धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 04 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 04 फ़रवरी 2025
04 फरवरी 2025 दिन मंगलवार माघ माह शुक्ल पक्ष षष्ठी उपरांत सप्तमी तिथि है।आज स्कंद षष्ठी व्रत भी है । आज प्रातः काल स्नान करके एक समय भोजन ग्रहण करने और अरुणोदय के समय में स्नान करने से अनेकों रोगों से मुक्ति मिल जाती है। आप सभी सनातनियों को “रथ सप्तमी” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार माघ माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 02:31 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 09:49 PM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु होता है।और राशि स्वामी मंगल है।
⚜️ योग – शुभ योग 12:06 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
प्रथम करण : गर – 03:32 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 02:30 ए एम, फरवरी 05 तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 03:19 बजे से 04:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:32:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:28:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:15 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:24 पी एम से 03:08 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:00 पी एम से 06:27 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:03 पी एम से 07:21 पी एम
💧 अमृत काल : 03:03 पी एम से 04:34 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 05 से 01:01 ए एम, फरवरी 05
सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:08 ए एम से 09:49 पी एम
💦 अमृत सिद्धि योग : 07:08 ए एम से 09:49 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/सर्वार्थ अमृतसिद्धि योग/अचला सप्तमी/मूल समाप्त/ रथ सप्तमी/ विधान सप्तमी/ आरोग्य सप्तमी/ चन्द्र भागा सप्तमी (उड़िसा)/ मानव भ्रातृत्व का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, अंतरराष्ट्रीय मानव बंधुत्व दिवस, श्रीलंका स्वतंत्रता दिवस, पंडित भीमसेन जोशी जयन्ती, भारतीय अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर जन्म दिवस, सत्येंद्र नाथ बोस पुण्य तिथि, मधुसूदन दास पुण्य तिथि, प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता एवं फ़िल्म निर्माता-निर्देशक भगवान दादा स्मृति दिवस, भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम की प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मा सुब्रह्मण्यम जयन्ती, विश्व कैंसर दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह), चौरी-चौरा दिवस (1921)
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗽 Vastu tips 🗺️
वजनदार वस्तुओं का प्रयोग: दक्षिण दिशा में भारी वस्तुएं रखने से सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आप इस दिशा में भारी फर्नीचर, पत्थर की मूर्तियाँ या धातु की वस्तुएं रख सकते हैं। इससे घर में स्थिरता और संतुलन बना रहता है।
अंदरूनी सजावट: घर के अंदर दक्षिण दिशा में लाल रंग, त्रिकोणीय आकृतियों और अग्नि तत्व से संबंधित वस्त्रों का उपयोग करें। ये चीजें दक्षिण दिशा के प्रभाव को सशक्त करती हैं।
दक्षिण दिशा में भगवान की पूजा स्थली न बनाएं। पूजा स्थली के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सर्वोत्तम होती है।
मुख्य द्वार का शुद्धिकरण: समय-समय पर मुख्य द्वार और उसके आस-पास गंगाजल का छिड़काव करें और हर शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।
पिरामिड का प्रयोग: पिरामिड का प्रयोग दक्षिण दिशा में वास्तु दोष कम करने के लिए किया जा सकता है। इसे घर के दक्षिणी भाग में स्थापित करें, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहे।
सूर्य भगवान की आराधना: प्रतिदिन सूर्य भगवान की आराधना और सूर्य नमस्कार करने से दक्षिण मुखी घर में रहने वाले लोगों के लिए शुभता और समृद्धि में वृद्धि होती है। सूर्य से जुड़े मंत्रों का जाप और सूर्य को अर्घ्य देने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दक्षिण मुखी घर के वास्तु दोषों को कम करने के लिए उपरोक्त उपायों का पालन किया जा सकता है। यदि संभव हो, तो किसी अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेकर घर की ऊर्जा को संतुलित करने के उपाय करें। सही तरीके से किए गए उपाय न केवल दोषों को दूर करेंगे, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि भी लेकर आएंगे।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शिव पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के कुछ महीनों पहले व्यक्ति की जीभ उचित तरह से काम करना बंद कर देती है, उसे भोजन का सही स्वाद नहीं मिलता. बोलने में भी परेशानी आने लगती है.
जब कोई व्यक्ति चंद्रमा, सूर्य और अग्नि के प्रकाश को देखने में असमर्थता महसूस करने लगे तो ये संकेत है कि जीवन के बस कुछ क्षण ही बचे हैं. कहा जाता है कि मृत्यु के करीब आने पर व्यक्ति को चांद सूरज सामान्य नजर नहीं आते.
शिवपुराण में भगवान शिव के मुताबिक जब व्यक्ति के तन का रंग हल्का पीला पड़ने लगे या सफेद तो यह इस ओर इशारा करता है कि व्यक्ति की मौत नजदीक है.
आपकी परछाई आपको नहीं दिख रही है तो यह मृत्यु करीब आने के सूचक माने गए हैं. वहीं ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार अधिक आयु वाले व्यक्ति को जब अपनी छाया धड़ रहित दिखाई देने लगे, तो उस व्यक्ति की मौत बहुत जल्द होने वाली होती है.
ज्योतिष के अनुसार जिस इंसान को मुंह, जीभ, आंखे, कान और नाक पत्थर के जैसी होती महसूस होने लगे, तो यह व्यक्ति की जल्द मौत होने का इशारा समझा जाता है.
आरोग्य संजीवनी 🍵
बुझा चूना खाने के फायदे
हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है
चूना कैल्शियम रिच होता है। जिससे ये ऑस्टियोपरोसिस जैसी समस्या को दूर रखने में मदद करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। यहीं नहीं चूने की वजह से दांत भी मजबूत रहते हैं।
डाइजेशन में मदद करता है चूना खाने से खाने को डाइजेस्ट होने में मदद मिलती है।
ज्वाइंट पेन से राहत अगर जोड़ो के दर्द की शिकायत कैल्शियम की कमी की वजह से हो रही है तो चूना खाना फायदेमंद हो सकता है।
चूना खाना कब है नुकसानदेह
वैसे तो चूना खाने से फायदा होता है लेकिन खाने में चूने की मात्रा का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। जरा सी ज्यादा मात्रा सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। काफी सारे लोगों को चूने से एलर्जी भी हो सकती है। अगर किसी को खट्टे फलों से एलर्जी है तो उसे चूना भी नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से सांस लेने में कठिनाई, सूजन, पित्ती उछलना जैसी समस्या हो सकती है। दरअसल, चूना एसिडिक होता है और इसकी वजह से उल्टी, मिचली और खाना निगलने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
🌷 गुरु भक्ति योग_ 🌸
एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माँ पार्वती बैठे हुए थे। शिव जी ध्यान लगाकर बैठे थे।
तभी पार्वती जी ने देखा कि वे मन्द-मन्द मुस्कुरा रहे हैं। पार्वती जी के मन में प्रश्न उठा कि आज महादेव ध्यान मुद्रा में भी क्यों मुस्कुरा रहे हैं।उन्होंने भोले बाबा की समाधी समाप्त होने पर उनसे पूछा – स्वामी मैंने आपको पहली बार समाधी में मुस्कुराते हुए देखा है इसका क्या कारण है।
शिव जी ने उन्हें बताया कि उनके एक भक्त और उसकी पत्नी की बातें सुन कर वे मुस्कुरा रहे थे। पूरी बात बताते हुए महादेव ने बताया कि मृत्युलोक में मेरा एक अनन्य भक्त एक ब्राह्मण है जोकि मेरे ही एक मन्दिर में पुजारी है और दिन रात मेरी सेवा में लगा रहता हैवह इसी मन्दिर के पीछे छोटी सी कुटिया में अपनी पत्नी के साथ रहता है। इसकी पत्नी चाहती है कि उसके पास उसका खुद का घर हो और धन-दौलत हो जिससे वह सुख से अपना जीवन बिता सके परन्तु पुजारी केवल मन्दिर के चढ़ावे पर निर्भर है और मन्दिर में आने वाली दान दक्षिण से बड़ी मुश्किल से घर का खर्च ही चल पाता है।
घर और अन्य सुख सुविधा कहां से आयेंगी पर वह दिन रात मेरे से अपनी पत्नी का सपना पूरा करने का अनुग्रह करता रहता है। आज उसकी पत्नी ने उससे ऐसी बात कही जिसे सुनकर मैं मुस्कुराए बगैर नहीं रह सका।पार्वती जी ने पूछा ऐसा क्या कहा उसकी पत्नी ने जो आपका ध्यान भंग हो गया। शिवजी ने बताया उसकी पत्नी ने आज उसे ताना मारते हुए कहा कि जिन भोले शंकर की तुम दिन रात सेवा करते रहते हो और उनसे मेरे लिए घर मांगते रहते हो उनके पास तो खुद घर नहीं है वे तो खुद कैलास पर्वत पर रहते हैं। तुम्हें कहां से घर देंगे। बस यही बात सुनकर मैं मुस्कुरा रहा था।
इस पर पार्वती जी को बड़ा आश्चर्य हुआ उन्होंने कहा स्वामी यह बात सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा वह आपको ताना मार रही है और आप मुस्कुरा रहे हैं। आप उसे एक घर और सुख सुविधाएं दे दीजिए जिससे वो आपकी निन्दा न कर सके।इस पर शिव जी ने कहा पार्वती यह मेरे वश में नहीं है। ये सभी प्राणी तो मृत्युलोक में रहते हैं अपने पिछले जन्म के और साथ ही इस जन्म के कर्मो का फल भोग रहे हैं और जैसे ही इनके कर्मो का फल इन्हें मिल जाता है। उन्हें सभी प्रकार के सुख मिलना शुरू हो जाते हैं और अंत में वे मुक्ति पा जाते हैं।
इसीलिए इसे मृत्युलोक कहा गया है। मनुष्य बार-बार जन्म लेकर अपने कर्मो का हिसाब चुकाता है। यह कर्मभूमि है बिना कर्म के गति नहीं है।आगे शिव जी ने कहा यह ब्राह्मण पिछले जन्म में एक साहुकार था जोकि लोगों की जमीन, उनके जेवर पशु आदि गिरवी रख कर उन्हें पैसे देता था और उनकी जमीन हड़प लेता था और जो दूसरों के जेवर और ब्याज में पैसा मिलता था। उसका उपयोग यह उसकी पत्नी भी किया करती थी
इसी कारण आज इस जन्म में इसे घर नहीं मिल सकता और इसकी पत्नी जिसने उन वस्तुओं का उपयोग किया वह भी इसके साथ यह कर्मफल भोग रही है।इस जन्म में यह मेरी सेवा कर रहा है। जिससे इसके कर्मो के फल में जो कष्ट मिलने थे वे मेरी भक्ति के कारण इसे नहीं मिल रहे हैं। इसका जीवन शांति से कट रहा है पर जब तक इसके कर्मो का हिसाब पूरा नहीं होता इसे घर और अन्य सुविधाएं नहीं मिल सकती। यही विधि का विधान है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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