आज का पंचाग शनिवार 17 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 17 सितम्बर 2022
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
।। श्री हरि आप सभी का कल्याण करें ।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- सप्तमी तिथि 14:15:33 तक तदोपरान्त अष्टमी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य और अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी है।
💫 नक्षत्रः- रोहिणी 12:21:00 तक तदोपरान्त मृग नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्र हैं तथा मृग नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं।
📢 योगः- सिद्धि 30:32:02 तक तदोपरान्त व्यतिपात
⚡ प्रथम करण : बव – 02:14 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 03:21 ए एम, सितम्बर 18 तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 06:06:00 AMबजे से 07:38:00 AM बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से अदरक खाकर जायें।
🤖 राहुकालः- राहु काल 09:11:00 AM बजे से 10:43:00AM तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:27:58
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:38:18
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:40 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:18 पी एम से 03:07 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:12 पी एम से 06:36 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:24 पी एम से 07:34 पी एम
💧 अमृत काल : 08:50 ए एम से 10:36 ए एम 05:21 ए एम, सितम्बर 18 से 07:08 ए एम, सितम्बर 18
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:52 पी एम से 12:39 ए एम, सितम्बर 18
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:07 ए एम से 12:21 पी एम
🪷 द्विपुष्कर योग : 12:21 पी एम से 02:14 पी एम
❄️ रवि योग : 06:07 ए एम से 12:21 पी एम
💦 अमृत सिद्धि योग : 06:07 ए एम से 12:21 पी एम
🌪️ वज्र योग – आज सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक
🕉️ सिद्धि योग – पूरा दिन पार कर के अगले दिन सुबह 6 बजकर 34 मिनट तक
☄️ रोहिणी नक्षत्र – आज दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सौंफ चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कुछ पंचांग में आज कोई श्राद्ध नहीं है, सप्तमी का श्राद्ध उदयतिथि अनुसार आज 14:16 से पहले, अष्टमी का श्राद्ध 14:16 के बाद या कल, श्री महालक्ष्मी व्रत समाप्त, श्री अशोकाष्टमी, श्री कालाष्टमी, विश्वकर्मा पूजन, संकल्प आदि में परियोजनीय शरद् ऋतु प्रारंभ, श्री नरेन्द्र मोदी जन्म दिवस, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस, सूर्य की कन्या संक्रान्ति 07:22 पर
✍🏽 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र मूल रूप से वेदों का ही एक हिस्सा रहा है | गौरतलब है कि हमारे चार वेदों के अलावा उपवेद भी लिखे गए हैं जिनमे से एक स्थापत्य वेद था| कालांतर में इसी उपवेद को आधार बनाकर वास्तुशास्त्र का विकास हुआ और इससे सम्बंधित कई साहित्य भारत के अलग अलग हिस्सों में लिखे गए | जैसे की दक्षिण भारत में मयमतम और मानासर शिल्प-शास्त्र की रचना हुई वही विश्वकर्मा वास्तु शास्त्र की रचना उत्तर भारत में हुई|
प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में वास्तु के कई सिद्धांत मिलते है | ऋग्वेद में वास्तोसपति नामक देवता का भी उल्लेख वास्तु के सन्दर्भ में किया गया है | इसके अतिरिक्त अन्य कई प्राचीन ग्रंथो और साहित्यों में वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है जैसे की मत्स्य पुराण, नारद पुराण और स्कन्द पुराण और यहाँ तक की बौद्ध साहित्यों में भी इसका जिक्र होता है|
ऐसा माना जाता है की गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को भवन निर्माण के सम्बन्ध में उपदेश भी दिए थे | बौद्ध साहित्यों में अलग-अलग प्रकार के भवनों का उल्लेख है | इन प्राचीन रचनाओं में स्कन्द पुराण काफी अहमियत रखता है | इसमें महानगरो के बेहतर विकास और समृद्धि के लिए वास्तु के सिद्धांत बताये गए हैं|
वही नारद पुराण में मंदिरों के वास्तु के अलावा जलाशयों जैसे कि झील, कुएं, नहरें आदि किस दिशा में होनी चाहिए, घरों में पानी के स्त्रोत किस दिशा में होने चाहिए इस सम्बन्ध में जानकारी मिलती है|
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बैंगन प्यूरीन का एक स्रोत माना जाता है। इसलिए यूरिक एसिड के मरीजों को इसके सेवन से बचना चाहिए। अगर आप इसको अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो इससे आपका यूरिक एसिड का लेवल तो बढ़ेगा ही साथ में शरीर में सूजन, चेहरे में रैशेज और खुजली जैसी परेशानी भी हो सकती है।
मटर यूरिक एसिड के मरीजों को सूखे मटर का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें भी अधिक मात्रा में प्यूरीन पाया जाता है। यदि आप इसका सेवन करेंगे तो यह आपके लिए खतरनाक हो सकता है।
पालक अगर आप यूरिक एसिड की समस्या से परेशान हैं तो पालक, मशरूम, पत्तागोभी जैसी सब्जियों के सेवन से बचें क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो यूरिक एसिड के मरीज के लिए हानिकारक होता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी_☘️
एड़ी के दर्द से राहत दिलाएगा आक का पत्ता
आयुर्वेद की मानें तो एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के लिए आक का पत्ता फायदेमंद हो सकता है। आक के पत्ते को मदार, आर्क और अकौआ के नाम से भी जाना जाता है। यूं तो कुछ लोग इस पौधे को जहरीला मानते हैं और इससे दूरियां बनाए रखते हैं लेकिन सेहत के लिए ये पौधा काभी लाभकारी है। ऐसे में आइए जानते हैं एड़ी के दर्द से निजात पाने के लिए कैसे इस पौधे का इस्तेमाल करें।
👉🏼इस तरह करें आक के पत्तों का इस्तेमाल
सबसे पहले एक पैन में थोड़े से पानी और आक के पत्तों को डाल दें।
उसके बाद इसमें थोड़ा सा नमक, अजवाइन, सौंफ डालकर उबालें।
अब इस पीनी से एड़ी को धो लें।
इसके बाद आक का पत्ता लेकर एड़ी के ऊपर रख लें।
फिर इसे किसी कपड़े की मदद से बांध लें।
ऐसा करने से आपको काफी लाभ मिलेगा।
एड़ी के दर्द से छुटकारा दिलाएगा ये भी उपाय
एड़ी के दर्द को दूर करने के लिए हल्दी, मेथी और सौंठ भी कारगर होता है। इसके लिए तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बना लें। इसके बाद नियमित रूप से सुबह-शाम खाने से पहले 2-2 ग्राम सेवन करें। आप अश्वगंधा और मोरिंगा का भी सेवन कर सकते हैं। ये भी एड़ी के दर्द से राहत दिला दिलाएगा।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने शास्त्रो में काफी कुछ बताया है। हमारे द्वारा बताई गई हर एक-एक बातें सभी के जीवन में लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करती हैं। शास्त्रो में हमने बताया है कि बुरा समय आने से पहले ही उसका आभास होने लगता है। अगर हम घर या आसपास घटने वाली कुछ घटनाओं पर ध्यान दें तो हमें बुरा वक्त आने का संकेत मिल जाएगा। हमनें अपने शास्त्रो में ऐसे ही संकेत के बारे में बताया हैं जो घर पर आने वाले आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हैं। आइए जानते हैं उन संकेतों के बारे में जो घर पर आने वाले आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हैं।
‘तुलसी के पौधे का सूख जाना, घर में क्लेश होना, शीशे का बार-बार टूटना, पूजा पाठ का अभाव और बड़े बुजुर्गों का तिरस्कार करना’
तुलसी के पौधे का सूखना यदि आपके आंगन या घर में लगे तुलसी का पौधा सूखने लगे तो इसका मतलब है कि आपको पैसों की तंगी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही यह भविष्य में आने वाली परेशानी का भी संकेत हो सकता है।
घर में झगड़े होना आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, अगर आपके घर में आए दिन परिवारवालों के साथ लड़ाई होती रहती हैं तो ऐसे में आपके घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होगा। जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है।
शीशे का टूटना आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि जिस घर में बार-बार शीशा टूट रहा हो उस घर के व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
हम कहते हैं कि घर में सुख समृद्धि के लिए नियमित रूप से पूजा-पाठ होना जरूरी है। हमारे कहने के अनुसार, जिस घर पर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है वहां पर उनकी कृपा बनी रहती है। लेकिन जिस घर में पूजा-पाठ नहीं होता वहां पर मां लक्ष्मी कभी भी नहीं आती हैं।
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⚜️सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।


