बच्चा धरती माता की गोद में सुरक्षित है और चैन की नींद सोया है।*════════◄••❀••►═══════
⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।



