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शक्ति का सदुपयोग : शांति और उत्थान का मार्ग

दिव्य चिंतन  : हरीश मिश्र, लेखक (स्वतंत्र पत्रकार)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड में कहा कि ‘ये युद्ध का युग नहीं है’।
    यूक्रेन -रूस युद्ध के ढाई साल के बाद भी भारत अपने वचन और संदेश पर कायम है। मोदी जी ने यूक्रेन के दौरे पर स्पष्ट किया है कि भारत किसी एक का पक्ष नहीं लेगा, लेकिन वह शांति स्थापना के लिए प्रयत्न करेगा।
    रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद से  मोदी जी दुनिया के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने  दोनों ही देशों के राष्ट्रपतियों को गले लगाया, कंधे पर हाथ रख कर शांति का संदेश दिया कि *” शक्ति संचय के पथ पर चलिए, शक्ति का दुरुपयोग मत कीजिए, शक्ति का दुरुपयोग मानवता के लिए विध्वंस लाता है।”*  भौतिक, आध्यात्मिक सुख शांति के लिए, समृद्धि तथा स्वास्थ्य के लिए विश्व को शांति के मार्ग पर चलना ही होगा।
  गीता का संदेश है *उद्धरेत् आत्मनात्मानम् !* कि यदि अपना उत्थान चाहते हो तो उसका प्रयत्न स्वयं करना होगा। दूसरा कोई आपकी दशा और दिशा को नहीं बदल सकता। सकारात्मक मित्रों का सहयोग मिल सकता है, पर रास्ता खुद को ही बनाना होगा।  मंजिल दूसरों के कंधे पर बैठकर पार नहीं की जा सकती। विश्व में शांति दूसरे की कृपा दृष्टि से सफल नहीं हो सकती । हर राष्ट्र को शांति के पथ पर चलना पड़ेगा और अपने पैर पर खड़ा होना होगा।  बिना परिश्रम के ना तो किसी भी राष्ट्र की तकदीर-तस्वीर  बदली जा सकती है और ना ही कल्याण हो सकता है।

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