Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 24 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 24 फ़रवरी 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 01:45 PM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 06:59 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है तो राशि स्वामी शुक्र।वैदिक देवता अपस अर्थात् जल देवता है। पूर्वाषाढ़ा का अर्थ है, विजय से पूर्व या अजेय तारा
☄️ योग – सिद्धि योग 10:05 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 01:44 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 01:21 ए एम, फरवरी 25 तक तैतिल
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:19:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:41:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:11 ए एम से 06:01 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:36 ए एम से 06:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:15 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:15 पी एम से 06:40 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:18 पी एम से 07:33 पी एम
💧 अमृत काल : 02:07 पी एम से 03:45 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 25 से 12:59 ए एम, फरवरी 25
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शिव मंदिर में पंचामृत चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विजया एकादशी व्रत (सर्वे स्मार्त)/ विश्व मुद्रण दिवस/ प्रथम मुग़ल शासक बाबर जयन्ती, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जन्म दिवस, भारत की टेबल टेनिस खिलाड़ी मौउमा दास जन्म दिवस, भारतीय सिनेमा की ख्यातिप्राप्त अभिनेत्री श्रीदेवी स्मृति दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री ललिता पवार पुण्य तिथि, राजनीतिज्ञ मोरारजी देसाई जन्म दिवस, अभिनेत्री पूजा भट्ट जन्म दिवस, प्रसिद्ध भारतीय गजल गायक तलत महमूद जन्म दिवस, भरतनाट्यम की प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना रुक्मिणी देवी अरुंडेल स्मृति दिवस, एस्टोनिया स्वतंत्रता दिवस, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क (आवकारी) दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🏘️ *Vastu tips* 🏚️
यू रखें घर के मेन गेट के वास्तु का ध्यान
अगर आपके घर का मेन गेट पश्चिम दिशा में बना है और उसमें कुछ वास्तु दोष रह गए हैं तो गेट के पास तुलसी का पौधा लगाएं। तुलसी का पौधा घर से निगेटिविटी को दूर रखता है। तुलसी के स्थान पर आप चमेली के फूल की बेल भी लगा सकते हैं।
इसके अलावा आप रोज सूर्यास्त के समय गेट के पास क्रिस्टल भी रख सकते हैं। यदि आपके घर का मेन गेट उत्तर दिशा में बना है तो गेट पर वाइट या पर्ल ब्लू कलर करवाना चाहिए।
इसके अलावा भी मेन गेट के वास्तु दोष दूर करने के लिए कई उपाय हैं। मेन गेट के दोनों तरफ हरे और लम्बे पौधे लगाने चाहिए। साथ ही गेट पर ऊं श्रीगणेश, स्वस्तिक, शुभ-लाभ जैसे चिन्ह बनाने से भी वास्तु दोष दूर होते हैं।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नीम के 4-5 पत्ते प्रतिदिन चबाने से कौन सी तीन बीमारी में लाभ मिलता है?
बनौषधि चंद्रोदय के अनुसार नीम हल्का, शीतल, कटु, ग्राही, व्रणशोधक, कृमि, कफ, शोथ, पित्त, विष, वात, कुष्ठ, ह्रदय की दाह, श्रम, खांसी, ज्वर, तृषा, अरुचि, रक्त विकार और प्रमेहों को नष्ट करने वाला होता है।
नीम की कोंपलें संकोचक, वातकारक तथा रक्त-पित्त, नेत्र रोग और कुष्ठ को को नष्ट करने वाले होते हैं।
भावप्रकाश निघंटु के अनुसार नीम के पत्ते नेत्रों को हितकर, विपाक में कटु, “ह्रदय को अहितकर”, कृमि, पित्त, अरुचि, विषविकार और कुष्ठ को नष्ट करने वाले होते हैं। ये शोथघ्न, त्वचा और यकृत के लिए उत्तेजक व प्रतिदूषक होते हैं मगर अधिक मात्र में वामक (उल्टी कराने वाले) होते हैं।
भावप्रकाश निघंटु के अनुसार नीम की अन्तर्छाल शीतल, कड़वी, पौष्टिक, अधिक ग्राही, मियादी बुखार, त्वग्दोषहर, कृमिघ्न एवं रसायन होती है।
💉 आरोग्य संजीवनी_ 🩸
मधुमेह नाशक जंगली अश्वगंधा यानि पनीरडोडा या फूल- जंगली अश्वगन्धा के पुष्पों को सुखाकर बाजारों में पनीरडोडा के नाम से बेचा जाता है।
पनीर ढोढ़ा का प्रयोग मधुमेह एवं त्वचाविकारों में अत्यन्त लाभप्रद माना गया है।
पनीरडोडा को रात्रिपर्यंत जल में भिगोकर रखें। प्रातः छानकर पीने से मधुमेह में लाभ होता है।
अश्वगंधा रक्त की कमी को पूरा कर, मांसपेशियों को मजबूत बनाकर आप समय तक जवानी बरकरार रखने मे हितकारी है।
अश्वगंधा स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल के लेवल को कम करता है, जिससे स्ट्रेस कम होता है।
गंभीर अवसादग्रस्त यानि डिप्रेशन से पीड़ित का इलाज भी इससे संभव है।
अश्वगंधा एंटीइंफ्लामेट्री गुणों की वजह से ये कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड लेवल को बैलेंस और कम करता है।
अश्वगंधा हृदय को स्वस्थ रखता है।
अश्वगंधा कर्कट अर्थात कैंसर के रोगियों लिए लाभकारी है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
बहुत समय पहले की बात है, जब विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय एक बहुत महंगी हीरे जड़ित अंगूठी पहनते थे, जिसकी कीमत आज के समय में बहुत ज्यादा होंगी। वह उनकी सबसे प्रिय आभूषण में से एक थी। वह उसे अपने दरबारियों, मंत्रियों और सभी मिलने जुलने वालों को दिखाते थे और उस अंगूठी की प्रशंसा करते थे।
एक दिन राजा कुछ उदास बैठे थे तो सभी दरबारी सोचने लगे कि आज ऐसा क्या हुआ की राजा उदास बैठे हैं, तभी उन दरबारियों में से राजा के प्रिय दरबारी तेनाली रामा ने उन्हें पूछा कि राजा जी आप इतने आज उदास क्यों हैं, ऐसा क्या हुआ कि आप इतने उदास हैं। तब राजा ने बताया कि उनकी वह प्रिय अंगूठी खो गई है। मुझे लगता है कि किसी ने मेरी प्रिय अंगूठी चुरा ली है और मुझे मेरे इन अंगरक्षकों पर शक है, तब तेनाली रामा ने कहा की वह उनकी अंगूठी ढूंढ के लाएगा।
तब तेनाली रामा ने उन सब अंग रक्षकों को बुलाया और उनसे पूछा कि आप में से राजा की मूल्यवान अंगूठी किसने ली। तब सभी अंग रक्षकों ने मना कर दिया और कहा कि हमने नहीं ली। तब तेनाली रामा ने कहा कि मैं पता कर लूंगा कि किसने अंगूठी ली है।
तब तेनाली रामा ने कहा कि सभी अंगरक्षक मेरे साथ चलिए और मैं सुबह तक बता दूंगा कि किसने अंगूठी ली है। तब वह उन सबको एक हनुमान जी के मंदिर लेकर गए और खुद पहले अंदर जाकर पुजारी जी से कुछ बात करके बाहर आए और बोला कि अब आप एक-एक करके अंदर जाएं और हनुमान जी के आगे नतमस्तक होकर प्रणाम करके आएं और सुबह हनुमान जी खुद बता देंगे कि चोर कौन है।
तो एक-एक करके सब दरबारी अंदर जाने लगे और नतमस्तक होकर प्रणाम कर कर बाहर आने लगे। जब तक सारे अंगरक्षक अंदर जाकर बाहर आने लगे तब तक सारे दरबारी और गांव वाले मंदिर के सामने इकट्ठे हो गए। तब तेनाली रामा ने कहा कि जो चोर हैं, उसका पता मुझे लग गया है। तब सभी ने पूछा कि आपको चोर का पता कैसे लगा। तब तब तेनालीरामा ने बताया कि जब मैंने इन सब को बोला कि आप अंदर जाएं और नतमस्तक होकर प्रणाम करके बाहर आए।
तब जो व्यक्ति अथवा जो दरबारी चोर है, वो मंदिर के अंदर जाकर नतमस्तक होकर प्रणाम किया ही नहीं और सीधे ही बाहर आ गया और पुजारी जी ने उसे देख लिया। तब वह अंगरक्षक वहां से भागने लगा तो वहां खड़े गांव वालों ने उसे पकड़ लिया और उसे कारागृह में डाल दिया।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

