
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 12 नवम्बर 2025
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। *बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 10:58 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 06:35 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र के देवता नाग हैं, विशेष रूप से नागराज वासुकी। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है।
⚜️ योग – शुक्ल योग 08:02 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 10:57 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 10:58 पी एम तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:20:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:11:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:56 ए एम से 05:49 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:22 ए एम से 06:41 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:29 पी एम से 05:55 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:29 पी एम से 06:48 पी एम
💧 अमृत काल : 04:58 पी एम से 06:35 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:32 ए एम, नवम्बर 13
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कालाष्टमी/ प्रथमाष्टमी (उड़ीसा)/ कालभैरव जयंती/ विश्व निमोनिया दिवस, राष्ट्रीय पिज़्ज़ा दिवस (अमेरिका), राष्ट्रीय हैप्पी आवर दिवस है, राष्ट्रीय चिकन सूप फॉर द सोल दिवस, रोस्ट डिनर दिवस, राष्ट्रीय पिज्जा विद द वर्क्स एक्सेप्ट एन्कोवीज दिवस, विश्व निमोनिया दिवस, लोक सेवा प्रसारण दिवस, ( ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित भारतीय सैन्य अधिकारी) राजीव संधू जयन्ती, भूतपूर्व न्यायाधीश भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा स्मृति दिवस, राष्ट्रीय पक्षी दिवस (सलीम अली का जन्म दिवस)
✍🏼 *तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। 🪒 *_Vastu tips* 🪣
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, गुरुवार के दिन पोछा लगाना शुभ नहीं माना जाता। यह दिन बृहस्पति देव का होता है, जो ज्ञान और समृद्धि के प्रतीक हैं। इस दिन पोछा लगाने से बृहस्पति देव नाराज हो सकते हैं, जिससे घर में धन और सौभाग्य का प्रवाह रुक सकता है।
*एकादशी के दिन न लगाएं पोछा लगाना वास्तु दोष माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और उपवास किया जाता है। पोछा लगाने से धार्मिक माहौल पर बुरा असर पड़ता है और परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है। *पोछा लगाने का सही समय वास्तु के अनुसार, पोछा लगाने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त है यानी सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का समय। इस समय सफाई करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। अगर सुबह बहुत जल्दी संभव न हो, तो सूर्योदय के तुरंत बाद भी पोछा लगाना शुभ माना गया है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ठंड लगना- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक आयरन की कमी की वजह से ठंड भी लग सकती है। अगर आपको हाथों और पैरों में ठंडक महसूस हो रही है, तो हो सकता है कि आपके शरीर में इस जरूरी पोषक तत्व की कमी पैदा हो गई हो।
*त्वचा का पीला पड़ना- त्वचा का रंग बदलने पर भी आपको सावधान हो जाना चाहिए वरना आपकी सेहत बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि त्वचा का पीला पड़ना, आयरन की कमी का संकेत साबित हो सकता है। *सिर में दर्द महसूस होना- सिर दर्द भले ही मामूली सा लक्षण लगता हो, लेकिन आयरन की कमी के कारण भी इस तरह के लक्षण का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस पोषक तत्व की कमी की वजह से चक्कर भी महसूस हो सकते हैं।
🩺 आरोग्य संजीवनी 💉
अगर आपको सर्दी, खाँसी या गले में खराश हो रही है, तो ये नुस्खा बहुत कारगर है।
सामग्री:
*_1 छोटा टुकड़ा अदरक (कद्दूकस किया हुआ)
*_1 बड़ा चम्मच शहद
*_1 कप पानी
*आधा नींबू (वैकल्पिक)*
*बनाने की विधि:
*एक छोटे बर्तन में 1 कप पानी उबालें। *इसमें कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें और 5-7 मिनट तक धीमी आँच पर उबलने दें।
*पानी को छानकर एक कप में डालें।
*इसमें 1 बड़ा चम्मच शहद मिलाएँ। अगर चाहें तो आधे नींबू का रस भी निचोड़ सकते हैं। *इसे गर्मागर्म धीरे-धीरे पिएँ।
*फायदा: यह काढ़ा गले की खराश को शांत करता है, खाँसी में राहत देता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। दिन में 1-2 बार इसे ले सकते हैं। 👉🏼 *नोट: छोटे बच्चों को शहद देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भर्तृहरि ने घर छोड़ा। देखा लिया सब। पत्नी का प्रेम, उसका छलावा, अपने ही हाथों आपने छोटे भाई विक्रमादित्य की हत्या का आदेश। मन उस राज-पाट से वैभव से थक गया। उस भोग में केवल पीड़ा और छलावा ही मिला। सब कुछ को खूब देख-परख कर छोड़ा। बहुत कम लोग इतने पक कर छोड़ते हैं, इस संसार को, जितना भर्तृहरि ने छोड़ा है। अनूठा आदमी रहा होगा भर्तृहरि, खूब भोगा। ठीक-ठीक उपनिषद के सूत्र को पूरा किया: ‘’तेन त्यक्तेन भुंजीथा:‘’ खूब भोगा।को एक-एक बूँद निचोड़ ली संसार की। लेकिन तब पाया कि कुछ भी नहीं है। अपने ही सपने है, शून्य में भटकना है।
*भोगने के दिनों में श्रृंगार पर अनूठा शास्त्र लिखा, “श्रृंगार-शतक”, कोई मुकाबला नहीं। बहुत लोगों ने श्रृंगार की बातें लिखी हैं। पर भर्तृहरि जैसा स्वाद किसी ने श्रृंगार का कभी नहीं लिखा। भोग के अनुभव से श्रृंगार के शास्त्र का जन्म हुआ। यह कोई कोरे विचारक की बकवास न थी। एक अनुभोक्ता की अनुभव-सिद्ध वाणी थी। श्रृंगार-शतक बहुमूल्य है। संसार का सब सार उसमें है। *लेकिन फिर आखिर में पाया वह भी व्यर्थ हुआ। छोड़-कर जंगल चले गए। फिर “वैराग्य-शतक” लिखा, फिर वैराग्य का शास्त्र लिखा। उसका भी कोई मुकाबला नहीं है। भोग को जाना तो भोग की पूरी बात की, फिर वैराग्य को जाना तो वैराग्य की पूरी बात की।
*जंगल में एक दिन बैठे हैं। अचानक आवाज आई। दो घुड़सवार भागते हुए चले आ रहे है। दोनों दिशाओं से। चट्टान पर बैठे है, भर्तृहरि देखते है उस छोटी सी पगडंडी की ओर। घोड़ों की हिनहिनाहट से उसकी आँखें खुल गई। सामने सूरज डूबने की तैयारी कर रहा है। उसकी सुनहरी किरणें पेड़-पत्ते, पगडंडी जिस को भी छू रही है, वह स्वर्णिम लग रहा है। पर अचानक तीनों की निगाह उस चमकदार चीज पर एक साथ पड़ी। दोनों घुड़सवारों और भर्तृहरि की। *एक बहुमूल्य हीरा, धूल में पड़ा हुआ भी चमक रहा है। हीरे की चमक अदभुत थी! हजारों हीरे देखे थे भर्तृहरि ने, पर यह अनोखा ही था। वासना एक क्षण में उस हीरे पर गई। और जैसे ही भर्तृहरि ने अपनी वासना को देखा, वह तत्क्षण लौट आई। एक क्षण में मन भूल गया सारे अनुभव विषाद के। वह सारा अनुभव भोग का। वह तिक्तता, वह वासना उठ गई।
*एक क्षण को ऐसा लगा कि अब उठे-उठे, और उसी क्षण ख्याल आ गया अरे पागल! क्या कर रहा है!! ये सब छोड़ कर तू आया है!!! देखा है जीवन में इसके महत्व को, भोगी है पीड़ा उस में रह कर। फिर उसी में जाना चाहता है। *पर ये बातें उसके मन को मथती, कि सामने से आते दो घुड़सवार आ कर उस हीरे के दोनों ओर खड़े हो गये। दोनों ने एक दूसरे को देखा और तलवारें निकाल ली। दोनों ने कहा मेरी नजर पहले पड़ी थी इस लिए यह हीरा मेरा है। दूसरा भी यही कह रहा था। अब बातों से निर्णय होना असम्भव था। तलवारें खिंच गयीं। क्षण भर में दो लाशें पड़ी थी, तड़पती, लहू-लुहान। और हीरा अपनी जगह पड़ा था।
*उधर भर्तृहरि अपनी जगह केवल देखते रह गये। एक निर्जीव और एक जीवित। सूरज की किरणें अब भी चमक रही थी, पर कुछ कोमल हो गई थी। हीरा बेचारा यह जान भी नहीं पाया कि क्षण भर में उसके आस-पास क्या घट गया! *सब कुछ हो गया वहाँ। एक आदमी का संसार उठा और वैराग्य हो गया। दो आदमी का संसार उठा और मौत हो गई। दो आदमी अभी-अभी जीवित थे, उनकी धमनियों में खून प्रवाहित हो रहा था। श्वांस चल रही थी, दिल धड़क रहा था, मन सपने बुन रहा था। पर क्षण में प्राण गँवा दिये एक पत्थर के पीछे। और बेचारा निर्दोष पत्थर जानता भी नहीं कि ये सब उसके कारण हो रहा है।
*एक आदमी वहाँ बैठा-बैठा जीवन के सारे अनुभव से गुजर गया। भोग के और वैराग्य के; और पार हो गया! साक्षी भाव जाग गया उस का! *भर्तृहरि ने आँखें बन्द कर ली। और वे फिर ध्यान में डूब गए। जीवन का सबसे गहरा सत्य क्या है? तुम्हारा चैतन्य। सारा खेल वहाँ है। सारे खेल की जड़ें वहाँ है। सारे! संसार के सूत्र वहाँ है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
*_मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।



