धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 24 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 24 जनवरी 2026
24 जनवरी 2026 दिन शनिवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आप सभी सनातनियों बंधुओं को बता दूं कि, आज श्रीस्कन्दषष्ठी है। आज की षष्ठी को बंगाल में लोंग शीतलाषष्ठी के रूप में मनाते हैं। आज सूर्य देवता उत्तराषाढा नक्षत्र को छोड़कर श्रवण नक्षत्र में साय: 16.34 पी एम पर) चले जाएंगे। आज रवियोग भी है, और पुनः रवियोग ही है। तथा आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “श्रीस्कन्दषष्ठी एवं शीतलाषष्ठी” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु प्रारम्भ
⛈️ मास – माघ मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार माघ माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 12:40 AM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 02:15 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र के देवता शनि को माना जाता है। जबकि इस नक्षत्र के देवता नक्षत्र देवता अहिर्बुध्न्य हैं।
⚜️ योग – शिव योग 02:01 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण : कौलव 01:16 PM तक
द्वितीय करण : तैतिल 12:40 AM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:55:30
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:26 ए एम से 06:20 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:12 पी एम से 12:55 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:20 पी एम से 03:03 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:51 पी एम से 06:18 पी एम
💧 अमृत काल – 09:31 ए एम से 11:06 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:07 ए एम से 01:00 ए एम, 25 जनवरी
❄️ रवि योग – 07:13 ए एम से 10:56 ए एम और 02:16 पीएम से 07:13 ए एम, 25 जनवरी
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – स्कन्द षष्ठी/ पञ्चक जारी/ गण्ड मूल/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ राष्ट्रीय बालिका दिवस, राष्ट्रीय पीनट बटर दिवस, अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस, राष्ट्रीय लॉबस्टर थर्मिडोर दिवस, राष्ट्रीय मैथ्यू दिवस, पॉल पिचर दिवस, राष्ट्रीय किसान दिवस, राष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस, राष्ट्रीय कृषि दिवस, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जन्म दिवस, ख्यातिप्राप्त निर्माता-निर्देशक सुभाष घई जन्म दिवस, महान् स्वतंत्रता प्रेमी व क्रांतिकारी पुलिन बिहारी दास जयन्ती, भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🌾 Vastu tips 🌷
किन रेखाओं से बनते हैं बिजनेस के योग अगर सूर्य रेखा कमजोर हो, लेकिन छोटी उंगली के नीचे स्थित बुध पर्वत उभरा हुआ और लालिमा युक्त हो, तो यह व्यापार का संकेत माना जाता है। बुध पर्वत पर सीधी और स्पष्ट रेखा हो और उसे कोई दूसरी रेखा न काटे, तो ऐसे लोग बिजनेस में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
*लाइफ लाइन से बुध पर्वत तक जाने वाली रेखा अगर किसी व्यक्ति के हथेली की जीवन रेखा से निकलकर कोई रेखा सीधे बुध पर्वत तक जाती है, तो इसे भी बिजनेस की रेखा माना जाता है। ऐसे लोग नौकरी की तुलना में व्यापार में ज्यादा स्थिरता और लाभ प्राप्त करते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ सुखी खुबानी खाने का तरीका
सुखी खुबानी खाने का तरीका निम्नलिखित है इसको किसी भी रूप में कभी भी खाया जा सकता है। लेकिन आयुर्वेद और बीमारी के अनुसार सुखी खुबानी को अलग-अलग तरीके से उपयोग में लाते हैं।
*सुखी खुबानी को खाने से पहले या खाना खाने के बाद दोनों ही तरीके से खा सकते हैं। *कई पकवानों में भी सुखी खुबानी का उपयोग किया जाता है।
*सलाद का स्वाद और पोषक तत्व को बढ़ाने में भी सुखी खुबानी का इस्तेमाल किया जाता है। *सुखी खुबानी का जैम भी बना सकते हैं।
🥑 आरोग्य संजीवनी 🍶
विलो की छाल
सदियों से लोग सूजन और दर्द को कम करने के लिए विलो छाल का उपयोग कर रहे हैं। सफेद विलो की छाल में रासायनिक सैलिसिन होता है, जो एस्पिरिन में मुख्य घटक के समान होता है।
मूल रूप से, लोगों दर्द और बुखार से राहत पाने के लिए छाल को चबाते थे । अब विलो छाल को एक सूखी जड़ी बूटी के रूप में बेचा जाता है जिसे आप चाय की तरह पी सकते हैं। यह एक तरल पूरक या कैप्सूल के रूप में भी आता है। आप सिर दर्द, कम पीठ दर्द, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA), और कई अन्य स्थितियों से असुविधा को दूर करने में मदद करने के लिए विलो छाल का उपयोग कर सकते हैं।
*हालांकि, विलो छाल के अपने दुष्प्रभाव के अपने जोखिम है। यह पेट की खराबी का कारण बन सकता है, आपके किडनी को धीमा कर सकता है, और एस्पिरिन की तरह, रक्तस्राव के समय को लम्बा खींच सकता है। इसका उपयोग केवल वयस्कों द्वारा किया जाना चाहिए। बड़ी मात्रा में एस्पिरिन बच्चों के लिए कैसे हानिकारक हो सकता है, विलो छाल बच्चों के लिए जहरीला हो सकता है। यदि आप एस्पिरिन के प्रति संवेदनशील हैं, या यदि आप कोई ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन) ले रहे हैं, तो आपको विलो छाल से बचना चाहिए। यदि आप वारफारिन या अन्य थक्कारोधी उपचार ले रहे हैं तो भी इसे लेने से बचना चाहिए, क्योंकि सैलिसिन रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकता है। यदि आप अन्य एंटी इंफ्लामेटरी या दर्द शामक दवाओं ले रहे हैं, तो विलो छाल लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। 📚 *गुरु भक्ति योग* 📚 सिर ढकने को शास्त्र निषेध!!
आजकल एक कुप्रथा चल पड़ी है कि पूजन आरंभ होते ही रूमाल निकाल कर सर पर रख लेते हैं और कर्मकांड के लोग भी नहीं मना करते । जबकि पूजा में सिर ढकने को शास्त्र निषेध करता है। शौच के समय ही सिर ढकने को कहा गया है। प्रणाम करते समय, जप व देव पूजा में सिर खुला रखें तभी शास्त्रोचित फल प्राप्त होगा।
शास्त्र क्या कहते हैं ?
उष्णीषो कञ्चुकी चात्र मुक्तकेशी गलावृतः ।
प्रलपन् कम्पनश्चैव तत्कृतो निष्फलो जपः
अर्थात् – पगड़ी पहनकर, कुर्ता पहनकर, नग्न होकर, शिखा खोलकर, कण्ठको वस्त्रसे लपेटकर, बोलते हुए, और काँपते हुए जो जप किया जाता है, वह निष्फल होता है ।’
शिर: प्रावृत्य कण्ठं वा मुक्तकच्छशिखोऽपि वा।
अकृत्वा पादयोः शौचमाचांतोऽप्यशुचिर्भवेत् |
( कुर्म पुराण,अ.13,श्लोक 9)
अर्थात्– सिर या कण्ठ को ढककर , शिखा तथा कच्छ(लांग/पिछोटा) खुलने पर,बिना पैर धोये आचमन करने पर भी अशुद्ध रहता हैं(अर्थात् पहले सिर व कण्ठ पर से वस्त्र हटाये,शिखा व कच्छ बांधे, फिर पाँवों को धोना चाहिए, फिर आचमन करने के बाद व्यक्ति शुद्ध (देवयजन योग्य) होता है)।
सोपानस्को जलस्थो वा नोष्णीषी
वाचमेद् बुधः।-
कुर्म पुराण,अ.13,श्लोक 10अर्ध
अर्थात्– बुध्दिमान् व्यक्ति को जूता पहनें हुए, जल में स्थित होने पर,सिर पर पगड़ी इत्यादि धारणकर आचमन नहीं करना चाहिए ।
शिरः प्रावृत्य वस्त्रोण ध्यानं नैव प्रशस्यते। -(कर्मठगुरूः)
अर्थात्– वस्त्र से सिर ढककर भगवान का ध्यान नहीं करना चाहिए ।
उष्णीशी कञ्चुकी नग्नो मुक्तकेशो गणावृत।
अपवित्रकरोऽशुद्धः प्रलपन्न जपेत् क्वचित् ॥-
( शब्द कल्पद्रुम )
अर्थात्– सिर ढककर,सिला वस्त्र धारण कर,बिना कच्छ के,शिखा खुलीं होने पर ,गले के वस्त्र लपेटकर ।
अपवित्र हाथों से,अपवित्र अवस्था में और बोलते हुए कभी जप नहीं करना चाहिए ।।
न जल्पंश्च न प्रावृतशिरास्तथा।-योगी याज्ञवल्क्य
अर्थात्– न वार्ता करते हुए और न सिर ढककर।
अपवित्रकरो नग्नः शिरसि प्रावृतोऽपि वा ।
प्रलपन् प्रजपेद्यावत्तावत् निष्फलमुच्यते ।। ( रामार्च्चनचन्द्रिकायाम् )
अर्थात्– अपवित्र हाथों से, बिना कच्छ के,सिर ढककर जपादि कर्म जैसे किये जाते हैं, वैसे ही निष्फल होते जाते हैं ।
शिव महापुराण उमा खण्ड अ.14– सिर पर पगड़ी रखकर, कुर्ता पहनकर, नंगा होकर, बाल खोलकर, गले के कपड़ा लपेटकर, अशुद्ध हाथ लेकर, सम्पूर्ण शरीर से अशुद्ध रहकर और बोलते हुए कभी जप नहीं करना चाहिए ।। साभार (ब्रह्मज्ञान )
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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