ज्योतिष

आज का पंचाग शुक्रवार 07 अक्टूबर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

. ………… ✦••• जय श्री हरि •••✦ ……….
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🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 07 अक्टूबर 2022

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

🐚 07 अक्टूबर 2022 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज से दाल त्यागने का व्रत आरम्भ हो जाता है। आज प्रदोष व्रत है एवं पद्मनाभ द्वादशी भी आज ही है। अश्विन मास शुक्ल पक्ष की पापांकुशा नाम का एकादशी व्रत तारीख 05 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12:01 PM बजे से शुरू होकर 06 अक्टूबर 2022 को दिन में 09:42 AM बजे तक थी। इसलिए आज 07 अक्टूबर 2022 को पारण का समय पञ्चांग के अनुसार प्रातः 06:48 AM तक ही है। परन्तु प्रातः कालीन का समय सुबह 05:49 AM से 08:10 AM तक है। पारण हेतु समय का चयन स्वयं करें।।

🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- द्वादशी तिथि 07:27:00 बजे तक तदोपरान्त त्रयोदशी तिथि
🖍️ तिथि स्वामीः- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु जी हैं तथा त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- शतभिषा नक्षत्र 13:52:21 तक तदोपरान्त पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु देव हैं तदोपरान्त पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के स्वामी गुरु देव हैं।
🔊 योगः- गंड 23:29:50 तक तदोपरान्त वृद्धि
प्रथम करण : बालव – 07:26 ए एम तक कौलव – 06:23 पी एम तक
द्वितीय करण: तैतिल – 05:24 ए एम, अक्टूबर 08 तक गर
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल वृद्धि07:44:00 से 09:12:00 तक
⚜️ दिशाशूलः- शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करना चाहिए तथा ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दही खा कर निकलें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 10:40:00 से 12:08:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:47:43
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:31:38
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:28 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:17 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:32 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:06 पी एम से 02:53 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:13 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:00 पी एम से 07:14 पी एम
💧 अमृत काल : 11:31 ए एम से 01:01 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:44 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 08
❄️ रवि योग : 06:17 पी एम से 06:18 ए एम, अक्टूबर 08
☄️ शतभिषा नक्षत्र- आज शाम 6 बजकर 17 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवलिंग का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – त्रयोदशी तिथि का क्षय, प्रदोष व्रत, श्री श्याम बाबा द्वादशी, श्री पद्मनाथ द्वादशी, कार्तिक मास के लिए द्विदल त्याग व्रतारम्भ, आज से वृश्चिक संक्रान्ति पर्यन्त तिल तेल का आकाश में दीप दान करना चाहिए, पंचक जारी, गुरु गोविंद सिंह शहीदी दिवस, चंडीगढ़ स्थापना उदघाटन दिवस, विश्व कपास दिवस
✍🏽 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।

        🏘️ *_Vastu tips_* 🛕

मूर्ति की स्थापना संबंधी वास्तु टिप्स
आइडल प्लेसमेंट: जब आपके पूजा कक्ष का लेआउट और संरचना पूरी हो जाए, तो यह आपकी मूर्ति को रखने का समय है. दीवार से कुछ इंच की दूरी पर और जमीन से कम से कम छह इंच की दूरी आदर्श होती है।
पूजा रूम के दीवारों का रंग हल्का रखें
पूजा कक्ष के लिए सर्वश्रेष्ठ रंग: पूजा रूम की दीवारों का रंग सफेद, हल्का नीला, पीला, पेस्टल रख सकते हैं. यदि आप संगमरमर, सफेद, पीला चुनते हैं, तो यह बहुत अच्छा लगेगा।
पूजा-पाठ की चीजें, धार्मिक किताबें कहां रखें? क्या आप सुनिश्चित नहीं हैं कि अपनी सभी धार्मिक पुस्तकें, दीये और पूजा संबंधी सामान कहां रखें? पूजा कक्ष वास्तु के अनुसार, भंडारण हमेशा दक्षिण-पूर्व की ओर होना चाहिए, मूर्ति के ऊपर कोई भंडारण नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, भंडारण क्षेत्र को साफ रखें और उन वस्तुओं को संग्रहित करने से बचें जो आपको लगता है कि अनावश्यक हैं और बहुत अधिक जगह ले रहे हैं।

            ❇️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️

माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का होता है अपमान
हिंदू धर्म के अनुसार, सोने से बनी चीजों को कमर से नीचे पहनना वर्जित माना गया है। सोने के जेवर कमर के ऊपर तक ही पहना जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु नारायण को सोना अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसे पैरों में नहीं पहनना चाहिए। पैरों में सोने के गहने पहनने से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं और घर में कंगाली छा जाती है। इसके साथ ही घर से शांति और सुख समृद्धि भी दूर भाग जाती है।
पैरों में सोना नहीं पहनने का अन्य कारण
आज जब जरूरी चीजें भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहा है तो सोचिए कोई थोड़ा सा सोना भी कितने मुश्किल से खरीदता होगा। ऐसे में कोई नहीं चाहेगा की उनके सोने के आभूषण की चमक कम हो। पैरों में सोने के जेवरात पहनने से उनपर धूल मिट्टी पड़ सकती है। ऐसे में उसके खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही लोगों की नजर पैरों पर कम ही जाती है तो इसलिए भी सोने के गहने को कमर से नीचे पहनने का कोई फायदा नहीं है। वहीं पैरों की जगह चेहरा, गला, नाक, कान और हाथों में ही सोने के आभूषण खिलते हैं तो इसलिए भी इसे सही जगह पर ही पहनेंं।

           💉 *_आरोग्य संजीवनी_* 🩸

दस्त में क्या न खाएं
दस्त में ऐसा भोजन बिल्कुल ना करें जिससे अपच होने की संभावना बढ़ जाए। इस दौरान तला-भुना, मसालेदार और बहुत ज्यादा भारी भोजन नहीं करना चाहिए।
दस्त में मीठी चीजों को खाने से भी बचना चाहिए। इसलिए दस्त के मरीज को बहुत ज्यादा मीठे फल, गुड़ या मिठाई वगैरह नहीं खानी चाहिए। यहां तक कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का भी प्रयोग खाने में नहीं करना चाहिए।
फाइबर युक्त भोजन भी दस्त के दौरान खाना सही नहीं होता है। क्योंकि इससे पाचन तंत्र तेज होती है और दस्त के दौरान पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। इसलिए दस्त में साबुत अनाज जैसे कि चावल, जौ, गेहूं और सूखे मेवे आदि जैसे फाइबर युक्त चीजें नहीं खानी चाहिए।

           📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️

   *_शुक्रवार ​के दिन करें ये उपाय -​ अगर आप अपने बिजनेस की गति को और आगे बढ़ाना चाहते हैं, दूसरों के मुकाबले अपने बिजनेस की नींव को अधिक मजबूत करना चाहते हैं तो आज के दिन आप मिट्टी का एक खाली घड़ा लीजिये और उस पर काजल का टीका लगाइए। अब उस खाली घड़े पर ढक्कन लगाकर किसी बहते जल के स्त्रोत में प्रवाहित कर दें।आज के दिन ऐसा करने से आपके बिजनेस की गति आगे बढ़ेगी और दूसरों के मुकाबले आपके बिजनेस की नींव अधिक मजबूत होगी।_*
     *_अगर आप अपने दाम्पत्य जीवन में प्यार बढ़ाना चाहते हैं और जिन्दगी में हमसफर का साथ हमेशा बनाए रखना चाहते हैं तो आज के दिन नागकेसर का एक फूल लेकर आएं। आप चाहें तो ताजा फूल लेकर आयें या फिर पंसारी की दुकान से भी आप नागसकेर का फूल ला सकते हैं। अब उस फूल पर एक बूंद शहद लगाएं। इसके बाद उस नागकेसर के फूल को देवी दुर्गा को अर्पित कर दें और देवी मां से अपने दाम्पत्य जीवन में प्यार बढ़ाने के लिए और अपने हमसफर का साथ हमेशा बनाये रखने के लिये प्रार्थना करें। आज के दिन ऐसा करने से आपके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ेगा और जिन्दगी में हमसफर का साथ हमेशा बना रहेगा।_*
     *_अगर आप अपने कामों में सफलता सुनिश्चित करना चाहते हैं तो आज के दिन 250 ग्राम हरे मोटे मूंग लें और उन्हें देवी दुर्गा के मंदिर में दान कर दें । साथ ही अगर हो सके तो आज के दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करें। अगर पूरा पाठ आप आज के दिन न कर पाये तो दुर्गा सप्तशती के केवल एक दो पृष्ठ का पाठ करें । बाकी बचे पृष्ठों को थोड़ा-थोड़ा करके आप अगले कुछ दिनों में पूरा कर लें।आज के दिन ऐसा करने से आपको अपने कामों में सफलता जरूर प्राप्त होगी।_*
     *_अगर आप अपने जीवन में सुख-समृद्धि बनाये रखना चाहते हैं तो उसके लिये आपको आज के दिन नागकेसर के पेड़ को प्रणाम करना चाहिए और उसकी विधि- पूर्वक पूजा करनी चाहिए । अगर आपको नागकेसर का पेड़ न मिले तो पंसारी की दुकान से नागकेसर की सूखी लकड़ी का एक टुकड़ा या नागकेसर का एक सूखा फूल लाकर उसे प्रणाम करें और आज पूरा दिन उसे अपने पास रखें । अगले दिन सुबह उठकर स्नान आदि के बाद उस लकड़ी के टुकड़े या फूल को किसी बहते जल के स्त्रोत में प्रवाहित कर दें । आज के दिन ऐसा करने से आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।_*

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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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