Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 31 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 31 मई 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।* शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।*
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।* शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।*
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि 08:15 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 09:07 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है. इस नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं।
⚜️ योग – वृद्धि योग 10:43 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : बव – 08:42 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 08:15 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:17:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:43:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:33 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:13 पी एम से 07:33 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 07:14 पी एम से 08:15 पी एम
💧 अमृत काल : 02:49 पी एम से 04:23 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:39 ए एम, जून 01
❄️ रवि योग : 09:07 पी एम से 05:24 ए एम, जून 01
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सवा किलो तील चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – महादेव विवाह (उड़िसा), राष्ट्रीय मुस्कान दिवस, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ध्वज, विकसित दिवस, लोकमाता अहिल्याबाई जयन्ती, राजीव चंद्रशेखर जन्म दिवस, भारत के प्रसिद्ध राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, द्वारका प्रसाद मिश्रा स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर सुभाष गुप्ते स्मृति दिवस, भारतीय निर्माता निर्देशक कल्पना लाजमी जन्म दिवस, भारतीय आध्यात्मिक गुरु आचार्यश्री राजेश जन्म दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day)_
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips_ 🌹
लिविंग रूम उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए, क्योंकि इसे धन और समृद्धि का क्षेत्र माना जाता है। सुनिश्चित करें कि बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि आप और आपके मेहमान वास्तु घरों में बैठते समय उत्तर या पूर्व की ओर मुख करें।
रसोईघर दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा अग्नि और ऊर्जा से जुड़ी है। इससे वास्तु घर में तत्वों का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोने में और रेफ्रिजरेटर उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
शयन कक्ष मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए, और बिस्तर को इस तरह से रखा जाना चाहिए कि आप अपना सिर पूर्व या पश्चिम की ओर करके सो सकें। उत्तर की ओर सिर करके सोने से बचें, क्योंकि यह दिशा नकारात्मकता से जुड़ी है।
बाथरूम उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और शौचालय उत्तर-पश्चिम या उत्तर दिशा में होना चाहिए। सुनिश्चित करें कि बाथरूम में अच्छी तरह से हवादार हो और इस क्षेत्र में दर्पण लगाने से बचें।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बालों का कमजोर होना कई कारणों से हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर का वात, पित्त और कफ दोष असंतुलित होता है, तो इसका प्रभाव सीधे बालों की जड़ों पर पड़ता है।* 👉🏼 यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं:*
अनियमित दिनचर्या – देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना, और समय पर भोजन न करना।* तनाव और चिंता – मानसिक तनाव से शरीर में रक्त संचार और पोषण की आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे बाल कमजोर होते हैं। खराब आहार – प्रोटीन, आयरन और विटामिन्स की कमी से बालों को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता।*
रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक प्रयोग – हेयर कलर, स्ट्रेटनिंग, हीट टूल्स आदि बालों की प्राकृतिक नमी को छीन लेते हैं।* तेल न लगाना – बालों की जड़ों को पोषण देने के लिए नियमित रूप से आयुर्वेदिक तेल की मालिश जरूरी होती है। आयुर्वेदिक सलाह:सप्ताह में 2 बार भृंगराज, आंवला, ब्राह्मी युक्त तेल से सिर की मालिश करें।*
आहार में आंवला, तिल, दूध, बादाम और हरी सब्जियाँ शामिल करें।* रोजाना 5-10 मिनट प्राणायाम करें ताकि रक्त संचार बेहतर हो और तनाव कम हो। 💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
🌿 1. घी की एक बूँद – आंखों के लिए अमृत!* घर का बना हुआ शुद्ध देसी घी आयुर्वेद में आंखों के लिए अमृत माना गया है।*
🤷🏻♀️ कैसे करें उपयोग:
सोने से पहले एक-एक बूंद देसी गाय का घी आंखों में डालें।*
या फिर पलकों और आंखों के आसपास हल्के हाथों से घी की मसाज करें।* 🌟 यह आंखों की सूखी सतह को नमी प्रदान करता है, जलन को कम करता है और रोशनी बढ़ाने में भी सहायक है। 🧂 2. त्रिफला जल – आंखों की सफाई का प्राकृतिक टॉनिक*
त्रिफला चूर्ण (हरड़, बेहड़ा, आंवला) को रातभर पानी में भिगो दें।* प्रयोग का तरीका:*
सुबह उस पानी को छानकर उससे आंखें धोएं।
इस प्रक्रिया को हफ़्ते में 4-5 बार दोहराएं।
💧 इससे आंखों की सूजन, खुजली और सूखापन धीरे-धीरे खत्म होता है।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
जन्मकुंडली का मारक सूर्य किस प्रकार का दुष्प्रभाव देता है ?
सूर्य तो आत्मा का कारक है, पिता तुल्य है, पर जब यही जन्मकुंडली में मारक बन जाए, तो जीवन की गर्मी प्रकाश नहीं जलन देने लगती है। बहुत बार लोग पूछते हैं कि सूर्य मारक कैसे हो सकता है, जब वो जगत का जीवनदाता है? तो मैं उन्हें हमेशा यही कहता हूँ — जब सूर्य अपनी सीमा से बाहर निकलता है, तो वही रोशनी जला भी देती है।
मारक सूर्य तब होता है जब वह द्वितीय या सप्तम भाव में स्थित हो जाए या उन भावों का स्वामी होकर अशुभ दृष्टियों या पापग्रहों की संगति में आ जाए। ऐसा सूर्य जातक के जीवन में अहंकार, पिता से विवाद, नेत्र रोग, ह्रदय रोग, रक्तचाप, बार-बार सम्मान का हनन, सरकारी कार्यों में अड़चन, और जीवन के उत्तरार्ध में अकेलापन या मानसिक क्लेश उत्पन्न करता है।
पाराशरी ज्योतिष और बृहत जातक में स्पष्ट कहा गया है कि “मरणात् पूर्वं मारकेषु पापदृष्टे पापयुक्ते च” अर्थात जब मारक भावों में पाप ग्रह (जैसे सूर्य) हों, या पाप दृष्ट हो, तो जीवन में मृत्यु तुल्य कष्ट भी देता है। सूर्य विशेषकर वृद्धावस्था में ज्यादा असर करता है, और जब इसकी दशा या अंतरदशा आती है, तो पिता का कष्ट, नेत्र रोग, या सरकारी अपमान होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती हैं।
गोचर में जब सूर्य मारक होकर 8वें या 12वें भाव से गुजरता है, तब तो विशेष सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक और शारीरिक ऊर्जा को क्षीण कर देता है।
इसलिए जब सूर्य मारक हो, तो उसका उपचार जरूर करना चाहिए। मैं हमेशा कहता हूँ कि आत्मा का ताप केवल सेवा और शुद्ध भावना से शांत होता है। सूर्य शांति के लिए सूर्य नारायण के बीज मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” का जाप, गायत्री मंत्र, तांबे का दान, और प्रातः सूर्योदय समय अर्घ्य देना अत्यंत लाभकारी होता है।
सूर्य से जीवन है, लेकिन उसका संतुलन ही सुख है। जब वह संतुलन बिगाड़ता है, तभी वो मारक बनता है — बस यही समझने की ज़रूरत है।
जय आदित्याय नमः! 🔆 ∝∝∝∝∝∝∝∝∝•⊰⧱⊱•∝∝∝∝∝∝∝∝∝∝
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।


