Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 17 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 17 जून 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 02:46 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 01:01 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। जिसका राशि स्वामी शनि है। शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुणदेव जी है।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 09:34 AM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 02:46 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 02:13 ए एम, जून 18 तक बव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:12:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:20 पी एम से 07:40 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:21 पी एम से 08:21 पी एम
💧 अमृत काल : 05:53 पी एम से 07:28 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, जून 18 से 12:42 ए एम, जून 18
🌸 त्रिपुष्कर योग : 01:01 ए एम, जून 18 से 05:23 ए एम, जून 18
❄️ रवि योग : 05:23 ए एम से 01:01 ए एम, जून 18
🚓 यात्रा शकुन – दलीया का सेवन कर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ अं अंगारकाय नमः।
🤷🏻♀️ आज का उपाय – हनुमान मंदिर में मसूर दाल का मीठा पकवान चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – त्रिपुष्कर योग/ रवि योग/ पंचक जारी/ राष्ट्रीय एप्पल स्ट्रूडल दिवस, राष्ट्रीय स्टीवर्ट रूट बीयर दिवस, राष्ट्रीय चेरी टार्ट दिवस, कैलाश नाथ काटजू जयन्ती, ज्योति प्रसाद अग्रवाल जन्म दिवस, लिएंडर पेस जयंती, मुमताज महल स्मृति दिवस, जीजाबाई शाहजी भोसले पुण्य तिथि, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी रानी लक्ष्मीबाई शहीद दिवस, गोपबंधु दास स्मृति दिवस, राष्ट्रीय सब्जियाँ खाओ दिवस, विश्व मरुस्थलीकरण, सूखा रोकथाम दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗽 Vastu Tips 🗼
वास्तु शास्त्र में आज हम आचार्य श्री गोपी राम से बात करेंगे विभिन्न ग्रहों की दिशा के बारे में। पूर्व दिशा को सूर्य ग्रह की दिशा माना जाता है, यानी सूर्यदेव पूर्व दिशा के स्वामी हैं। इसके अलावा चंद्रमा वायव्य कोण, यानी उत्तर-पश्चिम दिशा के स्वामी है। मंगल ग्रह दक्षिण दिशा के स्वामी हैं। बुध ग्रह उत्तर दिशा के स्वामी हैं। बृहस्पति, यानी गुरु ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा के स्वामी हैं।
शुक्र ग्रह आग्नेय कोण, यानी दक्षिण-पूर्व दिशा के स्वामी है और शनि ग्रह पश्चिम दिशा के स्वामी हैं। दरअसल ये सारी बातें हम आपको इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व होता है। अगर चीजों को उनकी सही दिशा के हिसाब से रखा जाएं, तो उस चीज के साथ ही उस दिशा के भी शुभ परिणाम मिलते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गर्म तेल से मालिश : कमर की नस दबने पर गर्म तेल से मालिश करें। इसके लिए आप सरसों के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्म तेल से मालिश करने पर मांसपेशियों को आराम मिलेगा और दर्द, सूजन को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, ध्यान रहे कि ज्यादा जोर लगाकर मालिश न करें।
पॉश्चर सही करें : खराब पॉश्चर के कारण कमर की नस दबने की समस्या हो सकती है। दबी नसों को खोलने के लिए हमेशा सही पॉश्चर में बैठें। इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और नसों के दर्द से आराम मिलेगा।
मेथी के बीज : दबी नसों को खोलने के लिए आप मेथी के बीज का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। नसों के दर्द को ठीक करने के लिए मेथी के बीज काफी लाभकारी होते हैं। इसके लिए मेथी के बीजों को पानी में भिगोकर रख दें। फिर इसे पीसकर पेस्ट तैयार कर लें और प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इससे दबी हुई नस को खोलने में मदद मिलती है।
सेंधा नमक : दबी नसों के दर्द को ठीक करने के लिए सेंधा नमक के पानी से स्नान करना काफी फायदेमंद होता है। इससे दर्द और सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इसके लिए एक बाल्टी गर्म पानी में सेंधा नमक डालकर नहाएं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
मंजिष्ठादि क्वाथ चर्मरोगों में बहुत लाभदायक है। इसके प्रयोग से त्वचा की रक्ताभिसरण क्रिया बढ़ कर उसकी विनियमन क्रिया में परिवर्तन होता है। इस से वातरक्त, दाद, खुजली, सफ़ेद दाग में फायदा होता है।
मूत्राश्मरी या पथरी में यह काफी फायदेमंद है। इस के चूर्ण को १ ग्राम की मात्रा में दिन में ३ बार देना चाहिए। इस से सभी प्रकार की पथरी गलकर निकलने में सहायता होती है।
शहद के साथ घिसकर लगाने से दाद, सफेद दाग जैसे पुराने चर्म रोगों में लाभ होता है।
इस के जड़ का क्वाथ कामला (पीलिया), मूत्रावरोध, पथरी, मासिक धर्म समय पर न आना, खूनयुक्त दस्त और त्वचा विकारों में काफी लाभ पहुंचाता है। (आचार्य श्री गोपी राम)
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्री हनुमान बाहुक पाठ
श्री गणेशाय नमः
श्रीजानकीवल्लभो विजयते
श्रीमद्-गोस्वामी-तुलसीदास-कृत
छप्पय
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु ।
भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ॥
गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ।
जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।।
कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट ।
गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट ।१।।
स्वर्न-सैल-संकास कोटि-रबि-तरुन-तेज-घन ।
उर बिसाल भुज-दंड चंड नख-बज बज्र-तन ॥।
पिग नयन, भृकुटी कराल रसना दसनानन ।
कपिस केस, करकस लंगूर, खल-दल बल भानन ॥।
कह तुलसिदास बस जासु उर मारुतसुत मूरति बिकट ।
संताप पाप तेहि पुरुष पहिं सपनेहुँ नहिं आवत निकट ।॥२॥।
झूलना
पंचमुख-छमुख-भृगु मुख्य भट असुर सुर,
सर्व-सरि-समर समरत्थ सूरो ।
बकुरो बीर बिरुदैत बिरुदावली,
बेद बंदी बदत पैजपूरो ।।
जासु गुनगाथ रघुनाथ कह, जासुबल,
बिपुल-जल-भरित जग-जलधि झूरो ।
दुवन-दल-दमनको कौन तुलसीस है,
पवन को पूत रजपूत रुरो ।।३॥।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।

