विवाह पंचमी 2024 विवाह पंचमी व्रत की तिथि, समय, शुभ मुहूर्त व कथा, महत्व और पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 विवाह पंचमी 2024 विवाह पंचमी व्रत की तिथि, समय, शुभ मुहूर्त व कथा, महत्व और पूजा विधि
⭕ HIGHLIGHTS
🔹 विवाह पंचमी का विशेष महत्व है।
🔹 इस दिन श्रीराम विवाह का आयोजन किया जाता है।
🔹 श्रीराम की पूजा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है
🔹 यह दिन वैवाहिक संबंधों को मजबूत और खुशहाल बनाता है।
🌦️ मार्गशीष माह में कई त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें विवाह पंचमी का पर्व भी शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मार्गशीष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और मां सीता का विवाह हुआ था। इसलिए इस तिथि पर हर वर्ष विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस शुभ तिथि पर भगवान राम और मां सीता की जातक विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस कार्य को करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति का वास रहता है। इसके अलावा इस दिन श्रीराम विवाह का आयोजन भी किया जाता है, जिससे जीवन खुशहाल होता है। चलिए इस आर्टिकल में आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं विवाह पंचमी की डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
⚛️ विवाह पंचमी 2024 शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 05 दिसम्बर को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 06 दिसम्बर को दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 06 दिसम्बर 2024) को विवाह पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीराम और मां सीता की शादी की वर्षगाँठ मनाई जाती है।
🤷🏻 विवाह पंचमी 2024 के दिन इच्छापूर्ति के लिए करें यह उपाय
वैवाहिक जीवन में चल रही किसी भी प्रकार की समस्या के लिए आपको विवाह पंचमी के दिन श्रीरामचरितमानस के राम – सीता प्रसंग का जप करना चाहिए|
माना जाता है कि श्रीरामचरितमानस को विवाह पंचमी के दिन ही पूर्ण हुई थी| इसी कारण से विवाह पंचमी के दिन श्रीरामचरितमानस का घर में करवाने से घर में उपस्थित सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाती है| तथा सभी प्रकार के संबंध अच्छे बनने लगते है|
मनचाहे वर की प्राप्ति के विवाह पंचमी 2024 का व्रत करके भगवान श्री राम तथा माता सीता की पूजा करनी चाहिए| उनका विवाह संपन्न करवाएं तथा उनसे अपनी इच्छा पूर्ति के लिए कामना करें|
संतान के यदि किसी प्रकार कोई समस्या है तो वह भी इसके द्वारा हल की जा सकती है|
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री राम तथा माता सीता की पूजा करने तथा राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है|
🤷🏻♀️ विवाह पंचमी 2024 के दिन रखें इन बातों का विशेष ध्यान
शास्त्रों के अनुसार यह बताया गया है कि विवाह पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए| इसके पश्चात भगवान श्री राम तथा माता सीता के विवाह का संकल्प ले तथा विवाह की तैयारी प्रारम्भ करें|
पूजा के स्थान पर भगवान श्री राम तथा माता सीता की मूर्ति को स्थापित कीजिये| इसके बाद में भगवान श्री राम को पीले रंग के तथा लाल रंग के वस्त्र माता सीता को अर्पित किया जाता है|
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सम्पूर्ण पूजा होने के पश्चात सुन्दरकाण्ड का पाठ करना चाहिए| ऐसा कहा जाता है कि सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती है|
🙇🏻♀️ पूजा-विधि
▪️ स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
▪️ भगवान श्री राम व मां सीता का जलाभिषेक करें
▪️ प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
▪️ अब भगवान राम को पीले रंग के फूल, चंदन, फल और वस्त्र अर्पित करें
▪️ मां सीता को गुलाबी या लाल रंग के फूल, चंदन और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं
▪️ मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
▪️ मंत्र जाप या चालीसा का पाठ करें
▪️ पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री राम और मां सीता की आरती करें
▪️ प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
▪️ अंत में क्षमा प्रार्थना करें
📖 विवाह पंचमी 2024 की पौराणिक कथा_
भगवान श्री राम तथा माता सीता को भगवान विष्णु व लक्ष्मी माता का अवतार माना जाता है| जिन्होंने इस धरती पर राजा जनक की पुत्री तथा महाराज दशरथ के पुत्र के रूप में जन्म लिया था| पुरानी कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि सीता माता का जन्म धरती हुआ था| जब राजा जनक खेत में हल जोत रहे थे|
उस समय राजा जनक को नन्ही बच्ची मिली थी| राजा जनक ने उस नन्ही बच्ची को सीता नाम दिया था| इस वजह से सीता माता को जनक पुत्री के नाम से भी जाना जाता है| राजा जनक के पास एक शिव धनुष था| जिसे भगवान परशुराम जी के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति नहीं उठा सकता था| उस धनुष को बचपन में सीता माता ने उठा लिया था|
तब राजा जनक ने यह निश्चय किया था कि वह उसी व्यक्ति को अपनी पुत्री के योग्य मानेंगे, जो भगवान शिव के इस धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा| इसके पश्चात राजा जनक के द्वारा एक स्वयंवर का आयोजन किया गया|
कई सारे लोगों ने धनुष पर प्रत्यंचा चढाने का प्रयास किया किन्तु कोई भी व्यक्ति उस धनुष को हिला ना सका| जिससे राजा जनक काफी परेशान होने लगे| राजा की ऐसी दशा को देखकर महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से इस प्रतियोगिता में भाग लेने को कहा|
अपने गुरु की आज्ञा का पालन करके भगवान श्री राम ने उस शिव धनुष को उठाया तथा उस पर प्रत्यंचा चढाने लगे किन्तु वह धनुष टूट गया| इस प्रकार से उस स्वयंवर को जीतकर भगवान श्री राम ने माता सीता से विवाह किया| वही माता सीता ने भी प्रसन्न मन के साथ भगवान श्री राम के गले में वरमाला डाली|

