Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 16 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 16 जून 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 03:31 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र धनिष्ठा 01:13 AM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है।धनिष्ठा नक्षत्र के देवता अष्टवसु हैं, जो धन और समृद्धि के देवता माने जाते हैं।
⚜️ योग – वैधृति योग 11:06 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 03:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 03:12 ए एम, जून 17 तक वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:19 पी एम से 07:40 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:21 पी एम
💧 अमृत काल : 02:43 पी एम से 04:20 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जून 17 से 12:42 ए एम, जून 17
❄️ रवि योग : 01:13 ए एम, जून 17 से 05:23 ए एम, जून 17
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौ सौभाग्य नमः।
🤷🏻♀️ आज का उपाय – शिवजी को दुग्धाभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ पंचक प्रारम्भ 13.09/ विश्व समुद्री कछुआ दिवस, महाराणा प्रताप जयंती (तिथि अनुसार), दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रीय युवा दिवस, राष्ट्रीय फज दिवस, लुटगार्डिसपर्व दिवस, राष्ट्रवादी नेता चितरंजन दास स्मृति दिवस, अफ़्रीकी शिशु दिवस, भारतीय स्वाधीनता सेनानी देशबंधु चितरंजन दास पुण्य तिथि, प्रसिद्ध अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती जन्म दिवस, आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय स्मृति दिवस, जहाँगीर के शासनकाल में गुरु अर्जन देव स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय परिवार प्रेषण दिवस (International Day Of Family Remittances)
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
घर का मुख्य द्वार किसी भी दिशा में हो सकता है किन्तु वास्तु पद या ग्रिड के अनुसार होना चाहिए पूर्व दिशा के लिए 3 ,4 पद , दक्षिण दिशा के लिए 11 ,12 पद ,पश्चिम दिशा के लिए 20 ,21 पद ,उत्तर दिशा के लिए 27 , 28 , 29 पद या ग्रिड मुख्य द्वार के लिए वास्तु के अनुसार श्रेष्ठ रहता है।
● मुख्य द्वार चौखट वाला या दहलीज वाला होना चाहिए, साथ ही मुख्य द्वार अन्दर की ओर खुलने वाला होना चाहिए।
● मुख्य द्वार की ऊचाई अन्य दरवाजो से ऊंची होनी चाहिए ल × चौ = 2×1होनी चाहिए जैसे चौड़ाई 4 फीट है तो लम्बाई 8 फीट होनी चाहिए।
● मुख्य द्वार सुरंमय , सुसज्जित, सुन्दर , आकर्षक होना चाहिए देखने मे अच्छा दिखाई देना चाहिए।
● मुख्य द्वार के दोनों ओर गणेश प्रतिमा आगे एवं पीछे पीठ मिलाकर लगानी चाहिए, या स्वास्तिक ,त्रिशूल, छोटी घंटी मुख्य द्वार पर लगानी चाहिए।
● मुख्य द्वार दो पल्ले वाला श्रेष्ठ रहता है दरवाजा 90° पर खुलना चाहिए विना अवरोध के खुलना एवं बन्द होना चाहिए आवाज नही होनी चाहिये।
● मुख्य द्वार के सामने वेध अवरोध गली मोड़, खम्भा , पेड़, नाली ,कीचड़, गड्ढा, पशु का खूटा, कुआं, छाया वेध नही होना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
भूख बढ़ाने के लिए:
छोटे और बार-बार भोजन करें: दिन में तीन बड़े भोजन खाने की बजाय 5-6 छोटे भोजन खाएं। इससे आपके पाचन तंत्र पर बोझ कम पड़ेगा और आप अधिक कैलोरी ले पाएंगे।
पोषक तत्वों से भरपूर भोजन: ऐसे खाद्य पदार्थ चुनें जो कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर हों।
स्वस्थ वसा: एवोकाडो, नट्स, बीज (चिया बीज, अलसी), जैतून का तेल, पीनट बटर।
साबुत अनाज: दलिया, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन ब्रेड।
फल और सब्जियां: केला, आम, चीकू, आलू, शकरकंद।
कैलोरी युक्त पेय पदार्थ: खाने के बीच में या साथ में दूध, स्मूदी (केला, नट्स, दही मिलाकर), प्रोटीन शेक, फलों का रस पिएं।
अदरक और नींबू: भोजन से पहले अदरक का एक छोटा टुकड़ा सेंधा नमक के साथ चबाना या अदरक और नींबू का रस पीना भूख बढ़ाने में मदद कर सकता है।
अजवाइन का पानी: पाचन में सुधार और भूख बढ़ाने में सहायक।
पानी भोजन से पहले कम पिएं: भोजन से ठीक पहले बहुत ज़्यादा पानी पीने से पेट भर सकता है। भोजन के बीच या बाद में पानी पिएं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
🌿 बबूल की फली से घुटनों का दर्द ठीक करने का आयुर्वेदिक उपाय:
बबूल की फली का चूर्ण (पाउडर): सामग्री: सूखी बबूल की फली
विधि: बबूल की सूखी फली को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें।
रोज़ाना सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी या दूध के साथ लें।
लाभ: इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।
बबूल की फली का काढ़ा: सामग्री: 5-6 बबूल की सूखी फलियाँ, 2 गिलास पानी
विधि: पानी में बबूल की फलियाँ डालकर धीमी आंच पर आधा पानी रहने तक उबालें।
इसे छानकर सुबह-शाम पीएं।
लाभ: जोड़ों के दर्द और अकड़न में राहत मिल सकती है।
बबूल की गोंद (गोंद बबूल): यदि उपलब्ध हो तो बबूल की गोंद को भूनकर उसका सेवन भी लाभदायक माना गया है। यह जोड़ों की चिकनाई बढ़ाने में मदद करता है।
🔅 गुरु भक्ति योग 🔱
भगवान शिव की महीमा तो जग जाहिर है। भगवान भोलेनाथ हर जगह हर व्याप्त हैं। मान्यता के अनुसार शिव-शंकर कण-कण में बसे हुए हैं। भोलेनाथ की महीमा और उनके चमत्कार चारों दिशाओं में फैले हुए हैं। जहां एक तरफ सूदूर उत्तर में बाबा अमरनाथ तो दक्षिण में रामेश्वरम के रुप में विराजमान हैं। वहीं पश्चिमी तट में सोमनाथ स्थापित है तो पूर्व में नेपाल में बैठे पशुपतिनाथ अलौकिक हैं। ऐसा ही एक और अलौकिक व अद्भुत मंदिर हिमाचल की वादियों में छिपा हैं। यहां भगवान शिव का बहुत ही अद्भुत और सुंदर मंदिर है। इस मंदिर में शिवलिंग पर हर 12 साल के बाद आसमानी बिजली गिरती है। यह मंदिर हिमाचल के कुल्लू में स्थित है। महादेव के इस अनोखे मंदिर का नाम ‘बिजली महादेव मंदिर’ है। शिवजी का यह अनोखा मंदिर ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास ही एक पहाड़ पर बना हुआ है। कहा जाता है की यहां आसमानी बिजली गिरने की वजह से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। लेकिन मंदिर के पुजारी जब शिवलिंग को मक्खन से जोड़ते हैं, तो यह फिर से अपने पुराने रूप में आ जाता है। गांव के लोगों का कहना है की यहां बिजली गिरने से जानमाल का नुकसान होता है। लेकिन भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी कृपा दष्टि से बिजली के अाघात को वे सहन कर लेते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार मंदिर यहाँ ऐसी मान्यता है की प्राचीन समय में एक कुलांत नामक दैत्य ने इस जगह का अपना निवास बना लिया था वह एक विशाल अजगर का रूप लेकर मंदी घोग्घरधार से होकर लाहौर स्पीती से मथाण गाँव तक आ गया था। अजगर रुपी दैत्य इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था जिस कारण से उसने व्यास नदी के प्रवाह को रोक दिया। जससे वहां निवास करने वाले सभी जीव पानी में डूबकर मर जाएँ। दैत्य कुलंत की इस मंशा को जानकर भगवानशिव ने अपने त्रिशूल से उसका अजगर रुपी दैत्य कुलांत का वध कर दिया। कुलांत की मृत्यु के तुरंत बाद उसका विशाल बॉडी एक विशाल पर्वत में परिवर्तित हो गया। ऐसा माना जाता है की कुलांत के नाम से ही इस शहर का नाम कुल्लू पड़ा।
इंद्र गिराते हैं शिवलिंग पर बिजली भगवान शिव के त्रिशूल से राक्षस का वध करने के बाद कुलांत राक्षस का बड़ा शरीर पहाड़ बन गया। इसके बाद शिवजी ने इंद्र को आदेशित किया कि हर 12 साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराएं। मान्यता है कि तभी से यह सिलसिला जारी है। यहां के लोग मंदिर पर बिजली गिरते देखते हैं. जिसमें शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है, लेकिन पुजारियों के इसे मक्खन से जोड़ते ही ये फिर पुराने रूप में आ जाता है।
ऐसे पंहुंचे बिजली महादेव मंदिर कुल्लू तक आप आसानी से पहुंच सकते हैं। कुल्लू तक पहुंचने के बाद बिजली महादेव के लिए बस स्टैंड से बस मिलती है जो तक़रीबन चांसरी ग्राम तक जाती है। या फिर आप बस स्टैंड के पास से कुल्लू टैक्सी स्टैंड से प्राइवेट कैब भी कर सकते है। लेकिन आपको चांसरी से 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक सीढियां चढ़कर जाना होता है। इन सीढ़ियों के रास्ते आप बिजली महादेव तक पहुंच सकते हैं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

